पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल को नहीं मिली जमानत, कोर्ट ने कहा-राजकोष को पहुंचाया नुकसान

Mukesh Sharma | Jun 08, 2026, 19:55 IST
Share
सुबोध अग्रवाल को राहत नहीं
Photograph: (the sootr)

जयपुर की ACB अदालत ने जल-जीवन मिशन घोटाले में पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि अग्रवाल ने पद का दुरुपयोग कर फर्जी प्रमाण पत्रों की अनदेखी की। इससे न सिर्फ राजकोष को भारी नुकसान हुआ, बल्कि निजी फर्मों को अनुचित लाभ मिला।

समझें क्या है पूरा मामला

  • पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल को जयपुर की एसीबी कोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार।
  • फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र की शिकायत के बाद भी आरोपी ने टेंडर प्रक्रिया को अनदेखा किया।
  • टेंडर शर्तों में बदलाव और पूलिंग के चलते सरकार को करीब 15 करोड़ रुपये की चपत लगी।
  • सुबोध ने खुद को निर्दोष बताया, कहा-मेरे कार्यकाल में केवल चार टेंडर मंजूर हुए।
राजस्थान में जल जीवन मिशन घोटाले के आरोप में गिरफ्तार पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल को कोर्ट से राहत नहीं मिल पाई है। एसीबी की जयपुर महानगर-द्वितीय कोर्ट ने अग्रवाल को जमानत देने से इनकार कर दिया है।

जज राजेश कुमार दहिया ने आदेश में कहा है कि आरोपी सुबोध अग्रवाल 18 अप्रैल, 2022 से 12 जनवरी, 2024 तक पीएचईडी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव थे। टेंडर की शर्त में बदलाव करके मौके का इंस्पेक्शन करने की शर्त जोड़ने से टेंडर देने वालों की पहचान उजागर हुई।

इससे टेंडर में पूलिंग करना संभव हुआ। अग्रवाल ने इसको अनदेखा किया। इससे राजकोष केा करीब 5 करोड़ रुपए का नुकसान व फर्मों को अनुचित फायदा देने का प्रयास हुआ।

मिलीभगत से हुआ घोटाला

मामला यह है कि इरकॉन कंपनी के मुख्य सतर्कता अधिकारी ने 7 जून, 2023 को ई-मेल से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र की शिकायत कर दी थी। इसके बावजूद गणपति ट्यूबवैल व श्याम ट्यूबवैल कंपनी के साथ आरोपियों ने मिलीभगत करके सरकार को करीब 15 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया।

आरोपियों ने दोनों फर्म के मालिक पदमचंद जैन और म​हेश मित्तल को गैर-कानूनी रुप से फायदा पहुंचाया है। विभागीय प्रमुख होने के नाते सुबोध अग्रवाल की ड्यूटी थी कि ​फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र की शिकायत मिलने के बाद दस्तावेजों की सही होने या नहीं होने की जांच करते। लेकिन, उन्होंने दूसरे आरोपियों के साथ मिलीभगत करके दोनों फर्म को अनुचित लाभ देने के आरोप जांच में प्रमाणित पाए हैं।

जल जीवन मिशन देश और राज्य की एक प्रमुख योजना है। इसका उद्देश्य हर घर नल से जल पहुंचाना है। प्रार्थी ने एक जिम्मेदार लोकसेवक के रूप में अपने पदीय कर्तव्यों का दुरुपयोग कर अपराध को अंजाम दिया है। इसलिए उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

सुबोध अग्रवाल ने यह कहा

पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल की ओर से अपने पक्ष में कोर्ट में यह दलील दी गई कि 2021 से 2023 तक गणपति ट्यूबवैल और श्याम ट्यूबवैल कंपनियों को कुल 104 टेंडर के काम दिए थे। यह काम न्यूनतम दरों के आधार पर दिए थे। नियमों के तहत 5 करोड़ रुपए तक के टेंडर की मंजूरी व भुगतान चीफ इंजिनियर के स्तर पर ही होती है।

इनमें से 37 टेंडर 5 करोड़ रुपए से ज्यादा की थीं। इनमें से भी 33 टेंडर पूर्व के ACS PHED ने मंजूर किए थे। उसके कार्यकाल में वित्त समिति ने मात्र चार टेंडर की मंजूरी दी थी। यह मंजूरी पहले से दी गई 33 टेंडरों के क्रम में ही थी।

इन चारों वर्क आर्डर का एक रुपए का भी भुगतान नहीं किया गया है। मामला एक वकील की शिकायत के आधार पर है। इसमें दोनों फर्मों की ओर से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र पेश करना बताया था। इसकी जानकारी मिलते ही चारों वर्क आर्डर रद्ध कर दिए थे। मामले में तीन FIR दर्ज हुई थीं। तीनों में ही उसका नाम नहीं था।

इरकॉन कंपनी का फर्जी प्रमाण पत्र पेश करने की FIR स्वंय PHED ने दर्ज करवाई थी। दोनों ही कंपनियों को ब्लैक लिस्ट किया व भुगतान रोक दिया था।

इस मामले में चुनिंदा आधार पर गिरफ्तारियां हो रही हैं। FIR दर्ज करने से पहले 17-A के तहत मंजूरी नहीं ली गई। PC Act के Section-19 के तहत अभी तक पूरी अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली है।

अग्रवाल का कहना था कि चालान बहुत बड़ा है। इस मामले में 100 तो गवाह ही हैं। ऐसे में मामले की ट्रायल पूरी होने में लंबा समय लगेगा। इसलिए जमानत दी जाए।

जानबूझकर अनदेखी की, नहीं मिले जमानत

एसीबी की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक मंजूला जैन ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने फर्जी प्रमाण पत्र की जानकारी मिलने के बाद भी टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। अग्रवाल को 16 फरवरी,2023 को फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर टेंडर लेने की जानकारी मिल गई थी। लेकिन उसने कुछ नहीं किया और इस दौरान पुराने टेंडरों के भुगतान होते रहे।

आरोपी सुबोध अग्रवाल विभाग का सबसे बड़ा अधिकारी था। उसने जानबूझकर बेईमानी केा अनदेखा किया और खुद को बचाने के लिए कागजी खानापूर्ति की गई। आरोपी के अधीनस्थों ने प्रमाण पत्र का झूठा सत्यापन किया व टेंडर प्रक्रिया को जारी रखा था। इसलिए जमानत नहीं दी जाए।

गौरतलब है कि एसीबी ने सुबोध अग्रवाल को 9 अप्रेल,2026 को गिरफ्तार किया था। वह 15 अप्रेल से न्यायिक हिरासत में जेल में है।

ये खबर भी पढे़:-

Ind vs Afg Test Match: क्रिकेटर मानव सुथार सोशल मीडिया पर क्यों कर रहे ट्रेंड

राज्यसभा चुनाव में टली क्रॉस वोटिंग, तीनों चेहरों का निर्विरोध जीतना तय

अरावली में मिला प्राचीन काल का खजाना, चट्टानों पर हो रही खूबसूरत नक्काशी

नकली बीज में बड़ी रिश्वतखोरी, डायरेक्टर समेत 6 आरोपी का मिला 5 दिन का रिमांड



Tags:
  • राजस्थान
  • जल जीवन मिशन घोटाले
  • एसीबी
  • FIR
  • पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

By Neel Tiwari

20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

By Jitendra Shrivastava

भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच