रोडवेज को लापरवाही पड़ी भारी, युवक को देना होगा 17.06 लाख का हर्जाना
Jageshwar prasad | Jun 04, 2026, 11:00 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के जयपुर के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने रोडवेज बस के टायर फटने से पैर कटने वाले यात्री सुरेश कुमार को 17.06 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया है। दुर्घटना के बाद पीड़ित का पैर संक्रमण फैलने के कारण काटना पड़ा था।
News In Short
- रोडवेज बस दुर्घटना में यात्री का पैर कटा था, कोर्ट ने 17.06 लाख का मुआवजा दिया।
- ट्रिब्यूनल ने रोडवेज की लापरवाही मानी, ड्राइवर ने स्वीकार किया कि टायरों का रखरखाव सही नहीं था।
- युवक का पैर काटने के बाद कोर्ट ने कहा- जीवनभर मानसिक और शारीरिक कष्ट झेलना पड़ेगा।
- दुर्घटना के बाद पीड़ित 17 दिन अस्पताल में रहा, संक्रमण फैलने के बाद पैर काटना पड़ा।
- रोडवेज को एक महीने में राशि जमा कराने के आदेश, 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
News In Detail
ट्रिब्यूनल ने मामले में रोडवेज की गंभीर लापरवाही मानी। जज श्वेता गुप्ता ने आदेश में कहा कि 30 साल के युवक का पैर कटने से उसे जीवनभर मानसिक और शारीरिक कष्ट झेलना पड़ेगा।
कैसे हुआ हादसा?
बस का टायर इतना पुराना और घिसा हुआ था कि उसकी रबड़ पूरी तरह उखड़ चुकी थी। टायर फटते ही उस पर लगने वाला दबाव इतना अधिक था कि बस की लोहे की फर्श की चद्दर भी फट गई। सुरेश कुमार उस सीट पर बैठे थे जो टायर के ठीक ऊपर थी, इसलिए लोहे के टुकड़े और चद्दर उनके पैरों में घुसकर गंभीर चोटें पहुंचा गईं।
ड्राइवर ने खोली रोडवेज की पोल
ड्राइवर ने स्वीकार किया कि बस के टायरों का रोडवेज विभाग द्वारा सही रख-रखाव नहीं करने के कारण टायर रास्ते में फटा। बस का फर्श टूटने से यात्री को चोट आई। ड्राइवर के इस बयान से रोडवेज की लापरवाही प्रमाणित हो गई।
17 दिन भर्ती रहा, संक्रमण के बाद काटा पैर
सवाई मानसिंह अस्पताल के मेडिकल बोर्ड ने उसे 60 प्रतिशत स्थायी निर्योग्यता का प्रमाण पत्र जारी किया है। इस हादसे ने सुरेश कुमार की जिंदगी पूरी तरह बदल दी। वह अब अपने परिवार का भरण-पोषण करने में असमर्थ है।
कोर्ट ने तय किया मुआवजा
ट्रिब्यूनल ने रोडवेज प्रशासन को एक महीने में राशि जमा कराने के आदेश दिए हैं। यह फैसला रोडवेज के लिए एक चेतावनी है कि वह अपने बेड़े के रखरखाव पर ध्यान दे, अन्यथा इस तरह के हादसों की पुनरावृत्ति होती रहेगी।
पीड़ित परिवार को राहत
यह फैसला अन्य यात्रियों के लिए भी एक संदेश है कि वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं। यदि किसी सरकारी परिवहन की लापरवाही से वे घायल होते हैं तो वे मुआवजे के हकदार हैं।
FAQ
- मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) क्या है?
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT - Motor Accident Claims Tribunal) एक विशेष अर्ध-न्यायिक निकाय (स्पेशल कोर्ट) है, जो सड़क दुर्घटना के पीड़ितों या उनके परिवारों को वाहन मालिक, चालक और बीमा कंपनी से मुआवजा दिलाने का काम करता है। इसे मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 165 के तहत गठित किया गया है, ताकि दीवानी अदालतों के चक्कर काटे बिना पीड़ितों को त्वरित और समय पर आर्थिक राहत मिल सके।
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