ओरछा के रामराजा लोक में घोटाला, पत्थर के नाम पर पहाड़ जैसा करोड़ों का भ्रष्टाचार; सरकार ने कहा—घोटाले के आरोप गलत

Amresh Kushwaha | Mar 15, 2026, 12:37 IST
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orchha ram raja lok sandstone scam mpt corruption
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ओरछा के रामराजा लोक निर्माण में करोड़ों के पत्थर घोटाले का खुलासा हुआ है। यहां 52 रुपए का पत्थर 335 रुपए में खरीदा जा रहा है। हालांकि पर्यटन विभाग ने इस मामले में अपनी सफाई देते हुए पूरी स्थिति स्पष्ट की है।

बुंदेलखंड की अयोध्या कहे जाने वाले ओरछा में भगवान राम के भव्य रामराजा लोक का निर्माण कार्य चल रहा है। आस्था के इस केंद्र को भव्यता देने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इस भव्यता की आड़ में भ्रष्टाचार का दीमक भी देखने को मिल रहा है। इसकी परतें अब खुलने लगी हैं।

एक मीडिया रिपोर्ट में सामने आया है कि जिस सैंड स्टोन की बाजार में कीमत महज 52 रुपए है, उसे सरकारी कागजों में 335 रुपए की दर से खरीदा जा रहा है। यानी सीधे-सीधे पांच गुना से भी ज्यादा की हेराफेरी। इधर, मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने आराेपाें काे गलत बताया और कहा है कि कई तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया है।

आस्था के नाम पर लूट

मीडिया रिपोर्ट में आराेप लगाए गए कि मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ओरछा में 32 एकड़ क्षेत्र में लगभग 332 करोड़ रुपए की लागत से रामराजा लोक बनवा रहा है। इसमें अकेले पत्थर (Sand Stone) का बजट 35 करोड़ रुपए रखा गया है। पिछले ढाई साल से चल रहे पहले चरण के काम में अब तक 10 करोड़ रुपए का पत्थर लगाया जा चुका है।

चौंकाने वाली बात यह है कि बाजार भाव के हिसाब से इस काम में केवल 2 करोड़ रुपए खर्च होने चाहिए थे। वहीं, अफसरों की जुगलबंदी ने जनता की गाढ़ी कमाई के 8 करोड़ रुपए शुरुआती दौर में ही डकार लिए हैं।

अफसरों की जादुई रेट लिस्ट से हुआ खेल

किसी भी सरकारी निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) की शेड्यूल ऑफ रेट (Schedule of Rate - SOR) पत्थर की लकीर की तरह होती है। इसके बावजूद, पर्यटन विभाग के इंजीनियरों ने एक नया खेल रचा।

उन्होंने दावा किया कि रामराजा लोक में लगने वाले नक्काशीदार पत्थर PWD की लिस्ट में हैं ही नहीं। इसके बाद एक कमेटी बनाकर खुद का नया SOR तैयार कर लिया गया। PWD की डायरी में जो पत्थर फिटिंग सहित 62.5 रुपए प्रति वर्गफीट में उपलब्ध है, उसे इन अफसरों ने 335 रुपए तय कर दिया।

मामूली फेरबदल से हुआ करोड़ों का खेल

भ्रष्टाचार को तकनीकी जामा पहनाने के लिए अफसरों ने बारीकी से खेल किया। पत्थर के नीचे लगने वाले बेस की मोटाई को 20mm से बढ़ाकर 25mm कर दिया। साथ ही, सीमेंट के मिश्रण को 1:5 से बदलकर 1:4 कर दिया।

सीनियर स्ट्रक्चर इंजीनियर सुयश कुलश्रेष्ठ का कहना है कि सरकारी काम हमेशा पीडब्ल्यूडी के एसओआर (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग रेट) के हिसाब से होते हैं, जिसमें सभी आइटम के रेट पहले से तय होते हैं। इसके बावजूद एमपीटी के अफसरों ने जो नया एसओआर तैयार किया है, वो सही नहीं है। इसमें किए गए बदलावों से रेट में सिर्फ 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होनी चाहिए थी, लेकिन एमपीटी ने 62.5 रुपए की दर को बढ़ाकर 335 रुपए कर दिया है। इस बदलाव में कुछ गड़बड़ी नजर आती है।

