एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर : इन शहरों में सबसे ज्यादा बेवफा सनम, दिल्ली-मुंबई नहीं ये शहर है टॉप पर
Jitendra Shrivastava | Jul 24, 2025, 18:38 IST
Photograph: (thesootr)
एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर (extra marital affairs) के मामले भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट ने यह चौंकाने वाला खुलासा किया है कि इस लिस्ट में दिल्ली और मुंबई का नाम नहीं है।
एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर (extra marital affairs) रखने के मामले भारत में लगातार बढ़ रहे हैं। यह अब एक सामान्य सी घटना बन चुकी है। पिछले कुछ सालों में इस विषय पर खुलकर चर्चा हो रही है।
पहले यह संबंध केवल बड़े शहरों तक सीमित थे, लेकिन अब छोटे शहरों और कस्बों में भी इस तरह के मामलों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। विशेष रूप से डेटिंग वेबसाइट्स और ऐप्स जैसे कि Ashley Madison ने इस बदलाव को सामने लाने का काम किया है।
तमिलनाडु में कांचीपुरम का एक छोटा सा शहर है, लेकिन इस साल एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की लिस्ट में पहले स्थान पर है। एशली मैडिसन की रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल यह शहर 17वें स्थान पर था। इस साल यह अचानक सबसे ऊपर पहुंच गया है। यहां पर साइनअप करने वाले यूजर्स की संख्या ने अन्य बड़े शहरों को पीछे छोड़ दिया है।
इस रिपोर्ट के अनुसार कांचीपुरम में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के मामले बढ़ गए हैं। यह तथ्य यह दिखाता है कि यहां के लोग अब रिश्तों को लेकर अपनी सोच में बदलाव कर रहे हैं।
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कांचीपुरम के बाद दिल्ली इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर है। दिल्ली-NCR के इलाके में 9 अलग-अलग स्थान इस लिस्ट में शामिल हैं। एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की इस लिस्ट में दिल्ली के अलावा गुरुग्राम, गौतम बुद्ध नगर, देहरादून, पुणे, बेंगलुरु और चंडीगढ़ जैसे बड़े शहर भी शामिल हैं।
इन शहरों में विवाहेतर संबंधों की बढ़ती संख्या को लेकर कई समाजशास्त्री और विशेषज्ञ चिंतित हैं। वे मानते हैं कि इस बदलाव का मुख्य कारण समाज का बदलता हुआ दृष्टिकोण और रिश्तों को लेकर अधिक खुलापन है।
लिस्ट से
मुंबई, जो पिछले साल एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की इस लिस्ट में पहले स्थान पर था, इस साल टॉप-20 की लिस्ट में भी नहीं है। यह एक चौंकाने वाला बदलाव है, क्योंकि मुंबई को आमतौर पर भारत के सबसे बड़े और सबसे विकसित शहरों में से एक माना जाता है।
हालांकि, दिल्ली का नाम दूसरे स्थान पर है, लेकिन मुंबई का स्थान घटने से यह संकेत मिलता है कि इस शहर में विवाहेतर संबंधों के मामलों में कमी आई है।
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इस तरह के संबंधों का प्रभाव केवल पति-पत्नी के रिश्ते तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे बच्चों और परिवार की मानसिक स्थिति भी प्रभावित होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संबंध बच्चों की मानसिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। यह उन्हें भावनात्मक रूप से अस्थिर बना सकता है और उनके जीवन में उलझनें पैदा कर सकता है।
इसके अलावा समाज में रिश्तों के प्रति बदलती सोच ने भी इस समस्या को बढ़ावा दिया है। लोग अब एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर को छिपाने की बजाय उन्हें खुलेआम स्वीकार कर रहे हैं, और यह एक सामाजिक बदलाव की ओर इशारा करता है।
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भारत में extra marital affairs को लेकर लंबे समय से कानूनी जटिलताएं थीं। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 497 को असंवैधानिक घोषित किया था। इसका मतलब है कि अब व्यस्कों के बीच सहमति से बने एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर अपराध नहीं माने जाते।
