RAS भर्ती में नया ट्रेंड, ​डॉक्टर-इंजीनियर आना चाहते हैं प्रशासनिक सेवाओं में

Ashish Bhardwaj | Jun 19, 2026, 12:33 IST
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आओ बनें आरएएस
Photograph: (the sootr)

इस बार आरएएस भर्ती परीक्षा में नया ट्रेंड दिख रहा है। राजस्थान की इस प्रतिष्ठित परीक्षा में शीर्ष तकनीकी और प्रोफेशनल संस्थानों से निकले युवा भी आकर्षित हो रहे हैं।

ऐसे समझें पूरा मामला

  • आरएएस भर्ती परीक्षा को लेकर राज्य के युवाओं में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है।
  • इसमें देश के शीर्ष तकनीकी और प्रोफेशनल संस्थानों से निकले युवा हो रहे आकर्षित।
  • यह परीक्षा कभी आर्ट्स और सामान्य स्नातक पृष्ठभूमि वाले युवाओं की पहली पसंद थी।
  • आरएएस भर्ती-2026 के लिए आए आवेदन कुछ इसी तरह के बदलाव की दे रहे गवाही।
  • आरएएस भर्ती-2026 के तहत कुल 607 पदों पर भर्ती प्रक्रिया आयोजित की जा रही है।
Ajmer: राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की आरएएस भर्ती परीक्षा को लेकर राज्य के युवाओं में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। कभी यह भर्ती परीक्षा कला (आर्ट्स) और सामान्य स्नातक पृष्ठभूमि वाले युवाओं की पहली पसंद मानी जाती थी, लेकिन अब इसमें देश के शीर्ष तकनीकी और प्रोफेशनल संस्थानों से निकले युवाओं भी तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।

स्थिति यह है कि अब राज्य के डॉक्टर (एमबीबीएस), इंजीनियर (बीटेक, एमटेक, आईआईटी और एनआईटी उत्तीर्ण), लॉ (विधि) स्नातक, पीएचडी धारक, नेट क्वालिफाइड और शिक्षक भी आरएएस और अधीनस्थ सेवाओं के अधिकारी बनने की दौड़ में शामिल हो रहे हैं।

इस बार 607 पदों के लिए भर्ती

इस बार आरएएस भर्ती 2026 के लिए आ रहे आवेदन कुछ इसी तरह के बदलाव की गवाही दे रहे हैं। आयोग द्वारा आरएएस भर्ती-2026 के तहत कुल 607 पदों पर भर्ती प्रक्रिया आयोजित की जा रही है।

इन कुल पदों में राज्य सेवा के 192 पद और अधीनस्थ सेवा के 415 पद शामिल हैं। प्रशासनिक हलकों और विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार परीक्षा के लिए आवेदनों की संख्या 5 से 7 लाख तक पहुंचने के पूरे आसार हैं।

आयोग ने इस दिशा में त्वरित कदम उठाते हुए आरएएस प्रारंभिक परीक्षा की तिथि भी घोषित कर दी है, जो आगामी 29 नवंबर को आयोजित की जानी तय हुई है।

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​क्यों बढ़ रहा है प्रशासनिक सेवाओं का चार्म?

​उच्च शिक्षित और पेशेवर युवाओं का इस सेवा की तरफ आकर्षित होने का मुख्य कारण केवल पद और प्रतिष्ठा ही नहीं, बल्कि उच्च वेतनमान और शानदार सुविधाएं भी हैं।

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के पूर्व अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. शिवदयाल सिंह का कहना है कि आरएएस अधिकारी बनने के बाद युवाओं को न केवल एक सुरक्षित करियर मिलता है, बल्कि पदोन्नति (प्रमोशन) के बाद वे सीधे आईएएस (IAS) अधिकारी के पद तक पहुंच सकते हैं।

इसके अलावा वित्तीय नीतियां और महत्वपूर्ण योजनाएं बनाने का सीधा अवसर, आकर्षक वेतनमान, सरकारी आवास और वाहन जैसी विशिष्ट सुविधाएं देता है। इसके कारण प्रशासनिक सेवा का क्रेज युवाओं के सिर चढ़कर बोल रहा है।

छोड़ दिए लाखों रुपये के बड़े पैकेज

​पिछले कुछ वर्षों (विशेषकर वर्ष 2021, 2023 और 2024) की भर्तियों के ट्रेंड्स पर नजर डालें तो यह बात साफ हो जाती है कि युवाओं में आरएएस बनने की ललक किस कदर हावी है।

इन वर्षों की भर्तियों में तकनीकी, मेडिकल, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, नेट-पीएचडी डिग्रीधारक और बीएड/एमएड अभ्यर्थियों की संख्या बहुत बड़ी थी। इनमें से लगभग 25 से 30 प्रतिशत अभ्यर्थी ऐसे थे, जिनका चयन पहले ही मल्टीनेशनल कंपनियों (MNCs) और अन्य कॉर्पोरेट संस्थानों में 35 से 45 लाख रुपए के वार्षिक आकर्षक पैकेज पर हो चुका था।

लेकिन निजी क्षेत्र के इन ऊंचे पैकेजों और कॉर्पोरेट लाइफ की चकाचौंध को छोड़कर इन युवाओं ने प्रशासनिक सेवा के जरिए देश और राज्य की सेवा करने के विकल्प को चुना। आंकड़ों के मुताबिक, उच्च प्रोफेशनल डिग्रीधारकों के आवेदन लगातार बढ़ते हुए अब कुल आवेदनों के 35 से 40 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं।

क्यों मिल रहा है फायदा?

​विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक सेवाओं में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों और उच्च शिक्षित युवाओं के आने से शासन और व्यवस्था को कई प्रकार के प्रत्यक्ष लाभ मिल रहे हैं।

चिकित्सा पृष्ठभूमि से आए अभ्यर्थियों के कारण राज्य की वित्तीय सेवाएं सुदृढ़ हो रही हैं। वे राज्य के हेल्थ और कम्यूनिकेशन सिस्टम को अधिक मजबूत और व्यावहारिक बनाने में सक्षम साबित हो रहे हैं।

आईआईटी, एनआईटी और बीटेक/एमटेक पृष्ठभूमि के अधिकारियों से सरकार के तकनीकी कम्यूनिकेशन सिस्टम, ई-गवर्नेंस और डिजिटल अवसंरचना को भारी सहायता मिल रही है। इसके साथ ही राज्य की साइबर सेल और साइबर क्राइम ब्रांच को आधुनिक चुनौतियों से निपटने में बड़ी मदद मिल रही है।

बी.टेक डिग्रीधारकों के आने से सिविल और अन्य तकनीकी व गैर-तकनीकी विभागों के कार्यों में पारदर्शिता, गति और गुणवत्तापूर्ण सुधार देखने को मिल रहा है।

कानून की पढ़ाई कर चुके अभ्यर्थियों के प्रशासनिक सेवा में आने से सरकार को विभिन्न जटिल कानूनी पहलुओं को समझने, नीति निर्माण करने और मुकदमों के त्वरित निस्तारण में सीधे तौर पर कानूनी मदद मिल रही है।

आगामी 29 नवंबर को होने वाली प्रारंभिक परीक्षा राज्य के प्रशासनिक इतिहास में एक नया अध्याय लिखने जा रही है, जहां देश के सबसे मेधावी दिमाग राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए एक-दूसरे को कड़ी टक्कर देंगे।

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