हाल ही में मां बनी महिला कर्मचारियों के लिए बने तबादला नीति, राजस्थान हाई कोर्ट ने दिया आदेश
Jageshwar prasad | Oct 02, 2026, 13:03 IST
हाई कोर्ट ने कहा नव प्रसूता कर्मचारियों के लिए बने तबादला नीति
राजस्थान हाई कोर्ट ने हाल ही में मां बनी महिला कर्मचारियों के तबादलों पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। यह निर्णय सुमन मीणा की याचिका के संदर्भ में लिया गया है। अदालत ने राज्य सरकार को एक उचित तबादला नीति बनाने के निर्देश जारी किए हैं। इस नीति के अभाव में मां और शिशु को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला।
- नव प्रसूता कर्मचारियों के लिए तबादला नीति।
- मां और बच्चे की रक्षा जरूरी।
- तबादला आदेश पर छह सप्ताह की रोक।
- सरकार को निर्देश जारी।
सरकार को मशीनी अंदाज में तबादला करके इस बंधन को नहीं तोड़ना चाहिए। अदालत ने राज्य सरकार को नव प्रसूता कर्मचारियों के लिए एक उचित तबादला नीति (Transfer Policy) बनाने के निर्देश दिए हैं। ऐसी नीति के अभाव में मां और शिशु दोनों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
किस मामले में आया फैसला?
साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता के प्रतिवेदन को पांच सप्ताह के भीतर तय करने को कहा है। इससे याचिकाकर्ता को राहत मिली है। अब विभाग को तय समय में फैसला लेना होगा।
याचिका में क्या कहा गया
याचिका में अधिवक्ता संस्कृति गौतम ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता सवाई माधोपुर के गंगापुर सिटी में वरिष्ठ अध्यापिका के तौर पर कार्यरत है। उसने गत 13 मई को बच्चे को जन्म दिया था।
इसके बाद 7 जुलाई को विभाग ने उसका तबादला करौली जिले में कर दिया। याचिका में आगे कहा गया कि तकनीकी आधार पर उसे मातृत्व अवकाश नहीं दिया गया है। इसका कारण बताया गया कि वह पूर्व में दो बार मातृत्व अवकाश ले चुकी है।
हालांकि पूर्व में एक संतान के जन्म के बाद उसकी मृत्यु हो गई थी। याचिकाकर्ता ने मानवीय आधार पर तबादला आदेश को निरस्त कराने के लिए राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण में अपील दायर की थी। लेकिन अधिकरण ने उसे खारिज कर दिया।
दो महीने का है शिशु
याचिका में कहा गया है कि उसका नवजात शिशु अभी केवल दो महीने का है। वह पूर्ण रूप से अपनी मां पर निर्भर है। ऐसे में उसका किसी दूरस्थ स्थान पर तबादला करना पूरी तरह अनुचित है।
अदालत ने कहा कि किसी दूरस्थ स्थान पर तबादला करना दो महीने के बच्चे को उसकी मां से जबरन अलग करने जैसा है। इससे न केवल उनके अमूल्य अधिकारों का हनन होगा। बल्कि शिशु को मानसिक आघात, असुरक्षा और कुपोषण का खतरा भी उत्पन्न होगा।
अदालत ने कहा कि इसकी किसी भी तरह से भरपाई नहीं की जा सकती। इसलिए ऐसे मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।
क्यों जरूरी है तबादला नीति
नीति बनने से विभाग को स्पष्ट दिशा मिलेगी। साथ ही नव प्रसूता कर्मचारियों को मानवीय आधार पर राहत मिल सकेगी। इससे मां और बच्चे के स्वास्थ्य पर बुरा असर नहीं पड़ेगा।
क्यों अहम है यह फैसला
यह फैसला अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। इसमें मां और बच्चे के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी गई है। अब देखना जरूरी है कि सरकार कितनी जल्दी नीति बनाती है।
क्या जयपुर एयरपोर्ट पर फ्लाइट कैंसिलेशन के चलते यात्रियों की सुरक्षा को खतरा है?
By Jyoti Mahender Bhardwaj
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार बोले सरकार ने भागीरथपुरा रिपोर्ट मैनिपुलेट की, रिटायर्ड जस्टिस पर दबाव डाल महापौर, पार्षद को बचाया
By Sanjay Gupta
नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के चलते छत्तीसगढ़, बिहार और गोवा रूट की 6 एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द, देखें पूरी सूची
By Harrison Masih
सीएचसी राजपुर है ही नहीं तो कैसे बना बजट, स्वास्थ्य विभाग की खरीदी सूची में बड़ी विसंगति
By Arohi Raj
राजस्थान में मानसून की विदाई के बाद मौसम कैसे बदलेगा और लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
By Jyoti Mahender Bhardwaj
एलपीजी ई-केवाईसी नहीं होने से माननीयों पर भी गिरी गाज, मंत्री-विधायक समेत 83 हजार कनेक्शन ब्लॉक
By Aman Vaishnav
सांदीपनि स्कूल बस सुविधा का वादा अधूरा: 19 जिलों के करीब 1.5 लाख बच्चे पैदल या जोखिम भरे साधनों से स्कूल जाने को मजबूर हैं
By Arohi Raj