RTI में सच्चाई उजागर: IIT-IIM में 7 हजार से ज्यादा पोस्ट खाली
CHAKRESH | Jun 16, 2026, 13:07 IST
IIT-IIM में 7132 पोस्ट खाली
RTI रिपोर्ट में खुलासा: IIT, NIT और NIT समेत 79 केंद्रीय तकनीकी संस्थानों में 20 हजार 279 में से 7 हजार 132 फैकल्टी पद खाली हैं। 16 संस्थानों में 50% से ज्यादा पद रिक्त।
देश के टॉप तकनीकी संस्थानों में 35% फैकल्टी गायब
79 केंद्रीय तकनीकी संस्थानों (CFTI) में स्वीकृत 20 हजार 279 शिक्षक पदों में से 7 हजार 132 पद खाली हैं। यह 35.2% है। यानी हर तीन में से एक प्राध्यापक की पोस्ट ही नहीं भरी।
समझें क्या है मामला
कुल 7 हजार 132 पद खाली निकले, 16 संस्थानों में 50% से ज्यादा पद खाली थे और 14 में 40% से ज्यादा। IIITs की स्थिति सबसे खराब रही। इसके अलावा 17 IIITs में 53.5% यानी 665 पद खाली मिले।
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यह आपसे क्यों जुड़ा है?
साथ ही जो शुल्क आप लाखों में भरते हैं, उसके बदले में जो मिलना चाहिए, वो नहीं मिलता। यानी भले ही आपको ऊपर से लगे कि हमें सीधे तौर पर फर्क नहीं पड़ता, मगर फर्क बहुत ज्यादा पड़ता है।
पहले क्या था
आज 2025 में भी जवाब वही है। फर्क बस इतना है- अब सूचना के अधिकार ने पूरा हिसाब सामने रख दिया है।
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क्या हुआ और क्यों
लेकिन वही उम्मीदवार अगर किसी निजी तकनीकी कंपनी में जाए Google, Microsoft, या किसी नए उद्यम में तो पहले साल में ही 25 से 40 लाख का पैकेज मिल सकता है। शोध उपाधि लेकर IIT जॉइन करना और उद्योग में जाना, दोनों में आसमान-जमीन का फर्क है।
यहीं से असली समस्या शुरू होती है।
अब आते हैं असली सवाल पर नए IIT और NIT पिछले 15 साल में बहुत बढ़े हैं। साल 2008 में 7 IIT थे, अब 23 हैं। सीटें बढ़ीं, विद्यार्थी बढ़े, लेकिन शिक्षक उसी रफ्तार से नहीं बढ़े। नतीजा? पुराने और नए दोनों तरह के संस्थान एक साथ शिक्षक की कमी से जूझ रहे हैं।
IIMs की स्थिति भी अलग नहीं है। 18 IIMs में 32.3% पद खाली निकले। IIM मुंबई में 130 में से 77 पद भरे ही नहीं थे यानी 59% रिक्तियां।
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सीधे तौर पर किसकी जिम्मेदारी है?
संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 2025-26 की रिपोर्ट में कहा कि सभी भर्ती प्रक्रियाएं पारदर्शी, योग्यता-आधारित और भेदभाव-रहित होनी चाहिए, लेकिन यह सिफारिश कागज पर है।
अब दोनों पक्षों की बात
दूसरी तरफ आलोचकों का तर्क है कि प्रक्रिया चल रही है कहना काफी नहीं है। जब 16 संस्थानों में आधे से ज्यादा पद खाली हों, तो यह व्यवस्थागत विफलता है। संविदा शिक्षक स्थायी शिक्षक का विकल्प नहीं हो सकते। वे न शोध मार्गदर्शन दे सकते हैं, न दीर्घकालिक परामर्श।
अब बात मध्य प्रदेश के हालात की
IIIT भोपाल तो अभी भी चलती विज्ञप्ति पर शिक्षक भर्ती कर रहा है, स्थायी नियुक्ति की जगह संविदा आधार पर।
तो आगे क्या होगा
संसदीय समिति की सिफारिश लागू हो, भर्ती प्रक्रिया छोटी हो, और शैक्षणिक वेतन को उद्योग के करीब लाने की कोशिश हो, तभी कुछ बदल सकता है।
एक बात जो आप नहीं जानते थे
यानी समस्या आपूर्ति की नहीं, प्रोत्साहन की है। जब तक अध्यापन का पेशा आर्थिक और व्यावसायिक रूप से उद्योग के बराबर नहीं होगा कुर्सियां खाली रहेंगी।
तो अब आप क्या करें
यह खबर क्यों जरूरी है?
यह सिर्फ administrative failure नहीं है, एक नैतिक सवाल भी है। जो परिवार लाखों रुपए और बरसों की मेहनत लगाकर IIT-NIT भेजते हैं, वे पूरी शिक्षा के हकदार हैं। RTI से यह जानकारी सामने आना लोकतंत्र की ताकत है।
FAQ
- IIT और NIT में फैकल्टी की कितनी कमी है?
RTI डेटा के मुताबिक 79 केंद्रीय तकनीकी संस्थानों में 20,279 स्वीकृत पदों में से 7,132 खाली हैं। यह करीब 35% है। 16 संस्थानों में 50% से ज्यादा पद रिक्त हैं। - IIT, IIM में फैकल्टी पद क्यों नहीं भरे जाते?
इसके मुख्य कारण हैं- industry की तुलना में कम वेतन, PhD graduates का विदेश जाना, और लंबी bureaucratic भर्ती प्रक्रिया। नए IIT-NIT की तेज expansion के बाद faculty supply उसी रफ्तार से नहीं बढ़ी।
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