कौन हैं मेनका गुरुस्वामी? जो बनने वाली हैं राज्यसभा सांसद
Anjali Dwivedi | Mar 01, 2026, 15:42 IST
menaka-guruswami
डॉ. मेनका गुरुस्वामी सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता हैं, जिन्होंने धारा 377 को रद्द करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है।
News In Short
- डॉ. मेनका गुरुस्वामी, सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता और LGBTQ अधिकारों की वकील हैं।
- 2018 में धारा 377 को रद्द करने वाली संविधान पीठ में बहस की थी।
- मेनका ने एलजीबीटी अधिकारों के लिए सुप्रीम कोर्ट में ऐतिहासिक याचिका दायर की।
- वे एक खुलकर क्वीयर (LGBTQ+) व्यक्तित्व के रूप में सार्वजनिक रूप से सामने आईं।
- तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया, अगर चुनी गईं तो वे पहली LGBTQ+ सांसद होंगी।
News In Detail
डॉ. मेनका के कैरियर की शुरुआत
उन्हें रोड्स स्कॉलरशिप मिली और वे ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय गईं। जहां उन्होंने बीसीएल और Constitutionalism in India, Pakistan and Nepal पर डी.फिल (PhD) की। इस बीच, उन्होंने हार्वर्ड लॉ स्कूल से एलएल.एम. किया और गैमन फेलोशिप प्राप्त किया। ऑक्सफोर्ड के रोड्स हाउस के मिलनर हॉल में उनकी पोर्ट्रेट प्रदर्शित की गई, और वे वहां प्रदर्शित होने वाली पहली भारतीय हैं।
1997 में बार में एडमिशन लेने के बाद, मेनका ने तत्कालीन अटॉर्नी जनरल अशोक देसाई के चैंबर में काम करना शुरू किया। वे जैन हवाला, चारा घोटाला जैसे मशहूर मामलों में जूनियर वकील के रूप में अनुभव हासिल करने के बाद न्यूयॉर्क में डेविस पोल्क एंड वॉर्डवेल में काम करने गईं। बाद में वे भारत लौटीं और सुप्रीम कोर्ट में स्वतंत्र प्रैक्टिस शुरू की। आज उनका काम संवैधानिक कानून, प्रशासनिक सुधार, वाणिज्यिक विवाद और व्हाइट-कालर क्राइम तक फैला है।
संवैधानिक मामलों में मेनका की भूमिका
LGBTQ अधिकारों के लिए संघर्ष
फिर साल 2018 में पांच जजों की संविधान पीठ के सामने उन्होंने तर्क दिया था। उनका कहना था कि सहमति से वयस्कों के बीच समलैंगिक संबंधों को अपराध बनाना समानता, गरिमा, निजता और अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। इस ऐतिहासिक फैसले में कोर्ट ने धारा 377 के उस हिस्से को असंवैधानिक ठहराया, जो वयस्कों के सहमति-आधारित समलैंगिक संबंधों को अपराध बनाता था। यह फैसला भारत में LGBTQ समुदाय के लिए बुनियादी नागरिक-मानव अधिकारों की दिशा में निर्णायक मोड़ माना गया।
खुलकर क्वीयर(LGBTQ+) पहचान का खुलासा
मेनका इस फैसले को उन जैसे जोड़ों के लिए स्वतंत्रता की घोषणा मानती हैं, जो बिना अपराधी ठहराए प्यार करना चाहते हैं। इसी साल मेनका और अरुंधति को टाइम 100 की Most Influential People सूची में भी शामिल किया गया।
अदालत से बाहर मेनका गुरुस्वामी एक सक्रिय सार्वजनिक बुद्धिजीवी और शिक्षक के रूप में भी मौजूद हैं। वे कोलंबिया लॉ स्कूल में डॉ. भीमराव अंबेडकर रिसर्च स्कॉलर और लेक्चरर रह चुकी हैं। इसके अलावा, वे येल, एनवाईयू और टोरंटो जैसी यूनिवर्सिटीज में विजिटिंग फैकल्टी के तौर पर कोर्स पढ़ा चुकी हैं। वे भारतीय संवैधानिक लोकतंत्र, अल्पसंख्यक अधिकारों और संवैधानिक देशभक्ति पर नियमित लेखन करती रही हैं।
LGBTQ अधिकारों का संवैधानिक दृष्टिकोण
ये खबरें भी पढ़ें...
भारत की पहली ओपन लेस्बियन सांसद बनेंगी मेनका गुरुस्वामी!
ईरान-इजराइल वॉर की आंच भारत तक, 400 से ज्यादा उड़ानें रद्द, एयरपोर्ट जाने से पहले करें ये...
टी 20 वर्ल्ड कप 2026: भारत-वेस्टइंडीज कोलकाता में होंगे आमने-सामने, दोनों टीमों के लिए करो या मरो
सावधान! रेलवे का UTS APP हो जाएगा कल से बंद, अब ऐसे मिलेंगे टिकट
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari