देसी ब्रांड : 90 के दशक में बंद होने की कगार पर था वाडीलाल, आज बना चुका है 4500 करोड़ का साम्राज्य

Manish Kumar | Sept 21, 2025, 19:00 IST
Share
desi-brand-vadilal-success-story-thesootr-campaign-be-indian-buy-indian (2)
Photograph: (The Sootr)

'बी इंडियन, बाय इंडियन' कैंपेन के तहत जानिए कैसे 1907 में शुरू हुआ यह ब्रांड, संघर्ष और इनोवेशन से सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा। वाडीलाल ने आइसक्रीम और प्रोसेस्ड फूड में लगातार इनोवेशन किया और आज FMCG क्षेत्र में मजबूत स्थिति में है।

Be इंडियन-Buy इंडियन: वाडीलाल की कहानी भारतीय उद्यमिता, परिवार की परंपरा और स्वाद के जुनून का सार है। इस स्टोरी में आपको वाडीलाल की शुरुआत, संघर्षों, सफलता, आज की बाजार स्थिति, मार्केट पॉजिशन, मूल मंत्र और सीख को रोचक किस्सागोई अंदाज में पढ़ने को मिलेगा।

2025 में वाडीलाल की बाजार पूंजी करीब 4,500 करोड़ रुपए (मार्केट कैप) है। शेयर प्राइस 6,000 रुपए से ऊपर है जो FMCG सेक्टर में कंपनी की अत्यंत मजबूत स्थिति को दर्शाता है। भारत में कंपनी के 1,25,000+ डीलर हैं, दक्षिण-उत्तर के बाजार में मजबूत पकड़ है।



be indian-buy indian
be indian-buy indian


कैसे हुई वाडीलाल की शुरुआत

45e78bf3-797
45e78bf3-797


बीसवीं सदी के शुरुआती साल। 1907, अहमदाबाद की गलियों में एक छोटा सा सोडा फाउंटेन खुलता है - वाडीलाल गांधी के हाथों से। उस समय ‘आइसक्रीम’ का नाम ही अनोखा था। वाडीलाल गांधी ने पहले सोडा बेचना शुरू किया और फिर हाथ से बनी आइसक्रीम जोड़ दी। उनका स्वाद इतना लाजवाब था कि उनके स्टॉल पर ग्राहकों की भीड़ लगने लगी। लोगों ने 'वाडीलाल' को स्वाद के साथ खुशियों का पर्याय मान लिया।

1926 में उनके बेटे रचंडलाल गांधी ने अहमदाबाद में पहला रिटेल आउटलेट खोला - 'वाडीलाल सोडा फाउंटेन'। इसी के साथ वाडीलाल का ध्यान आइसक्रीम व्यवसाय पर पूरी तरह केंद्रित हो गया। 1950 में "कसाटा" नामक विशिष्ट आइसक्रीम पेश की गई, जिसने भारतीय बाजार को नया स्वाद दिया।

वाडीलाल की ब्रांड की शुरुआती संघर्ष की कहानी

शुरुआती दौर में वाडीलाल के पास सीमित संसाधन थे, बाजार छोटा था और तकनीक भी साधारण। परिवार के सदस्य मशीन से हाथ से आइसक्रीम बनाते थे, दुकानों पर अपनी ही सेवा देते थे। गुणवत्ता और पारिवारिक सेवा भावना ही उनकी शक्ति थी।

1970 के दशक तक वाडीलाल अहमदाबाद के बाहर भी बढ़ने लगा, मगर उससे पहले उन्हें देश की सबसे बड़ी कंपनियों - हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) जैसे एमएनसी, और बाद में 1990 के दशक में अमूल जैसी कोऑपरेटिव कंपनियों से जबरदस्त मुकाबला झेलना पड़ा। 1994-95 में वाडीलाल लगभग बंदी की कगार पर आ गया था। डाइवर्सिफिकेशन, उत्पाद सुधार और नई रणनीति ही उन्हें फिर उठाने का रास्ता बना।

