विजिलेंस की सख्ती, 56 पुलिस अफसरों की फील्ड पोस्टिंग खत्म
Jageshwar prasad | Jun 23, 2026, 11:36 IST
PHQ ने विभागीय जांच के घेरे में 56 अधिकारियों को फील्ड से हटाया
राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने विभागीय जांच झेल रहे 56 पुलिस अधिकारियों को फील्ड से हटाकर नॉन-फील्ड किया। इनमें 34 निरीक्षक और 22 उप निरीक्षक शामिल हैं। जयपुर में सबसे ज्यादा 12 अफसर हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- PHQ ने विभागीय जांच के घेरे में 56 अधिकारियों को फील्ड से हटाया।
- 34 निरीक्षक और 22 उप-निरीक्षकों पर चल रही है विभागीय जांच।
- जयपुर में सबसे ज्यादा 12 अधिकारी जांच के घेरे में।
- जांच पूरी होने तक अधिकारी नहीं संभाल पाएंगे थाना संचालन।
- सभी जिला एसपी से पालना रिपोर्ट मांगी गई है।
PHQ की विभागीय जांच प्रकोष्ठ ने सभी जिला पुलिस अधीक्षकों (SP) और पुलिस आयुक्तालयों को ऐसे अफसरों की सूची भेजी थी जिन पर विभागीय जांच चल रही है और उन्हें फील्ड पर तैनात रखा गया था।
इनमें 34 पुलिस निरीक्षक और 22 उप निरीक्षक शामिल हैं। जयपुर में सबसे ज्यादा 12 अफसर इस दायरे में हैं। ADG (Additional Director General) विजिलेंस एस. सेंगाथिर ने कहा कि जांच लंबित रहने तक इन्हें फील्ड पर नहीं रखा जा सकता।
जांच लंबित तो फील्ड नहीं
फील्ड का मतलब है - थाना प्रभारी का थाना संभालना, कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी और फील्ड निगरानी जैसे संवेदनशील पद। इन पदों पर दागी अफसरों की मौजूदगी से जांच की निष्पक्षता और पुलिस की छवि दोनों पर असर पड़ता है।
PHQ ने सभी जिला SP को तत्काल इन अफसरों को नॉन-फील्ड करने और वर्तमान पदस्थापन की जानकारी देने को कहा। ADG विजिलेंस एस. सेंगाथिर ने बताया कि अधिकतर को नॉन-फील्ड कर दिया गया है और पालना रिपोर्ट मांगी गई है।
जयपुर में सबसे ज्यादा
मेट्रो थाना प्रभारी भी जांच के घेरे में
एक मामले में तबादला हुआ, जांच नहीं रुकी
सीमा कुमारी का कहना है कि उनके खिलाफ कोई जांच नहीं चल रही। लेकिन PHQ की सूची में उनका नाम शामिल है। यह सूचना की विसंगति अपने आप में जांच का विषय बन गई है।
ADG विजिलेंस की साफ बात
FAQ
- विभागीय जांच में घिरे पुलिस अफसर को फील्ड में क्यों नहीं रखा जा सकता?
राजस्थान पुलिस के नियमों के अनुसार 16 CCA के तहत जिन अधिकारियों पर अनुशासनिक जांच लंबित हो, उन्हें कानून-व्यवस्था, थाना संचालन और फील्ड निगरानी जैसी संवेदनशील जिम्मेदारियों पर नहीं रखा जा सकता। इससे जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
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