ऑपरेशन से बच्चों को जन्म दे रही शहर की माई, प्रायवेट हॉस्पिटल कर रहे कमाई

Arun Tiwari | Jun 12, 2026, 16:14 IST
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ऑपरेशन से जन्में बच्चों का प्रतिशत 2026
ऑपरेशन से जन्में बच्चों का प्रतिशत 2026

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सीज़ेरियन से होने वाले प्रसव का चलन बढ़ रहा है। सबसे अधिक ऐसे प्रसव निजी अस्पतालों में दर्ज किए जा रहे हैं। जबकि शहरों की महिलाओं में इसकी दर गांवों की तुलना में ज्यादा है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट
  • ऑपरेशन से बच्चों को जन्म देने का चलन बढ़ा
  • निजी अस्पतालों में ज्यादा होता है ऑपरेशन
  • गांव की अपेक्षा शहरों की महिलाओं की संख्या ज्यादा
मेडिकल साइंस का बढ़ता प्रभाव अब बड़ी कमाई का जरिया हो गया है। इन दिनों महिलाओं में ऑपरेशन या सी सेक्शन से बच्चों को जन्म देने का चलन बढ़ता जा रहा है। इसका सीधा कारण है कि बच्चे के जन्म के समय होने वाले बेइंतहां दर्द से निजात मिल गई है।

इसी वजह से प्राइवेट अस्पतालों की चांदी हो रही है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की ताजा रिपोर्ट बताती है कि ऑपरेशन से बच्चे पैदा करने का चलन बढ़ा है। इनमें से सी सेक्शन के अधिकांश जन्म प्राइवेट अस्पतालों में हो रहे हैं। प्राइवेट अस्पतालों के लिए ऑपरेशन से डिलीवरी करना बड़ी कमाई का जरिया बन गया है। इसमें एक और गौर करने वाली बात है।

सी सेक्शन से बच्चों को जन्म देने में शहर की महिलाएं आगे हैं। जबकि गांव की महिलाओं का प्रतिशत बहुत कम है। पंजाब में यह चलन बहुत ज्यादा है। वहां 46 फीसदी से ज्यादा महिलाएं सिजेरियन तरीके से बच्चों को जन्म देती हैं। आइए आपको बताते हैं कि किस तरह मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़ और राजस्थान में किस तरह ऑपरेशन का बाजार बढ़ रहा है।

ऑपरेशन से बढ़ रहे प्रसव :

बदलती जीवनशैली, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की बढ़ती उपलब्धता और गर्भावस्था के दौरान बेहतर प्रबंधन के बीच सीज़ेरियन (सी-सेक्शन) से होने वाले प्रसव का दायरा लगातार बढ़ रहा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) के आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी ऑपरेशन के जरिए बच्चों को जन्म देने की प्रवृत्ति में बढ़ोतरी हुई है।

एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सी-सेक्शन से होने वाले अधिकांश प्रसव निजी अस्पतालों में दर्ज किए गए हैं। निजी संस्थानों में आवश्यकता से अधिक सी-सेक्शन किए जाने की आशंकाएं समय-समय पर उठती रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार शहरों में रहने वाली महिलाओं के बीच सी-सेक्शन की दर ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी सामान्य प्रसव का प्रतिशत अपेक्षाकृत अधिक है।

सिजेरियन बच्चों की डिलीवरी
सिजेरियन बच्चों की डिलीवरी


मध्य प्रदेश में 4 फीसदी बढ़ा चलन :

मध्यप्रदेश में पिछले चार सालों में ऑपरेशन से बच्चों को जन्म देने वाली माताओं की संख्या 4 फीसदी बढ़ गई है। इसमें शहर की महिलाओं की संख्या ज्यादा है। इससे साफ है कि पढ़ी-लिखी शहर की महिलाएं बिना पीड़ा के बच्चों को जन्म देना चाहती हैं।

