NGOs की विदेशी फंडिंग पर सरकार सख्त, गड़बड़ी करने वालों के हाथ से जाएगी संपत्ति!
Manya Jain | Mar 25, 2026, 14:45 IST
FCRA amendment bill 2026
सरकार FCRA कानून में बदलाव कर NGO पर सख्ती बढ़ा सकती है। अब विदेशी चंदा उसी काम में खर्च करना होगा जिसके लिए मिला है। नियम तोड़ने पर सरकार NGO की संपत्ति जब्त कर उसे बेच भी सकेगी।
देश दुनिया न्यूज.सरकार अब विदेशी चंदा लेने वाले एनजीओ पर सख्ती करने जा रही है। इसके लिए एफसीआरए कानून (constitutional amendment) में बड़े बदलाव की पूरी तैयारी है। विदेशी फंडिंग (funding) में पारदर्शिता लाने के लिए नया विधेयक लाया जा सकता है।
सरकार चाहती है कि हर एनजीओ अपनी जवाबदेही सही से तय करे। अब विदेशी पैसा जिस काम के लिए मिलेगा, वहीं खर्च करना होगा। पैसों का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। अगर कोई एनजीओ नियमों में गड़बड़ी करेगा, तो सरकार कार्रवाई करेगी। नियम तोड़ने पर सरकार एनजीओ की संपत्ति भी बेच सकती है।
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क्या होते हैं
एनजीओ (NGO) यानी 'गैर-सरकारी संगठन' एक ऐसी संस्था होती है, जो सरकार से स्वतंत्र रहकर समाज सेवा के लिए काम करती है। ये संगठन लाभ कमाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण या गरीबों की मदद जैसे नेक कामों के लिए बनाए जाते हैं। इनका संचालन दान, सरकारी सहायता या विदेशी फंडिंग के जरिए होता है। एनजीओ समाज के उन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जहाँ सरकारी पहुँच कम होती है या जहाँ विशेष सुधार की ज़रूरत होती है।
क्या है
नए नियमों के तहत अब सरकार के पास एनजीओ की संपत्ति पर पूरा नियंत्रण होगा। विदेशी चंदे से बनी किसी भी संपत्ति को सरकार अपने कब्जे में ले सकती है। पॉइंट्स में समझें...
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विधेयक के अनुसार, अब पंजीकरण का नवीनीकरण (Renewal of Registration) न होने पर एनजीओ का अस्तित्व स्वतः ही समाप्त माना जाएगा।
सरकार ने जहां एक तरफ नियंत्रण सख्त किया है, वहीं दूसरी तरफ कुछ कानूनी प्रक्रियाओं में बदलाव भी किए हैं।
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सरकार चाहती है कि हर एनजीओ अपनी जवाबदेही सही से तय करे। अब विदेशी पैसा जिस काम के लिए मिलेगा, वहीं खर्च करना होगा। पैसों का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। अगर कोई एनजीओ नियमों में गड़बड़ी करेगा, तो सरकार कार्रवाई करेगी। नियम तोड़ने पर सरकार एनजीओ की संपत्ति भी बेच सकती है।
ngo in india
क्या होते हैं NGO ?
क्या है FCRA Amendment 2026?
