पिंक रैपिडो से बदलेगी तस्वीर, बेटियों की जेब में आएंगे हर महीने हजारों रुपए

Anjali Dwivedi | Feb 27, 2026, 17:14 IST
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हरियाणा सरकार बेटियों को फ्री ई-स्कूटी और 14 हजार सैलरी दे रही है। वहीं दिल्ली में महिलाओं के लिए पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड लॉन्च हुआ है। दोनों योजनाएं महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम हैं।

News In Short

  • हरियाणा के प्रत्येक जिले में दिल्ली-चंडीगढ़ मॉडल पर पिंक रैपिडो सेवा शुरू की जा रही है।
  • एससी और बीसी वर्ग की 30 युवतियों को फ्री ई-स्कूटी और प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  • चयनित युवतियों को 6 महीने तक 12 हजार से 14 हजार रुपए प्रति माह मानदेय मिलेगा।
  • आवेदकों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य है और चयन प्रक्रिया जिला स्तर पर जारी है।
  • 6 महीने बाद भी काम जारी रखने पर स्कूटी युवती के पास ही स्थायी रूप से रहेगी।

News In Detail

हरियाणा सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक शानदार पहल की है। अब प्रदेश की बेटियां सड़कों पर पिंक रैपिडो चलाकर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिखेंगी। चंडीगढ़ और दिल्ली के सफल मॉडल की तर्ज पर शुरू होने वाली यह सेवा शहरी परिवहन को सस्ता और सुलभ बनाएगी।

इस योजना के तहत विशेष रूप से एससी (SC) और बीसी (BC) वर्ग की युवतियों को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य स्वरोजगार को बढ़ावा देना और महिलाओं की आय में वृद्धि करना है।

फ्री ई-स्कूटी के साथ 14 हजार रुपए मानदेय

योजना के अंतर्गत चयनित होने वाली 30 भाग्यशाली युवतियों को सरकार की ओर से फ्री ई-स्कूटी (इलेक्ट्रिक स्कूटी) उपलब्ध कराई जाएगी। इतना ही नहीं, शुरुआती 6 महीनों तक उन्हें 12 से 14 हजार रुपए प्रति माह का मानदेय भी दिया जाएगा। यह राशि उनके आर्थिक आधार को मजबूती प्रदान करेगी।

युवतियां मोबाइल ऐप के जरिए राइड बुकिंग और छोटे सामानों की डिलीवरी सेवा संचालित करेंगी। इससे उन्हें न केवल काम मिलेगा, बल्कि वे तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ सकेंगी।

पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड क्या है?

दिल्ली सरकार महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा की दिशा में एक शानदार पहल लेकर आई है, जिसका नाम पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड योजना है। यह योजना 12 साल से ऊपर की सभी महिलाओं और ट्रांसजेंडर दिल्लीवासियों के लिए डीटीसी और क्लस्टर बसों में मुफ्त और असीमित यात्रा का लाभ देती है। अब आपको बस में पुराने पिंक पेपर टिकट लेने की झंझट नहीं पालनी होगी।

पिंक स्मार्ट कार्ड एक डिजिटल आईडी है, जिसमें आपकी फोटो, नाम और क्यूआर कोड जैसी जानकारियां होंगी। बस में चढ़ते ही आपको कंडक्टर से टिकट नहीं मांगना पड़ेगा। इसके बाद बस अपना कार्ड मशीन पर टैप करिए और अपनी सीट पर बैठ जाइए। सबसे खास बात यह है कि इस कार्ड को टॉप-अप कराकर आप दिल्ली मेट्रो में भी सफर कर सकेंगे।

यह स्मार्ट कार्ड कामकाजी महिलाओं, स्कूल-कॉलेज जाने वाली छात्राओं और रोज सफर करने वाले यात्रियों के लिए बेहद मददगार है। पुराने पेपर टिकट को डिजिटल और स्मार्ट बनाकर सरकार महिलाओं को सुरक्षित और आसान सफर का तोहफा दे रही है। अब दिल्ली की सहेलियां बिना किसी खर्च और परेशानी के पूरे शहर में कहीं भी आ-जा सकेंगी।

आवेदन के लिए ये पात्रता होनी चाहिए

जिला कल्याण विभाग ने इस योजना के लिए इच्छुक युवतियों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। योजना का लाभ लेने के लिए आवेदकों के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना जरूरी है। विभाग वर्तमान में प्राप्त आवेदनों की छंटनी कर सूची तैयार कर रहा है।

चयन के बाद सभी युवतियों को संचालन और सुरक्षा से जुड़े जरूरी दिशा-निर्देश और बुनियादी प्रशिक्षण दिए जाएंगे। विभाग इस पूरी चयन प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करने पर जोर दे रहा है।

निजी कंपनी के साथ MoU

योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सरकार ने एक निजी कंपनी के साथ MoU (Memorandum of Understanding) किया है। यह कंपनी डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीकी सहायता प्रदान करेगी। राइड की बुकिंग से लेकर भुगतान तक की सारी प्रोसेस ऑनलाइन ऐप के माध्यम से होंगी।

जिला कल्याण विभाग इस पूरी परियोजना की नियमित निगरानी करेगा। इससे सेवा की गुणवत्ता और युवतियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। यह मॉडल शहरों में यातायात की समस्या को कम करने में भी सहायक होगा।

प्रतिदिन 15 राइड का टारगेट

चयनित युवतियों को अपने काम के प्रति गंभीर बनाने के लिए प्रतिदिन न्यूनतम 15 राइड पूरी करने का लक्ष्य दिया गया है। यह ई-स्कूटी सेवा से जुड़े रहने तक युवतियों के पास ही रहेगी।

सबसे खास बात यह है कि यदि 6 माह बाद भी युवती इस कार्य को जारी रखना चाहती है, तो स्कूटी उसके पास ही रहेगी। इससे सरकार उन्हें एक स्थायी स्वरोजगार का अवसर प्रदान कर रही है। इससे बाजार, कार्यालय और आवासीय क्षेत्रों में त्वरित परिवहन सेवा उपलब्ध होगी।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ती बेटियां

जिला कल्याण अधिकारी अनु बंसल ने बताया कि इस योजना से जिले में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। नागरिकों को कम दूरी के सफर के लिए एक किफायती और सुलभ विकल्प मिलेगा।

योजना से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी और वे समाज में सिर उठाकर जी सकेंगी। हल्की डिलीवरी और छोटी दूरी के सफर के लिए यह सेवा मील का पत्थर साबित होगी। निश्चित ही इस पहल से शहरवासियों और युवतियों दोनों को बड़ा लाभ होने वाला है।

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