उसी कठिन समय में वाडीलाल ने अपने संसाधनों को अलग-अलग उद्योगों में फैलाया - आइसक्रीम के साथ ही प्रोसेस्ड फूड, जूस, सब्जियां आदि कंपनी के पोर्टफोलियो में शामिल किए। गुणवत्ता और नवाचार ने उन्हें प्रतिस्पर्धा में अलग पहचान दी।

वाडीलाल ब्रांड की सफलता की कहानी

5e6d8a1b-1f5
5e6d8a1b-1f5


संघर्ष से उबरने के बाद, वाडीलाल ने कई मिल के पत्थर गढ़े। 1980 के दशक में उन्होंने राज्यों के बाहर डीलरशिप और आउटलेट्स स्थापित किए। 1985 में भारत में पहली बार ऑटोमेटेड आइसक्रीम कैंडी लाइन की मशीनें लगाईं। 1989 में कंपनी का आईपीओ आया और वाडीलाल सार्वजनिक कंपनी बन गई। 1995 तक उनके उत्पाद भारत ही नहीं, 26 से ज्यादा देशों में निर्यात होने लगे।

इन वर्षों में वाडीलाल ने लगातार नवाचार किए - कसाटा, फ्लिंगो कोन, बदाबाइट बार, 'गौरमेट लाइन', पारंपरिक स्वादों (गुलाबजामुन, केसर रस मलाई, फलूदा) दर्शातीत इंडियन टच के साथ ग्राहकों को नए विकल्प दिए। 2001 में वाडीलाल ने 'लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में सबसे बड़ा आइसक्रीम संडे बनाकर नाम दर्ज किया।

कंपनी ने उत्पादों को शुद्ध शाकाहारी और अंडारहित बनाया- इसी USP के कारण परिवारों में गहरी पकड़ कायम की। प्रोसेस्ड फूड, फ्रोजन वेजिटेबल्स, स्नैक्स, रेडी टू ईट आइटम्स का सेल बढ़ा। वाडीलाल अमेरिका में सबसे ज्यादा बिकने वाला भारतीय आइसक्रीम ब्रांड बना।

आज बाजार में वाडीलाल की क्या स्थिति है?

2025 में वाडीलाल की बाजार पूंजीकरीब ₹4,500 करोड़ (मार्केट कैप) है। शेयर प्राइस ₹6,000 से ऊपर है जो FMCG सेक्टर में कंपनी की अत्यंत मजबूत स्थिति को दर्शाता है. भारत में कंपनी के 1,25,000+ डीलर हैं, दक्षिण-उत्तर के बाजार में मजबूत पकड़ है। कंपनी निरंतर तकनीकी, डिजाइन और ब्रांडिंग में नवाचार कर रही है।

आउटलेट्स, डिस्ट्रीब्यूटर और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को मिलाकर वाडीलाल का वितरण नेटवर्क बेहद ताकतवर है। कंपनी के रेडी टू ईट, ऑटोमेटेड आइसक्रीम, और एक्सपोर्ट बिजनेस पूरे FMCG रूट में वाडीलाल की पॉवर को दर्शाते हैं।

ब्रांड वाडीलाल की मार्केट में पॉजिशन

Vadilal Aims For 25-30% Growth This Summer Season, Unveils New Mascot  'Vaddy' - BW Marketing World
Vadilal Aims For 25-30% Growth This Summer Season, Unveils New Mascot 'Vaddy' - BW Marketing World


वाडीलाल भारत की टॉप आइसक्रीम-कम्पनियों में से एक है - अमूल, हिंदुस्तान यूनिलीवर और मदर डेयरी जैसे नामों के साथ इसकी गिनती होती है। वाडीलाल का मार्केट शेयर लगातार बढ़ रहा है, खासकर पश्चिमी और मध्य भारत के शहरी व ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में।
एक्सपोर्ट में भी वाडीलाल भारतीय आइसक्रीम ब्रांड्स का सबसे बड़ा नाम है - अमरीका और यूएई में इसकी डिमांड बहुत तेज है। कंपनी ने 2025 में गैर-परिवार CEO नियुक्त कर स्ट्रक्चरल बदलाव की मिसाल पेश की है।

