गरबा में गोरी और चमकार दिखने लड़कियां लगवा रहीं ग्लो ड्रिप, खूबसूरती के चक्कर में दिल और किडनी को नुकसान
Arun Tiwari | Oct 09, 2026, 17:02 IST
चेहरे पर ग्लो ड्रिप के साइड इफेक्ट्स
नवरात्रि में खूबसूरत दिखने और चेहरे पर खास चमक लाने के लिए लोग मेकअप, हेयर स्टाइल और स्किन केयर पर काफी ध्यान देते हैं। अब इस तैयारी में एक नया ट्रेंड भी शामिल हो रहा है। अहमदाबाद में गरबा खेलने जाने वाले कुछ लोग चेहरे को चमकदार बनाने और त्वचा का रंग निखारने के लिए IV ग्लो ड्रिप का सहारा ले रहे हैं।
दावा किया जाता है कि इस प्रक्रिया से त्वचा को तुरंत चमक मिल सकती है और शरीर में पानी की कमी भी दूर होती है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि खूबसूरती पाने का यह तरीका सेहत के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। IV ग्लो ड्रिप के नाम से दिए जाने वाले इस डोज में विटामिन, मिनरल, एंटीऑक्सीडेंट और कुछ मामलों में ग्लूटाथियोन नामक पदार्थ को नसों के जरिए सीधे खून में पहुंचाया जाता है।
इसे त्वचा का रंग हल्का करने, चेहरे की चमक बढ़ाने और बढ़ती उम्र के असर को कम करने के लिए प्रचारित किया जाता है। हालांकि इन दावों को साबित करने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
ग्लूटाथियोन एक एंटीऑक्सीडेंट है, जो शरीर में प्राकृतिक रूप से बनता है। यह तीन अमीनो एसिड से मिलकर बना होता है और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों से बचाने में मदद करता है। त्वचा का रंग मुख्य रूप से मेलेनिन नामक पिगमेंट से तय होता है।
ग्लूटाथियोन को लेकर यह दावा किया जाता है कि यह मेलेनिन के निर्माण को प्रभावित कर सकता है, जिससे त्वचा का रंग हल्का हो सकता है। इसी वजह से कॉस्मेटिक उपचारों में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। हालांकि शरीर में किसी पदार्थ का प्राकृतिक रूप से मौजूद होना इस बात की गारंटी नहीं है कि उसे अधिक मात्रा में नसों के जरिए देने से त्वचा का रंग निखरेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार IV ग्लूटाथियोन से लंबे समय तक त्वचा का रंग हल्का रहने या स्थायी चमक मिलने के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। कुछ छोटे अध्ययनों में पिगमेंटेशन कम होने के संकेत जरूर मिले हैं लेकिन इसके परिणाम सीमित हो सकते हैं और उपचार बंद करने के बाद असर खत्म भी हो सकता है।
डाक्टरों की सबसे बड़ी चिंता इस प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन और ड्रिप की सुरक्षा को लेकर है। नसों के जरिए किसी पदार्थ को सीधे खून में पहुंचाने पर उसका असर तेजी से हो सकता है। यदि दवा की गुणवत्ता सही नहीं है, उसमें मिलावट है या उसे देने का तरीका सुरक्षित नहीं है, तो गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
त्वचा रोग विशेषज्ञ के अनुसार ग्लूटाथियोन के इंजेक्शन या ड्रिप के अनुचित इस्तेमाल से गंभीर एलर्जी हो सकती है। इसे एनाफिलैक्सिस कहा जाता है। ऐसी स्थिति में सांस लेने में परेशानी, ब्लड प्रेशर का अचानक गिरना और हृदय संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए केवल चेहरे पर चमक लाने के लिए बिना पर्याप्त चिकित्सकीय सलाह के इस तरह का उपचार कराना जोखिम भरा हो सकता है।
IV ग्लूटाथियोन ड्रिप से जुड़े संभावित खतरों को समझने के लिए मुंबई के एक मामले का जिक्र भी किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक एक 28 वर्षीय महिला को बांद्रा के एक सैलून में ग्लूटाथियोन के आठ सेशन लेने के बाद किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या हो गई। महिला के क्रिएटिनिन का स्तर, जो किडनी की कार्यक्षमता का एक महत्वपूर्ण संकेतक है, 0.9 से बढ़कर 2.8 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर हो गया।
इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उपचार के साथ-साथ उसे लंबे समय तक किडनी की रिकवरी के लिए भी देखभाल की जरूरत पड़ी। डाक्टरों के मुताबिक, इस तरह की समस्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं। ड्रिप से गंभीर प्रतिक्रिया होने पर ब्लड प्रेशर अचानक गिर सकता है। इसके अलावा, इंजेक्शन में बैक्टीरिया से जुड़े हानिकारक पदार्थों की मौजूदगी भी शरीर में गंभीर सूजन पैदा कर सकती है।
अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने भी दूषित ग्लूटाथियोन इंजेक्शन से जुड़े दुष्प्रभावों को लेकर चेतावनी दी है। हालांकि किसी एक मामले से हर व्यक्ति में समान खतरे का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता लेकिन यह घटना बिना प्रमाण वाले कॉस्मेटिक उपचारों में सावधानी की जरूरत जरूर बताती है।
आजकल कुछ जगहों पर ग्लो ड्रिप को सामान्य ब्यूटी ट्रीटमेंट की तरह पेश किया जा रहा है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि नसों के जरिए दवा या अन्य पदार्थ देने की प्रक्रिया को सामान्य ब्यूटी सर्विस नहीं समझना चाहिए। त्वचा विशेषज्ञ के मुताबिक किसी भी स्किन ट्रीटमेंट से पहले व्यक्ति की चिकित्सकीय जांच होनी चाहिए।
साथ ही उपचार के दौरान कोई आपात स्थिति पैदा होने पर उससे निपटने के लिए जरूरी उपकरण और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ उपलब्ध होना चाहिए। विशेषज्ञों का सुझाव है कि IV ड्रिप पर विचार करने से पहले किडनी और लिवर की कार्यक्षमता की जांच करानी चाहिए। शरीर में किसी तरह का संक्रमण तो नहीं है, इसकी भी जांच जरूरी है।
किसी व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी है या वह दूसरी दवाएं ले रहा है, तो यह जानकारी डॉक्टर को देना भी महत्वपूर्ण है। सबसे जरूरी बात यह है कि ड्रिप में कौन-से पदार्थ हैं, उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है और उस उपयोग के लिए उनकी सुरक्षा के क्या प्रमाण हैं, इसकी जानकारी होनी चाहिए।
ग्लूटाथियोन केवल ड्रिप के रूप में ही नहीं, बल्कि खाने वाले सप्लीमेंट के रूप में भी बाजार में उपलब्ध है। लेकिन किसी सप्लीमेंट का बाजार में बिकना यह साबित नहीं करता कि वह त्वचा का रंग हल्का करने या उम्र बढ़ने के असर को रोकने में प्रभावी है।
भारत में स्वास्थ्य संबंधी सप्लीमेंट और न्यूट्रास्यूटिकल्स पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियम लागू होते हैं। इसके बावजूद किसी उत्पाद के विज्ञापन में किए गए हर दावे को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
त्वचा को लेकर बड़े-बड़े दावे करने वाले उत्पादों को खरीदने से पहले उनकी सामग्री, लेबल और उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों पर ध्यान देना जरूरी है। खासतौर पर त्वचा को तेजी से गोरा करने या बढ़ती उम्र के असर को पलटने के दावों से सावधान रहना चाहिए।
चेहरे पर स्वस्थ चमक लाने के लिए जोखिम भरे इंजेक्शन या ड्रिप पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। पर्याप्त नींद लेना, शरीर में पानी की कमी न होने देना, संतुलित आहार खाना और धूप से त्वचा की सुरक्षा करना बेहतर विकल्प हैं। यदि त्वचा पर दाग-धब्बे, असमान रंग या पिगमेंटेशन की समस्या है, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। विशेषज्ञ त्वचा की स्थिति के अनुसार उचित उपचार बता सकते हैं।
कुल मिलाकर, नवरात्रि में कुछ समय के लिए चमकदार दिखने की चाह में अपनी सेहत को जोखिम में डालना समझदारी नहीं है। IV ग्लो ड्रिप से मिलने वाले फायदे अभी पर्याप्त रूप से प्रमाणित नहीं हैं, जबकि इसके संभावित दुष्प्रभाव गंभीर हो सकते हैं। इसलिए किसी भी तरह का कॉस्मेटिक इंजेक्शन या ड्रिप लेने से पहले उसकी जरूरत, सुरक्षा और प्रभावशीलता के बारे में योग्य डॉक्टर से जानकारी लेना जरूरी है।
इसे त्वचा का रंग हल्का करने, चेहरे की चमक बढ़ाने और बढ़ती उम्र के असर को कम करने के लिए प्रचारित किया जाता है। हालांकि इन दावों को साबित करने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
क्या है ग्लूटाथियोन और त्वचा पर इसका क्या असर होता है
ग्लूटाथियोन को लेकर यह दावा किया जाता है कि यह मेलेनिन के निर्माण को प्रभावित कर सकता है, जिससे त्वचा का रंग हल्का हो सकता है। इसी वजह से कॉस्मेटिक उपचारों में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। हालांकि शरीर में किसी पदार्थ का प्राकृतिक रूप से मौजूद होना इस बात की गारंटी नहीं है कि उसे अधिक मात्रा में नसों के जरिए देने से त्वचा का रंग निखरेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार IV ग्लूटाथियोन से लंबे समय तक त्वचा का रंग हल्का रहने या स्थायी चमक मिलने के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। कुछ छोटे अध्ययनों में पिगमेंटेशन कम होने के संकेत जरूर मिले हैं लेकिन इसके परिणाम सीमित हो सकते हैं और उपचार बंद करने के बाद असर खत्म भी हो सकता है।
खूबसूरती के लिए अपनाया यह तरीका बन सकता है गंभीर खतरा
त्वचा रोग विशेषज्ञ के अनुसार ग्लूटाथियोन के इंजेक्शन या ड्रिप के अनुचित इस्तेमाल से गंभीर एलर्जी हो सकती है। इसे एनाफिलैक्सिस कहा जाता है। ऐसी स्थिति में सांस लेने में परेशानी, ब्लड प्रेशर का अचानक गिरना और हृदय संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए केवल चेहरे पर चमक लाने के लिए बिना पर्याप्त चिकित्सकीय सलाह के इस तरह का उपचार कराना जोखिम भरा हो सकता है।
आठ सेशन के बाद महिला की किडनी को पहुंचा नुकसान
इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उपचार के साथ-साथ उसे लंबे समय तक किडनी की रिकवरी के लिए भी देखभाल की जरूरत पड़ी। डाक्टरों के मुताबिक, इस तरह की समस्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं। ड्रिप से गंभीर प्रतिक्रिया होने पर ब्लड प्रेशर अचानक गिर सकता है। इसके अलावा, इंजेक्शन में बैक्टीरिया से जुड़े हानिकारक पदार्थों की मौजूदगी भी शरीर में गंभीर सूजन पैदा कर सकती है।
अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने भी दूषित ग्लूटाथियोन इंजेक्शन से जुड़े दुष्प्रभावों को लेकर चेतावनी दी है। हालांकि किसी एक मामले से हर व्यक्ति में समान खतरे का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता लेकिन यह घटना बिना प्रमाण वाले कॉस्मेटिक उपचारों में सावधानी की जरूरत जरूर बताती है।
सैलून या ग्लो बार में ड्रिप लगवाना कितना सुरक्षित
साथ ही उपचार के दौरान कोई आपात स्थिति पैदा होने पर उससे निपटने के लिए जरूरी उपकरण और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ उपलब्ध होना चाहिए। विशेषज्ञों का सुझाव है कि IV ड्रिप पर विचार करने से पहले किडनी और लिवर की कार्यक्षमता की जांच करानी चाहिए। शरीर में किसी तरह का संक्रमण तो नहीं है, इसकी भी जांच जरूरी है।
किसी व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी है या वह दूसरी दवाएं ले रहा है, तो यह जानकारी डॉक्टर को देना भी महत्वपूर्ण है। सबसे जरूरी बात यह है कि ड्रिप में कौन-से पदार्थ हैं, उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है और उस उपयोग के लिए उनकी सुरक्षा के क्या प्रमाण हैं, इसकी जानकारी होनी चाहिए।
ग्लूटाथियोन की गोलियां भी त्वचा गोरी करने की गारंटी नहीं
भारत में स्वास्थ्य संबंधी सप्लीमेंट और न्यूट्रास्यूटिकल्स पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियम लागू होते हैं। इसके बावजूद किसी उत्पाद के विज्ञापन में किए गए हर दावे को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
त्वचा को लेकर बड़े-बड़े दावे करने वाले उत्पादों को खरीदने से पहले उनकी सामग्री, लेबल और उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों पर ध्यान देना जरूरी है। खासतौर पर त्वचा को तेजी से गोरा करने या बढ़ती उम्र के असर को पलटने के दावों से सावधान रहना चाहिए।
नवरात्रि में चेहरे पर चमक लाने के लिए क्या करें
कुल मिलाकर, नवरात्रि में कुछ समय के लिए चमकदार दिखने की चाह में अपनी सेहत को जोखिम में डालना समझदारी नहीं है। IV ग्लो ड्रिप से मिलने वाले फायदे अभी पर्याप्त रूप से प्रमाणित नहीं हैं, जबकि इसके संभावित दुष्प्रभाव गंभीर हो सकते हैं। इसलिए किसी भी तरह का कॉस्मेटिक इंजेक्शन या ड्रिप लेने से पहले उसकी जरूरत, सुरक्षा और प्रभावशीलता के बारे में योग्य डॉक्टर से जानकारी लेना जरूरी है।
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