आईएएस फ्रैंक नोबल ए: 10 घंटे की नौकरी के साथ की UPSC की तैयारी कर ऐसे बने आईएएस

Abhilasha Saksena Chakraborty | Feb 06, 2026, 12:01 IST
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IAS FRANK NOBLE A
IAS FRANK NOBLE A

फ्रैंक नोबल ए ने नौकरी के साथ UPSC की तैयारी कर यह साबित किया कि सही रणनीति और दृढ़ संकल्प से सिविल सेवा में सफलता संभव है। उनकी यात्रा लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।

अधिकतर लोगों की धारणा होती है कि यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा के लिए फुल टाइम तैयारी की जरूरत होती है। लेकिन, फ्रैंक नोबल ए ने इस सोच को गलत साबित कर दिया। उन्होंने नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ इस परीक्षा में सफलता हासिल की। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सही रणनीति और प्रभावी समय प्रबंधन से नौकरी करते हुए भी सिविल सेवा का सपना पूरा किया जा सकता है। फ्रैंक नोबल ए उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो आर्थिक जिम्मेदारियों के कारण यूपीएससी की तैयारी छोड़ने का मन बना लेते हैं।

पारिवारिक पृष्ठभूमि

आईएएस फ्रैंक नोबल ए का जन्म 18 जून 1985 को तमिलनाडु के तूतीकोरिन में हुआ था। उनके पिता सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग में अतिरिक्त आयुक्त के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनकी माता पेशे से शिक्षिका थीं। उनके भाई अमेरिका में सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल के रूप में कार्यरत हैं। परिवार का सहयोग उनके जीवन और करियर का मजबूत आधार रहा है।

फ्रैंक की प्रारंभिक स्कूली शिक्षा तमिलनाडु राज्य बोर्ड से तूतीकोरिन में ही हुई। इसके बाद उन्होंने सेंट जोसेफ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से बीई की डिग्री प्राप्त की।

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नौकरी के साथ UPSC की तैयारी

इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद फ्रैंक नोबल ए ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में आईटी एनालिस्ट के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। आईटी सेक्टर में कार्य करते हुए उन्हें यूनाइटेड किंगडम में ऑनसाइट काम करने का अवसर मिला। वहीं उन्हें यह एहसास हुआ कि केवल आर्थिक सफलता ही जीवन की पूर्णता नहीं है।

इसी दौरान उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी करने का निर्णय लिया। उन्होंने नौकरी छोड़ने के बजाय नौकरी के साथ ही यूपीएससी की तैयारी शुरू की। फ्रैंक बताते हैं कि साल 2011 में स्टीव जॉब्स के निधन के बाद स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में दिया गया उनका भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उस भाषण के शब्दों ने उनके सोचने के तरीके और काम करने की गति को गहराई से प्रभावित किया।

उस भाषण का सार यही था कि जीवन सीमित है। इसे दूसरों की अपेक्षाओं और तयशुदा ढांचों के अनुसार जीने में बर्बाद नहीं करना चाहिए। समाज की आवाज इतनी तेज़ न होने दें कि वह आपकी अंतरात्मा की आवाज को दबा दे। यहीं से फ्रैंक ने अपने मन की पुकार सुननी शुरू की।

IAS Frank Nobel A
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कोचिंग से सिर्फ दिशा मिलती है

आईएएस फ्रैंक नोबल एने प्रारंभिक परीक्षा के लिए कोचिंग नहीं ली। हालांकि, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू की तैयारी के लिए उन्होंने कोचिंग का सहारा लिया। प्रीलिम्स के लिए उन्होंने टेस्ट सीरीज भी ज्वाइन की थी। उनका मानना है कि कोचिंग आपको दिशा दे सकती है, लेकिन अंतिम परिणाम आपकी अपनी मेहनत पर ही निर्भर करता है।

दूसरे प्रयास में मिली सफलता

IAS Frank Nobel A ने साल 2012 में अपने दूसरे प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 157 हासिल कर आईएएस बनने का सपना पूरा किया। यूपीएससी से पहले उन्होंने आरबीआई असिस्टेंट परीक्षा और बैंक ऑफ बड़ौदा में चयन प्राप्त किया था। इसके अलावा, उन्होंने केंद्रीय सशस्त्र रिज़र्व पुलिस बल की लिखित और मुख्य परीक्षा भी पहले प्रयास में उत्तीर्ण की थी।