हालांकि, अगर ये संबंध तलाक का कारण बनते हैं तो उन्हें मानसिक क्रूरता के रूप में कोर्ट में पेश किया जा सकता है। यह कानूनी बदलाव विवाहेतर संबंधों के प्रति समाज की बदलती सोच को दर्शाता है।
Ashley Madison के चीफ स्ट्रैटेजी ऑफिसर पॉल कीएबल का कहना है कि भारत में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर अब छिपाने की चीज नहीं रह गई है। लोग अब रिश्तों को लेकर अधिक खुले विचार रखते हैं। यह केवल यौन संबंधों की बात नहीं है, बल्कि इमोशनल खालीपन को भी भरने की कोशिश है।
पॉल कीएबल का कहना है कि इस तरह के संबंध केवल कपल्स को ही नहीं, बल्कि उनके बच्चों को भी प्रभावित कर सकते हैं, और इसका असर उनकी मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है।
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भारत में extra-marital affairsकी बढ़ती संख्या और समाज में इसके प्रति खुले विचारों से यह सवाल उठता है कि क्या भविष्य में यह स्थिति और अधिक बिगड़ेगी। यदि समाज और परिवार इस समस्या को गंभीरता से नहीं लेते, तो यह एक और बड़ी सामाजिक समस्या बन सकती है, जो न केवल परिवारों को बल्कि समाज को भी प्रभावित कर सकती है।
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पहले यह संबंध केवल बड़े शहरों तक सीमित थे, लेकिन अब छोटे शहरों और कस्बों में भी इस तरह के मामलों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। विशेष रूप से डेटिंग वेबसाइट्स और ऐप्स जैसे कि Ashley Madison ने इस बदलाव को सामने लाने का काम किया है।
कांचीपुरम का नाम टॉप पर
इस रिपोर्ट के अनुसार कांचीपुरम में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के मामले बढ़ गए हैं। यह तथ्य यह दिखाता है कि यहां के लोग अब रिश्तों को लेकर अपनी सोच में बदलाव कर रहे हैं।
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अन्य प्रमुख शहरों का स्थान
इन शहरों में विवाहेतर संबंधों की बढ़ती संख्या को लेकर कई समाजशास्त्री और विशेषज्ञ चिंतित हैं। वे मानते हैं कि इस बदलाव का मुख्य कारण समाज का बदलता हुआ दृष्टिकोण और रिश्तों को लेकर अधिक खुलापन है।
लिस्ट से मुंबई का नाम गायब
हालांकि, दिल्ली का नाम दूसरे स्थान पर है, लेकिन मुंबई का स्थान घटने से यह संकेत मिलता है कि इस शहर में विवाहेतर संबंधों के मामलों में कमी आई है।
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एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का सामाजिक प्रभाव
इसके अलावा समाज में रिश्तों के प्रति बदलती सोच ने भी इस समस्या को बढ़ावा दिया है। लोग अब एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर को छिपाने की बजाय उन्हें खुलेआम स्वीकार कर रहे हैं, और यह एक सामाजिक बदलाव की ओर इशारा करता है।
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क्या कहता है कानून?
हालांकि, अगर ये संबंध तलाक का कारण बनते हैं तो उन्हें मानसिक क्रूरता के रूप में कोर्ट में पेश किया जा सकता है। यह कानूनी बदलाव विवाहेतर संबंधों के प्रति समाज की बदलती सोच को दर्शाता है।
विशेषज्ञों की राय...
पॉल कीएबल का कहना है कि इस तरह के संबंध केवल कपल्स को ही नहीं, बल्कि उनके बच्चों को भी प्रभावित कर सकते हैं, और इसका असर उनकी मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है।
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भविष्य में स्थिति और खराब होगी?
extra marital affairs में टॉप-20 शहर...
- कांचीपुरम (Kanchipuram)
- सेंट्रल दिल्ली (Central Delhi)
- गुरुग्राम (Gurugram)
- गौतमबुद्धनगर (Gautam Buddh Nagar)
- साउथ वेस्ट दिल्ली (South West Delhi)
- देहरादून (Dehradun)
- ईस्ट दिल्ली (East Delhi)
- पुणे (Pune)
- बेंगलुरु (Bengaluru)
- साउथ दिल्ली (South Delhi)
- चंडीगढ़ (Chandigarh)
- लखनऊ (Lucknow)
- कोलकाता (Kolkata)
- वेस्ट दिल्ली (West Delhi)
- कामरूप (असम) (Kamrup, Assam)
- नॉर्थ वेस्ट दिल्ली (North West Delhi)
- रायगढ़ (Raigarh)
- हैदराबाद (Hyderabad)
- गाजियाबाद (Ghaziabad)
- जयपुर (Jaipur)
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