- तय काम के लिए ही खर्च: अब एनजीओ को जिस काम के लिए विदेशी चंदा मिला है, पैसा उसी पर खर्च करना होगा। अगर पैसा इलाज के लिए आया है, तो उसे पढ़ाई या किसी और काम में नहीं लगा सकते। इसके लिए सरकार एक समय सीमा भी तय करेगी।
fcra amendment bill
- संपत्ति जब्त करने का हक: यह इस कानून का सबसे सख्त हिस्सा है। अगर किसी एनजीओ का लाइसेंस रद्द या सस्पेंड होता है, तो सरकार उसकी संपत्ति अपने कब्जे में ले लेगी। सरकार के पास उस एनजीओ की प्रॉपर्टी को बेचने का भी पूरा अधिकार होगा।
- सरकारी खजाने में जमा होगी रकम: संपत्तियों की देखरेख के लिए एक खास सरकारी अथॉरिटी बनाई जाएगी। एनजीओ की संपत्ति बेचकर जो पैसा मिलेगा, उसे सीधे भारत सरकार के मुख्य खजाने (भारत संचित कोष) में जमा कर दिया जाएगा।
पंजीकरण और रिन्यूअल के नए नियम
- एक जिम्मेदार अधिकारी की नियुक्ति: अब हर एनजीओ को एक 'खास अधिकारी' (Designated Authority) रखना होगा। इस अधिकारी का काम यह देखना होगा कि विदेशी पैसा सही काम में लग रहा है या नहीं। वह अधिकारी सीधे सरकार को अपनी रिपोर्ट देगा और अपनी हर बात के लिए जवाबदेह होगा।
- बड़े पदों पर बैठे लोगों की जिम्मेदारी: अब एनजीओ के डायरेक्टर, ट्रस्टी और बड़े सदस्यों की जिम्मेदारी और बढ़ जाएगी। अगर संस्था के पैसों में कोई भी गड़बड़ी पाई जाती है, तो ये लोग व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। इसका मतलब है कि अब वे संस्था की गलती बताकर खुद बच नहीं पाएंगे।
- अंदरूनी निगरानी पर जोर: सरकार का मानना है कि इन कड़े नियमों से एनजीओ के अंदर होने वाले कामों में पारदर्शिता आएगी। अब हर बड़े फैसले और खर्चे पर पैनी नजर रखी जाएगी ताकि चंदे का गलत इस्तेमाल न हो सके।
जांच और सजा के प्रावधानों में बदलाव
- जांच के लिए अनुमति: अब किसी भी एनजीओ के खिलाफ आपराधिक जांच शुरू करने से पहले केंद्र सरकार से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। बिना दिल्ली की इजाजत के जांच एजेंसियां या राज्य सरकारें कोई बड़ी कार्रवाई नहीं कर सकेंगी।
- सजा में बदलाव: नियम तोड़ने या गलत तरीके से विदेशी चंदा लेने पर अब जेल की सजा को 5 साल से घटाकर 4 साल करने का प्रस्ताव है। यह बदलाव कानूनी प्रक्रियाओं को थोड़ा सरल बनाने के लिए किया जा सकता है।
- जुर्माना रहेगा सख्त: भले ही जेल की सजा कम करने की बात हो रही है, लेकिन भारी जुर्माना भरने का नियम अभी भी वैसा ही सख्त बना रहेगा। आर्थिक दंड के जरिए एनजीओ की जवाबदेही तय की जाएगी।
एमपी में कितने हैं NGO?
- एनजीओ दर्पण (NGO Darpan):भारत सरकार के नीति आयोग के आधिकारिक पोर्टल 'एनजीओ दर्पण' के अनुसार, मध्य प्रदेश में पंजीकृत एनजीओ की संख्या लगभग12 हजार से 15 हजारके बीच है। पूरे भारत में उत्तर प्रदेश के बाद सबसे अधिक एनजीओ वाले राज्यों में मध्य प्रदेश का भी महत्वपूर्ण स्थान है।
MP REGISTERED NGO
- फर्म्स एंड सोसाइटीज रजिस्ट्री (Firms & Societies):राज्य स्तर पर, अधिकांश एनजीओ मध्य प्रदेश केFirms and Societies विभागके तहत पंजीकृत होते हैं। यहाँ पंजीकृत संस्थाओं की कुल संख्या लाखों में हो सकती है, जिनमें से कई सक्रिय सामाजिक संगठन (NGO) के रूप में कार्य करते हैं।
- स्वतंत्र डेटाबेस:कुछ निजी और चैरिटी पोर्टल्स (जैसे SearchDonation) मध्य प्रदेश में लगभग3 हजार 100 से अधिकसक्रिय और प्रमुख एनजीओ को सूचीबद्ध करते हैं, जो सीधे तौर पर दान और सामाजिक कार्यों से जुड़े हैं।
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