एमपी में 16 फीसदी महिलाएं ऑपरेशन से बच्चों को जन्म देती हैं। इनमें 33.9 फीसदी शहर की महिलाएं हैं और 11 फीसदी गांव की महिलाएं। चार साल पहले आई रिपोर्ट में 12 फीसदी महिलाएं ही सी सेक्शन करवाती थीं।

इसमें 61.7 फीसदी ऑपरेशन प्रायवेट हॉस्पिटल में होते हैं और महज 10 फीसदी ऑपरेशन सरकारी अस्पताल में किए जाते हैं।

छत्तीसगढ़ में 5 फीसदी इजाफा :

  • छत्तीसगढ़ में 20 फीसदी महिलाएं सी सेक्शन से बच्चे पैदा करती हैं। इनमें शहरों की 41.8 फीसदी तो गांवों की 15.7 फीसदी महिलाएं शामिल हैं।
    साल 2019-21 की रिपोर्ट में 15.2 फीसदी महिलाएं ही ऑपरेशन से बच्चे को जन्म देती थीं।
  • प्रायवेट अस्पतालों में सी सेक्शन का आंकड़ा 64.9 फीसदी है।
  • सरकारी अस्पतालों में 12.2 फीसदी महिलाएं ही ऑपरेशन से डिलीवरी कराती हैं।

राजस्थान में भी बढ़ा आंकड़ा :

  • राजस्थान में 15.6 फीसदी महिलाएं सी सेक्शन से बच्चे पैदा करती हैं। इनमें शहरों की 32.8 फीसदी तो गांवों की 11.4 फीसदी महिलाएं शामिल हैं।
  • साल 2019-21 की रिपोर्ट में 10.4 फीसदी महिलाएं ही ऑपरेशन से बच्चे को जन्म देती थीं।
  • प्रायवेट अस्पतालों में सी सेक्शन का आंकड़ा 35 फीसदी है।
  • सरकारी अस्पतालों में 10.5 फीसदी महिलाएं ही ऑपरेशन से डिलीवरी कराती हैं।

निष्कर्ष :

विशेषज्ञों का मानना है कि सी-सेक्शन को लेकर किसी भी तरह का निर्णय केवल चिकित्सकीय आवश्यकता के आधार पर ही लिया जाना चाहिए। यदि गर्भवती महिला या गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य पर जोखिम हो तो ऑपरेशन सुरक्षित विकल्प बन सकता है। लेकिन बिना चिकित्सकीय आवश्यकता के इसकी बढ़ती प्रवृत्ति पर लगातार निगरानी और अध्ययन की जरूरत है। डॉक्टर कहते हैं कि सी सेक्शन से दर्द नहीं होता लेकिन इसके साइड इफैक्ट लंबे समय तक बने रहते हैं।

यदि आवश्यक न हो तो महिलाओं को नॉर्मल डिलेवरी ही करवानी चाहिए। देखने में यह भी आता है कि प्रायवेट अस्पतालों में डिलेवरी कराने वाली महिलाओं में अधिकांश का सीसेक्शन ही होता है। निजी अस्पताल मेडिकल इमरजेंसी बताकर इसके लिए दबाव भी डालते हैं। इससे उनको ज्यादा कमाई होती है।

FAQ

  1. सी-सेक्शन डिलीवरी क्या होती है?
    सी-सेक्शन (Caesarean Section) डिलीवरी एक शल्यचिकित्सा प्रक्रिया है जिसमें बच्चे को मां के पेट और गर्भाशय में से सर्जरी के जरिए जन्म दिया जाता है, बजाय सामान्य वेजाइनल डिलीवरी के। इसे तब किया जाता है जब नॉर्मल डिलीवरी से मां या बच्चे के स्वास्थ्य पर जोखिम हो।
  2. सी-सेक्शन डिलीवरी का चलन क्यों बढ़ रहा है?
    NFHS रिपोर्ट के अनुसार आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं, जीवनशैली में बदलाव और निजी अस्पतालों में बढ़ती सुविधाओं के कारण सी-सेक्शन डिलीवरी का चलन बढ़ा है।


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