बैंक एफडी घोटाला मामले में दोषी कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की क्या जाएगी विधायकी?
Amresh Kushwaha | Apr 02, 2026, 10:05 IST
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दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली MP-MLA कोर्ट ने एफडी घोटाले में दोषी ठहराया गया है। वहीं, अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या अब उनकी विधायकी भी जाएगी।
News In Short
- दतिया के कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती एफडी घोटाले में दोषी करार दिए गए हैं।
- दिल्ली की MP-MLA कोर्ट ने 01 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाया है।
- कोर्ट ने भारती को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेजने का आदेश दिया है।
- 1998 में हुई 10 लाख रुपए की एफडी (Fixed Deposit) में फर्जीवाड़े का आरोप है।
- वहीं, अब सवाल उठ रहा है कि उनकी विधायकी बचेगी या नहीं।
News In Detail
बुधवार को आए इस फैसले के बाद भारती को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है। अब सबकी नजरें गुरुवार को होने वाले सजा के ऐलान पर टिकी हैं, जो भारती का राजनीतिक भविष्य तय करेगा।
क्या राजेंद्र भारती की जाएगी विधायकी?
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता जाएगी? इसका जवाब सजा की मियाद पर टिका है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act), 1951 की धारा 8 के मुताबिक यदि किसी जनप्रतिनिधि को किसी अपराध में 2 साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी विधानसभा सदस्यता अपने आप खत्म हो जाती है।
अदालत के वकील शिवराज सिंह जाट और अनिल शुक्ला के मुताबिक भारती को जिन धाराओं में दोषी माना गया है, उनमें से धारा 467 में अधिकतम उम्रकैद का प्रावधान है। यानी सजा का दायरा बहुत बड़ा है।
नरोत्तम मिश्रा को हराने वाले MLA जेल में
भारती को 88 हजार 977 वोट मिले थे। मिश्रा, जिन्होंने पहले लगातार तीन बार भारती को हराया था, इस बार खुद हार गए। लेकिन अब उसी भारती पर जेल जाने की नौबत आ गई है।
एक अप्रैल 2026 को दिल्ली की MP-MLA (Member of Parliament / Member of Legislative Assembly) कोर्ट ने राजेंद्र भारती को 11 साल पुराने एफडी घोटाले में दोषी करार दे दिया। कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेजने का आदेश दिया है। अब आज यानी 02 अप्रैल को सजा का ऐलान होना है।
25 साल पुरानी एफडी, 11 साल पुरानी शिकायत
समस्या यह थी कि उसी दौरान, यानी 1998 से 2001 के बीच, राजेंद्र भारती खुद उसी बैंक के संचालक मंडल के अध्यक्ष थे। और जिस संस्था के नाम पर एफडी थी, उसके ट्रस्टी बोर्ड के सदस्य भी वही थे। यानी बैंक और संस्था, दोनों तरफ उनका हित जुड़ा था।
कैसे हुआ बैंक एफडी घोटाला?
इस हेराफेरी की वजह से 1999 से लेकर 2011 तक हर साल करीब 1 लाख 35 हजार रुपए का ब्याज निकाला जाता रहा। यह सिलसिला 12 साल से ज्यादा चला और बैंक को लगातार नुकसान होता रहा।
ऑडिट में पकड़ा गया, फिर शुरू हुई कानूनी लड़ाई
पहले सुनवाई भोपाल और ग्वालियर की MP-MLA कोर्ट में हुई थी। अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामला दिल्ली की रोज एवेन्यू MP-MLA कोर्ट में ट्रांसफर किया गया था। भारती पक्ष ने इस मामले को कानूनी चुनौती भी दी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक अपील नंबर 2764/2024 में अभियोजन की कार्रवाई को बरकरार रखा था।
हाई कोर्ट जाएंगे भारती?
गुरुवार 02 अप्रैल को कोर्ट दोनों पक्षों की सजा पर दलीलें सुनेगी। अभियोजन पक्ष सख्त सजा की मांग कर सकता है, जबकि बचाव पक्ष नरमी की अपील कर सकता है। जो भी फैसला आएगा, वह दतिया की राजनीति की दिशा तय करेगा।
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