वाडीलाल ब्रांड का मूल मंत्र

c7024ba3-962
c7024ba3-962


वाडीलाल का मूल मंत्र है - “स्वाद में नवाचार, परिवार में विश्वास, गुणवत्ता में सर्वोच्चता”। कंपनी हर कदम पर स्माइल स्प्रेड करने, ग्राहकों को बेहतरीन क्वालिटी देने और नए स्वादों से खुशियां बांटने का मिशन लेकर चलती है। पारंपरिक परिवार मूल्यों के साथ प्रोफेशनल मैनजमेंट और नए आईडिया का तालमेल ब्रांड की पहचान है।

इस कहानी से क्या सीखा जा सकता है

3edcec00-704
3edcec00-704


वाडीलाल की कहानी से मिलता है -

- सीमित संसाधन हो तो भी गुणवत्ता, नवाचार और परिवार की जड़ों के सहारे बड़ा ब्रांड खड़ा किया जा सकता है।
- संघर्ष और विपरीत हालत में डाइवर्सिफिकेशन, अच्छे उत्पाद और सेवा के बल पर उद्योग में पुनर्जीवन संभव है।
- निरंतर नवाचार - तकनीक व स्वाद दोनों में - अत्यंत आवश्यक है।
- भारतीय पारिवारिक विरासत और भरोसा ही दीर्घकालिक सफलता की कुंजी हैं।
- बाजार की मांग और बदलते समय के अनुसार रणनीति में परिवर्तन जरूर करना चाहिए।

स्रोत:

https://www.vadilalgroup.com
https://www.vadilalicecream.com
Research Articles on Vadilal Innovation and Market Trends
Industry Insights from Leading FMCG Experts

FAQ

  1. वाडीलाल ब्रांड को किसने शुरू किया?
    वाडीलाल गांधी ने 1907 में अहमदाबाद में वाडीलाल ब्रांड की शुरुआत की थी।
  2. वाडीलाल का सबसे चर्चित प्रोडक्ट कौन-सा है?
    वाडीलाल की 'कसाटा' आइसक्रीम 1950 में पेश की गई और आज भी सबसे पॉपुलर प्रोडक्ट्स में से है।
  3. क्या वाडीलाल पूरी तरह शाकाहारी आइसक्रीम बनाता है?
    हां, वाडीलाल की सभी आइसक्रीम और प्रोसेस्ड फूड उत्पाद पूर्ण रूप से शाकाहारी और अंडारहित हैं।
ये खबर भी पढ़ें...

देसी ब्रांड : साइकिल पर दवा बेचने से शुरू हुई डाबर, कैसे बनी भारत की टॉप-5 FMCG कंपनी, जानें अनसुनी कहानी

देसी ब्रांड : सिर्फ 50 पैसे में शुरू हुई थी Parle-G की कहानी, आज है 8600 करोड़ रुपए का साम्राज्य

देसी ब्रांड : दो दोस्तों ने नौकरी छोड़कर खड़ा किया इमामी, आज साढ़े तीन हजार करोड़ का है कारोबार

देसी ब्रांड : कभी एक कमरे में हुई थी बैद्यनाथ की शुरुआत, आज 500 करोड़ का है कारोबार

'द सूत्र' के महाअभियान Be इंडियन-Buy इंडियन का आगाज, सीएम मोहन यादव ने लॉन्च किया पोस्टर और लोगो

Tags:
  • आइसक्रीम
  • Be इंडियन-Buy इंडियन
  • देसी ब्रांड
  • वाडीलाल
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती

By VINAY VERMA

मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता

By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar

नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

By Neel Tiwari

20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं