कोर्ट ने खोली खातेदार की पोल, जमीन के पैसे भी लिए और पजेशन से भी रोका
Mukesh Sharma | May 05, 2026, 17:14 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में जमीन मालिकों द्वारा मासूम बनकर जनता से धोखाधड़ी करने पर हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा है कि खातेदार जमीन बेचकर करोड़ों रुपये डकारने के बाद उसे दोबारा बेचकर विवाद खड़ा करते हैं। अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।
News In Short
- कोर्ट ने उजागर की जमीन बेचकर मासूम बनने वाले खातेदारों की लूट की मॉडस-ऑपरेंडी।
- करोड़ों लेकर भी नहीं दिया कब्जा, सिविल विवाद की आड़ में जनता को लूट रहे जमीन मालिक।
- एक ही जमीन को कई बार बेचकर विवाद खड़ा करने का खतरनाक तरीका।
- 350 प्लॉटों के मामले में भी निष्पक्ष जांच न करने वाले अधिकारियों पर कोर्ट ने उठाए सवाल।
- जेडीए को जमीन सरेंडर करने के बाद भी धोखाधड़ी करने वाले आरोपी की जमानत खारिज।
News In Detail
इसके बाद उसी जमीन को दूसरे और तीसरे को बेचकर उनसे भी पैसा ले लेते हैं। बाद में खातेदार जमीन मालिक पूरे मामले को सिविल विवाद बताने की कोशिश करते हैं, जिससे उन्हें आपराधिक कार्यवाही का सामना ना करना पड़े। इस मॉडस-ऑपरेंडी के जरिए खातेदार गाढ़ी कमाई से प्लॉट खरीदने वालों के साथ धोखाधड़ी करता है।
यह है मामला
इस मामले में शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने 30 जुलाई, 2014 को नरसिंह डवलपर से नरसिंह आरकेड योजना में प्लॉट नंबर सी-87 रजिस्टर्ड सेल डीड से खरीदा था। लेकिन, आरोपी श्यामलाल मीणा उन्हें अपने ही प्लॉट में घुसने नहीं देता। उनसे प्लॉट खरीदने के दस्तावेज देने की धमकी देता है।
पुलिस ने याचिकाकर्ता को गिरफ्तार कर लिया था और 31 दिसंबर,2025 से जेल में है। उसका कहना था कि जमीन की कुछ डीलिंग उसके पिता ने की थी। उसका कोई लेना-देना नहीं है। बाकी आरोपियों की जमानत हो चुकी है, इसलिए उसे भी जमानत पर रिहा किया जाए।
यह है मॉडस-ऑपरेंडी
खातेदारों के साथ एग्रीमेंट के अनुसार हाउसिंग सोसायटी ने जमीन की 90-बी करवाने के लिए जेडीए को सरेंडर भी कर दी थी। इस आधार पर हाउसिंग सोसायटी ने पट्टे भी जारी कर दिए थे। हाउसिंग सोसायटी ने खातेदारों की सहमति से प्लॉट बेचे, पट्टे व कब्जा पत्र तथा साइट प्लान जारी किए थे।
लेकिन जमीन का पूरा पैसा लेने के बावजूद खातेदार अब प्लॉट मालिकों को ना तो कब्जा लेने दे रहे हैं और ना ही मकान बनाने दे रहे हैं। यह खातेदारों और हाउसिंग सोसायटी की मिलीभगत का स्पष्ट नमूना है।
बेची नहीं तो भारी-भरकम पैसा कहां से आया
पुलिस ने भी ईमानदारी से नहीं किया काम
यह आश्चर्यजनक व चौंकाने वाला
इस आधार पर हाउसिंग सोसायटी ने प्लॉट बेच दिए। लेकिन अब सभी खातेदार हाउसिंग सोसायटी के साथ मिलीभगत करके साजिशन प्लॉट खरीदने वालों को उनके ही प्लॉट में घुसने तक नहीं दे रहे हैं। यह मेहनत की कमाई से प्लॉट खरीदने वालों के साथ धोखाधड़ी है।
दस्तावेजों से साफ है जमीन बेची थी
इस पर सब खातेदारों की फोटो,बायोमेट्रिक्स और अंगूठे के निशान हैं। पॉवर ऑफ अटार्नी के जरिए सोसायटी के निदेशक को अस्थाई पट्टे जारी करने,इनके बदले भुगतान लेने व अन्य कानूनी औपचारिकताएं करने को अधिकृत किया था।
इसके आधार पर सोसायटी के डायरेक्टर ने सभी काम किए व जमीन को 90-बी के लिए जेडीए केा सरेंडर किया। इसके बाद प्लॉट बनाकर बेचे और भुगतान लिया। खातेदारों को भी उनके हिस्से का पूरा पैसा नगद और बैंक के जरिए दिया। खातेदारों के बैंक स्टेटमेंट से साबित है कि वे 2003 के बाद से ही जमीन का पूरा पैसा ले चुके हैं।
दूसरे व्यक्ति को बेची जमीन
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