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अध्ययन रणनीति

फ्रैंक नोबल ए का मानना है कि सफलता के लिए पढ़ाई के घंटों से अधिक महत्वपूर्ण पढ़ाई की गुणवत्ता होती है। जब भी उन्हें समय मिलता, वे पढ़ाई करते थे। यह समय औसतन 10 से 12 घंटे प्रतिदिन के बराबर हो जाता था।

उनके अनुसार अखबारों के संपादकीय नियमित रूप से पढ़ना और स्वयं निष्कर्ष निकालना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने समसामयिक विषयों को अपने वैकल्पिक विषयों की अवधारणाओं से जोड़कर पढ़ा। इससे उत्तर लेखन में स्पष्टता आई।

वे मानते हैं कि प्रश्नों की अनिश्चितता से घबराने के बजाय अप्रत्याशित परिस्थितियों के लिए खुद को तैयार रखना चाहिए। सही विकल्प खोजने से अधिक, गलत विकल्पों को हटाने की कला विकसित करना जरूरी है।

फोटोग्राफी का शौक

फ्रैंक नोबल ए को फोटोग्राफी का विशेष शौक है। वे बताते हैं कि यूपीएससी इंटरव्यू में उनसे फोटोग्राफी से जुड़े सवाल भी पूछे गए थे। इसके अलावा उन्हें मूक अभिनय और टेबल टेनिस खेलने में भी रुचि है।

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दूसरों से तुलना न करें

फ्रैंक नोबल ए का स्पष्ट कहना है कि अपनी तुलना दूसरों से नहीं करनी चाहिए। हर उम्मीदवार की पढ़ाई की रणनीति अलग होती है। निरंतर मेहनत करें। सकारात्मक रहें। असफलताओं से सीखते रहें। सफलता तुरंत नहीं मिलती, लेकिन धैर्य और आत्मविश्वास के साथ किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।

गलतियों को सुधारें

उनके अनुसार यह परीक्षा सबसे पहले आपकी गलतियों को पहचानने की मांग करती है। पहले यह समझें कि कहां चूक हो रही है। उन गलतियों पर काम करें। उन्हें सुधारें। फिर दोबारा प्रयास करें। परिणाम को लेकर अत्यधिक तनाव लेने से बचें और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते रहें।

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करियर एक नजर

  • नाम: फ्रैंक नोबल ए
  • जन्म: 18/06/1985
  • जन्मस्थान: तूतीकोरिन
  • शिक्षा: बीई
  • बैच: 2013
  • कैडर: मध्य प्रदेश

पदस्थापना

IAS Frank Nobel A वर्तमान में मध्य प्रदेश खनिज निगम के प्रबंध निदेशक एवं निदेशक (प्रशासन एवं खनन) के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे भोपाल नगर निगम के आयुक्त और मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कंपनी के अतिरिक्त प्रबंध निदेशक के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। पहले वो गुना कलेक्टर के पद पर भी कार्य कर चुके हैं।

देखें फ्रैंक नोबल ए का सर्विस रिकॉर्ड

Service record of Frank A Nobel
Service record of Frank A Nobel


FAQ

  1. फ्रैंक नोबल ए को UPSC में किस प्रयास में सफलता मिली?
    उन्हें UPSC सिविल सेवा परीक्षा में दूसरे प्रयास में सफलता मिली और उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 157 हासिल की।
  2. फ्रैंक नोबल ए की तैयारी की मुख्य रणनीति क्या रही?
    वे पढ़ाई के घंटों से अधिक पढ़ाई की गुणवत्ता पर भरोसा करते थे, नियमित रूप से अख़बारों के संपादकीय पढ़ते थे और समसामयिक विषयों को वैकल्पिक विषयों से जोड़कर तैयारी करते थे
  3. फ्रैंक नोबल ए वर्तमान में किस पद पर कार्यरत हैं?
    वे वर्तमान में मध्य प्रदेश खनिज निगम (MP Mining Corporation) के प्रबंध निदेशक एवं निदेशक (प्रशासन एवं खनन) हैं और भोपाल स्मार्ट सिटी के सीईओ का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं।
(प्रोफाइल 190- 2 मार्च 2026 तक अपडेट)

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