मिड डे मील योजना में 2000 करोड़ रुपए का घोटाला, एसीबी ने 21 आरोपियों के खिलाफ दर्ज किया केस
Purshottam Kumar Joshi | Jan 08, 2026, 16:47 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में बच्चों के लिए मिड डे मील योजना में करीब 2000 करोड़ रुपए का बड़ा घोटाला सामने आया है। एसीबी ने अब एक्शन में आते हुए कॉनफैड अधिकारियों सहित 21 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह मामला कोविड महामारी के दौरान का है।
Jaipur. राजस्थान में कोविड महामारी के दौरान मिड डे मील योजना में करीब 2000 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया है। एसीबी ने कॉनफैड अधिकारियों सहित 21 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
भ्रष्ट अधिकारियों पर यह कैसी मेहरबानी, एसीबी को नहीं मिल रही अभियोजन स्वीकृति
राजस्थान में कोविड-19 महामारी के दौरान मिड डे मील योजना में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने इस मामले में कॉनफैड के अधिकारियों, निजी फर्मों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ 21 आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। यह घोटाला करीब 2000 करोड़ रुपए का है, जिसमें अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की गंभीर शिकायतें सामने आईं हैं।
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कोविड काल में जब स्कूल बंद थे, तब मिड डे मील योजना के तहत राज्य सरकार ने स्कूली बच्चों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए कॉम्बो पैक का वितरण करने का आदेश दिया था। यह आपूर्ति कॉनफैड के माध्यम से की गई थी। दावा किया गया कि सामग्री एफएसएसएआई और एगमार्क मानकों के अनुरूप है, और स्कूलों तक डोर-टू-डोर डिलीवरी की गई। हालांकि, जांच में यह सामने आया कि पूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं और वास्तविक रूप से माल की आपूर्ति नहीं की गई।
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एसीबी की प्राथमिक और विस्तृत जांच में यह पाया गया कि मिड डे मील योजना से जुड़े अधिकारियों और कॉनफैड के अधिकारियों ने आपसी मिलीभगत से नियमों में मनमाने बदलाव किए। इसके परिणामस्वरूप योग्य फर्मों को टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया और अनधिकृत फर्मों को अनुचित लाभ दिया गया। इसके बाद इन फर्मों ने फर्जी आपूर्तिकर्ताओं और ट्रांसपोर्टरों के साथ एक संगठित नेटवर्क बनाया, जिससे घोटाले का दायरा बढ़ा।
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जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में बिना वास्तविक माल की खरीद और आपूर्ति के, फर्जी बिल तैयार किए गए थे। इन फर्जी बिलों के आधार पर सरकारी भुगतान उठा लिया गया। यह घोटाला इतना बड़ा था कि इससे राज्य सरकार के राजकोष को करीब 2000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
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इस घोटाले में कॉनफैड के सहायक लेखाधिकारी, प्रबंधक, सहायक प्रबंधक, गोदाम कीपर, सुपरवाइज़र, केंद्रीय भंडार के क्षेत्रीय और डिप्टी मैनेजर, और तिरूपति सप्लायर्स, जागृत एंटरप्राइजेज, एमटी एंटरप्राइजेज, साई ट्रेडिंग जैसे निजी फर्मों के मालिकों को आरोपी बनाया गया है। एसीबी ने आरोपियों के वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजों की कूटरचना और सरकारी धन के दुरुपयोग की गहन जांच शुरू कर दी है।
कोविड-19 महामारी के दौरान मिड डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पोषण की आपूर्ति करना था, लेकिन इस घोटाले ने योजना के उद्देश्य को पूरी तरह से बिगाड़ दिया। फर्जी आपूर्ति और भ्रष्टाचार के चलते, न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ, बल्कि उन बच्चों तक पोषण भी नहीं पहुंचा, जिनके लिए यह योजना बनाई गई थी।
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इस घोटाले की जांच के बाद एसीबी ने कार्रवाई तेज कर दी है और इसके सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में इस तरह की योजनाओं में पारदर्शिता और कड़ी निगरानी सुनिश्चित की जाएगी ताकि ऐसे घोटाले फिर से न हो सकें।
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मिड डे मील योजना में 2000 करोड़ रुपए का घोटाला घोटाले की कुल राशि 2 हजार करोड़ रुपए से अधिक मानी जा रही है। जांच अब तक 21 व्यक्तियों पर आरोप है। इनमें कॉनफैड और निजी फर्मों के अधिकारी भी शामिल हैं। मिड डे मील योजना में फर्जी तरीके से आपूर्ति की गई और फिर उनका भुगतान उठा लिया गया। मिड डे मील में घोटाले की एसीबी, एनसीबी, डीआरआई सहित कई एजेंसियां जांच कर रही है।
जिन्हें आरोपी बनाया गया
- सांवतराम (सहायक लेखाधिकारी, कॉनफैड)
- राजेन्द्र (प्रबंधक, नागरिक आपूर्ति, कॉनफैड)
- लोकेश कुमार बापना (प्रबंधक, नागरिक आपूर्ति, कॉनफैड)
- प्रतिभा सैनी (सहायक प्रबंधक, कॉनफैड)
- योगेन्द्र शर्मा (प्रबंधक, आयोजना, कॉनफैड)
- राजेन्द्र सिंह शेखावत (प्रबंधक, कॉनफैड)
- रामधन बैरवा (गोदाम कीपर, मार्केटिंग अनुभाग, कॉनफैड)
- दिनेश कुमार शर्मा (सुपरवाइजर, मार्केटिंग अनुभाग, कॉनफैड)
- कंवलजीत सिंह राणावत, मधुर यादव, त्रिभुवन यादव, सतीश मुलचंद व्यास, दीपक व्यास, रितेश यादव, शैलेश सक्सैना (रीजनल मैनेजर, केन्द्रीय भण्डार), बी.सी. जोशी (डिप्टी मैनेजर, केन्द्रीय भण्डार), चंदन सिंह (सहायक मैनेजर, केन्द्रीय भण्डार) सहित मैसर्स तिरूपति सप्लायर्स, मैसर्स जागृत एंटरप्राइजेज, मैसर्स एमटी एंटरप्राइजेज और मैसर्स साई ट्रेडिंग के प्रोपराइटर के विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, राजस्थान में प्रकरण दर्ज किया गया है।
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सरकारी कार्रवाई और भविष्य के कदम
मुख्य बिंदू:
- मिड डे मील घोटाले का मुख्य कारण अधिकारियों और फर्मों की आपसी मिलीभगत, फर्जी आपूर्तियों और अनियमितताओं के कारण सरकारी धन का दुरुपयोग था।
- इस घोटाले में कुल 21 लोग आरोपी हैं, जिनमें कॉनफैड के अधिकारी और कई निजी फर्मों के मालिक शामिल हैं।
- एसीबी ने इस घोटाले की गहन जांच शुरू कर दी है और आरोपियों के वित्तीय लेन-देन, कूटरचना और सरकारी धन के दुरुपयोग की जांच की जा रही है।
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