बजरी माफिया के सामने लाचार सरकार, दावों में विशेष अभियान, धरातल पर अवैध खनन का खुला खेल
Ashish Bhardwaj | Feb 10, 2026, 14:22 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में सरकार बजरी माफिया के आगे लाचार दिख रही है। सरकार ने अवैध खनन के खिलाफ विशेष अभियान चलाने का दावा किया, लेकिन धरातल पर माफिया का खौफ और खून का खेल ही नजर आता है।
News In Short
- राजस्थान में अवैध खनन के खिलाफ विशेष अभियान का दावा
- धरातल पर बजरी माफिया का खौफ और खून का खेल
- प्रदेश के 10 जिलों में अवैध खनन की अधिक बुरी स्थिति
- 5 साल में 24 मौतें और बजरी तस्करी के 10 हजार मामले सामने
- सुप्रीम कोर्ट दे चुकी कई बार निर्देश, फिर भी माफिया पर अंकुश नहीं
News In Detail
राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सख्त निर्देशों के बावजूद अवैध खनन के खिलाफ 'विशेष अभियान' महज कागजी साबित हो रहा है। माफिया की पैठ इतनी गहरी है कि खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग की मिलीभगत और राजनीतिक संरक्षण के कारण करोड़ों रुपए की सरकारी रॉयल्टी का नुकसान हो रहा है। भीलवाड़ा जिले से अवैध रूप से दोहन की जा रही बजरी का बेखौफ परिवहन चित्तौड़गढ़ के रास्ते मध्य प्रदेश तक किया जा रहा है।
अवैध खनन से 10 जिले 'असुरक्षित'
माफिया और पुलिस में संघर्ष
मिलीभगत के भी आए मामले सामने
राजस्थान में बजरी माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई में अब तक काफी संख्या में गिरफ्तारियां हुई हैं। 2025 में खान विभाग की ओर से 60 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी (मई 2025 तक), साथ ही अलग-अलग जिलों में पुलिस द्वारा की गई कार्यवाहियों में 9 और 7 जैसे बड़े समूह (अक्टूबर 2024 व फरवरी 2026) गिरफ्तार हुए हैं, जिसके तहत सैकड़ों वाहन भी जब्त किए गए हैं।
माफिया बेच चुका करोड़ों टन बजरी
चौंकाने वाली बात यह है कि खान विभाग सालाना 10 से 12 करोड़ रुपए बजरी के अवैध खनन पर पैनल्टी वसूल चुका है, लेकिन खनन माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होने से उनके हौसले बुलंद है। गौरतलब है कि प्रदेश के 25 जिलों में सर्वाधिक 12 जगह बड़े स्तर पर अवैध खनन हो रहा है।
यह कह चुका है सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि बजरी का खनन वहीं होगा, जहां बजरी माइंस की पर्यावरण क्लियरेंस आ चुकी है। बाकी माइंस की पर्यावरण क्लियरेंस भी 2014-15 की सिफारिशें मानते हुए जारी की जाएं। एम्पावर्ड कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा था कि अवैध बजरी परिवहन को लेकर पकड़े गए वाहनों पर पर्यावरण एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए। राजस्थान में इस एक्ट के तहत अब तक एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है।
सीबीआई जांच के लिए कह चुका कोर्ट
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