राजस्थान का हेल्थ सिस्टम बीमार, पीएचसी-सीएचसी में 50% जांचें भी नहीं हो रही, केंद्र ने पत्र लिखकर जताई कड़ी नाराजगी

Jageshwar prasad | Apr 29, 2026, 19:21 IST
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Ashish Bhardwaj - 2026-04-29T191320.771
Photograph: (the sootr)

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में निर्धारित संख्या की 50% जांचें भी नहीं हो रही हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पीएचसी और सीएचसी स्तर पर जांचों की कमी और डेटा में गलतियों को लेकर राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए सुधार के सख्त निर्देश दिए हैं।

News In Short

राजस्थान के पीएचसी स्तर पर 63 में से केवल 15 जांचें हो पा रही हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 97 में से मात्र 32 से 37 जांचें हो पा रही हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने राजस्थान हेल्थ डिपार्टमेंट को पत्र लिख जताई नाराजगी।
राज्य के दावों और केंद्र के सर्वे में जांचों की संख्या को लेकर बड़ा अंतर उजागर।
केंद्र ने जांचों को बढ़ाने और पोर्टल पर सही डेटा अपलोड करने का दिया निर्देश।

News In Detail

Jaipur: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच का दावा कागजों पर तो मजबूत दिख रहा है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने राजस्थान स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर सिस्टम की लचर स्थिति पर गहरा असंतोष जताया है। मंत्रालय ने साफ कहा है कि प्रदेश के पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पतालों में निर्धारित संख्या के मुकाबले आधी जांचें भी नहीं हो पा रही हैं।

कहां कितनी जांचें?

केंद्र सरकार ने हर स्तर के अस्पतालों के लिए जरूरी जांचों (Essential Diagnostics) की एक लिस्ट तय कर रखी है। राजस्थान की वर्तमान स्थिति (नोडल ऑफिसर की रिपोर्ट के आधार पर) कुछ इस प्रकार है:

अस्पताल का स्तरनिर्धारित जांचें वर्तमान में हो रही जांचें
PHC (प्राथमिक केंद्र)6315
CHC (सामुदायिक केंद्र)9737
SDH (उप-जिला अस्पताल)11196
DH (जिला अस्पताल)13496
SC (सब-सेंटर)1414


डेटा में झोल पर भी भड़का केंद्र

मंत्रालय ने केवल जांचों की कमी पर ही नहीं, बल्कि राज्य द्वारा दिए गए डेटा पर भी सवाल उठाए हैं। मंत्रालय के ODK (Open Data Kit) डैशबोर्ड के डेटा और राज्य के नोडल ऑफिसर की रिपोर्ट में भारी अंतर मिला है:

अस्पताल का स्तरनिर्धारित लक्ष्य राज्य नोडल ऑफिसर का दावाकेंद्र का ODK सर्वे डेटा
जिला अस्पताल (DH)1349653
उप-जिला अस्पताल (SDH)1119642
सामुदायिक केंद्र (CHC)973732
प्राथमिक केंद्र (PHC)631518
सब-सेंटर (SC)141407


क्या है असली समस्या?

सबसे बड़ी बाधा संसाधनों का भारी अभाव है। प्रदेश के कई स्वास्थ्य केंद्रों पर आधुनिक मशीनें तो पहुंच गई हैं, लेकिन रखरखाव की कमी के कारण वे अक्सर खराब पड़ी रहती हैं। इसके साथ ही, लैब टेक्नीशियनों और विशेषज्ञ स्टाफ पद खाली होने की वजह से मशीनों को चलाने वाला कोई नहीं है।

केंद्रीय मंत्रालय के निरीक्षण में यह बात सामने आई है कि अस्पतालों में केवल जांचों का ही संकट नहीं है, बल्कि जीवन रक्षक और आवश्यक दवाइयों का स्टॉक भी पर्याप्त नहीं है। जांच और दवाओं की इस दोहरी मार के कारण मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों और लैब का रुख करना पड़ता है, जो नि:शुल्क उपचार के सरकारी वादों पर सवालिया निशान लगाता है।

अंत में, डाटा मिसमैच की समस्या ने इस संकट को और अधिक गंभीर बना दिया है। पोर्टल पर धरातल की वास्तविक स्थिति दर्ज करने के बजाय अक्सर गलत आंकड़े फीड किए जा रहे हैं। इस फर्जी रिपोर्टिंग की वजह से सिस्टम की असली खामियां छिपी रहती हैं। यही कारण है कि जब केंद्र ने ODK (Open Data Kit) डैशबोर्ड के डेटा और राज्य के नोडल ऑफिसर की रिपोर्ट में तुलना की तो बड़ा झोल उजागर हो गया।

मंत्रालय के सख्त निर्देश

केंद्र सरकार ने राजस्थान स्वास्थ्य विभाग को 31 मार्च तक का डेटा सुधारने और जांचों की संख्या में तुरंत बढ़ोतरी करने के निर्देश दिए हैं। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि नि:शुल्क जांच योजना का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचना अनिवार्य है।

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