अवैध खदानों से सप्लाई हो रहा पत्थर

मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि गंजबासौदा (Ganj Basoda) की खदानों में अवैध तरीके से सप्लाई किया जा रहा है। यहां के सबसे बड़े सप्लायर ने खुद कुबूल किया कि रामराजा लोक में उन्हीं का पत्थर जा रहा है। सबसे डरावना सच यह है कि यह पत्थर वन भूमि (Forest Land) से अवैध रूप से निकाला जा रहा है।

परिवहन के लिए कच्ची बिल्टी (Fake Invoices) का इस्तेमाल हो रहा है। इसे गंतव्य पर पहुंचते ही फाड़ दिया जाता है ताकि टैक्स चोरी और अवैध उत्खनन का कोई सबूत न रहे।

पर्यटन विभाग की सफाई- पारदर्शी तरीके से हुआ टेंडर

तीन तरह के सैंड स्टोन का इस्तेमाल

पर्यटन विभाग ने इस मामले में अपनी सफाई देते हुए पूरी स्थिति स्पष्ट की है। पर्यटन विकास निगम के अनुसार, प्रोजेक्ट में फ्लोरिंग के लिए तीन प्रकार के सैंड स्टोन का उपयोग किया जा रहा है। इनमें ग्वालियर मिंट स्टोन, सागर (बांदा) का स्टोन और एक अन्य क्वालिटी का सैंड स्टोन शामिल है। इन पत्थरों की खरीद खदान से सीधे नहीं की जाती, बल्कि डिजाइन और निर्माण के अनुसार इन्हें तैयार कर उपयोग किया जाता है।

खदान का बेसिक रेट 52 से 60 रुपए

विभाग का कहना है कि खदान में पत्थर का बेसिक रेट लगभग 52 से 60 रुपए प्रति घनफुट होता है। लेकिन किसी निर्माण कार्य में पत्थर की कीमत केवल खदान के रेट से तय नहीं होती। जब पत्थर किसी प्रोजेक्ट में लगाया जाता है तो उसमें कई अतिरिक्त काम शामिल होते हैं। विभाग ने बताया कि फ्लोरिंग के लिए पत्थर लगाने में कई तरह के खर्च जुड़ते हैं, जैसे- पत्थर की ढुलाई (ट्रांसपोर्टेशन), लोडिंग और अनलोडिंग, मशीन से कटिंग और शेप देना, एपॉक्सी फिलिंग, डिजाइन के अनुसार फिटिंग, पॉलिशिंग और फिनिशिंग, मशीन ऑपरेटर और मजदूरी का खर्च। इन सभी प्रक्रियाओं के बाद पत्थर की कुल लागत बढ़ जाती है। इसलिए केवल खदान के रेट से तुलना करना सही नहीं है।

विभाग ने यह भी बताया कि पूरा काम पारदर्शिता के साथ एमपी ई-टेंडर प्रणाली के माध्यम से किया गया है। टेंडर में लगभग 12.89 प्रतिशत कम दर (Below Rate) पर काम मंजूर हुआ। इससे यह भी संकेत मिलता है कि काम प्रतिस्पर्धी और नियमों के अनुसार दिया गया।

अवैध खदान के आरोप भी गलत

रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि पत्थर अवैध खदानों से लाया गया है। इस पर विभाग का कहना है कि सभी सामग्री वैध स्रोतों से ली जा रही है और निर्माण कार्य तय नियमों के अनुसार हो रहा है। पर्यटन विभाग का कहना है कि बड़े निर्माण कार्यों में सामग्री की लागत कई तकनीकी प्रक्रियाओं से जुड़ी होती है। इसलिए केवल कच्चे माल की कीमत के आधार पर पूरे प्रोजेक्ट को घोटाला बताना उचित नहीं है।

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