हरदा के IITian श्रेयांश बड़ोदिया ने 2.3 करोड़ का पैकेज छोड़ा, UPSC में पाई 194वीं रैंक
Amresh Kushwaha | Mar 15, 2026, 13:41 IST
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हरदा के श्रेयांश बड़ोदिया ने IIT मुंबई से पढ़ाई के बाद 2.3 करोड़ की IT नौकरी छोड़ दी। UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में पहले ही प्रयास में 194वीं रैंक हासिल की। अब वे शिक्षा और स्वास्थ्य में बदलाव लाना चाहते हैं।
News In Short
- हरदा के रहने वाले श्रेयांश बड़ोदिया ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 194वीं रैंक हासिल की है।
- उन्होंने IIT मुंबई से 2018 में बीटेक किया और गुरुग्राम में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम किया।
- 2.3 करोड़ रुपए सालाना पैकेज की नौकरी छोड़कर उन्होंने अगस्त 2024 में UPSC की तैयारी शुरू की।
- मई 2025 में प्रीलिम्स, अगस्त 2025 में मेंस और जनवरी 2026 में इंटरव्यू पास करके वे IAS बने।
- भविष्य में वे शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में जमीनी काम करना चाहते हैं।
News In Detail
2.3 करोड़ की नौकरी, फिर भी मन नहीं भरा
IIT मुंबई से पढ़ाई, फिर IT की राह
दोस्तों ने जगाया कुछ नया सोचने का जज्बा
दो रास्तों के बीच उलझा मन
अगस्त 2024 में छोड़ी नौकरी
नौ महीने में पास की देश की सबसे कठिन परीक्षा
अब शिक्षा और सेहत के लिए काम करना है
परिवार का भरपूर साथ रहा
जब पीछे मुड़कर देखें, तो गर्व हो
FAQ
- श्रेयांश बड़ोदिया ने
UPSC 2025 में कौन सी रैंक हासिल की?
श्रेयांश बड़ोदिया ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 194वीं रैंक हासिल की। यह उनका पहला प्रयास था। उन्होंने मई 2025 में प्रीलिम्स, अगस्त 2025 में मेंस और जनवरी 2026 में इंटरव्यू पास किया। नौकरी छोड़ने से लेकर अंतिम नतीजे तक का सफर करीब 9 महीने का रहा। - श्रेयांश बड़ोदिया ने कितने पैकेज की नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी की?
श्रेयांश ने 2.3 करोड़ रुपए सालाना पैकेज वाली IT नौकरी छोड़ी। वे गुरुग्राम की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। IIT मुंबई से 2018 में बीटेक करने के बाद उन्होंने यह नौकरी शुरू की थी और करीब छह साल तक काम किया। अगस्त 2024 में इस्तीफा देकर उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की। - IAS बनकर श्रेयांश बड़ोदिया क्या काम करना चाहते हैं?
श्रेयांश बड़ोदिया शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं। वे सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करना और प्राथमिक शिक्षा को मजबूत बनाना चाहते हैं। इसके साथ ही वे चाहते हैं कि बीमारी के समय लोगों को अपनी जेब से कम खर्च करना पड़े। उनका मानना है कि यही वो काम है जिससे समाज में असली बदलाव आएगा।
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