इंटरनेट के अश्लील कटेंट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- सरकार 4 हफ्ते में बनाए रेगुलेशन
Sandeep Kumar | Nov 27, 2025, 17:22 IST
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सुप्रीम कोर्ट ने अश्लील कंटेंट को लेकर नेटफ्लिक्स और यूट्यूब पर सख्ती बरती है। जजों ने दर्शकों से आधार कार्ड से उम्र प्रमाणित करने का सुझाव दिया है। इसका उद्देश्य बच्चों को गलत कंटेंट से बचाना है। यह सुझाव चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने दिया।
NEW DELHI. सुप्रीम कोर्ट ने नेटफ्लिक्स और यूट्यूब पर अश्लील कंटेंट को लेकर सख्ती दिखाई है। सुप्रीम कोर्ट के जजों ने सुझाव दिया कि अश्लील कंटेंट देखने के लिए आधार कार्ड जरूरी हो। कोर्ट का मानना है कि इससे बच्चों को गलत कंटेंट से बचाया जा सकेगा। यह सुझाव चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने दिया।
जजों ने कहा कि चेतावनी काफी नहीं है। उम्र की पुष्टि एक बेहतर विकल्प हो सकता है। यह सुनवाई समय रैना और रणवीर अल्लाहबादिया जैसे कॉमेडियन और पॉडकास्टर के खिलाफ याचिकाओं पर हो रही थी।
कोर्ट ने दिव्यांगों के अपमान पर भी नाराजगी जताई है। जजों ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब मनमानी नहीं है। इसके लिए एक स्वायत्त रेगुलेटरी बॉडी की जरूरत है।
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सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन अश्लीलता पर चिंता जताई है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि किताबों या पेंटिंग में अश्लीलता अलग है। वहां नीलामी होती है और प्रतिबंध भी लग सकते हैं। फोन पर स्थिति अलग है। जैसे ही आप फोन ऑन करते हैं, कंटेंट सामने आ जाता है। कई बार न चाहते हुए भी गलत चीजें दिख जाती हैं। ऐसे में क्या किया जाए?
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि चेतावनी के बावजूद शो शुरू हो जाता है। चेतावनी कुछ सेकंड के लिए आती है। इसके बाद शो शुरू हो जाता है। आधार कार्ड मांगना सही हो सकता है। इससे दर्शक की उम्र का पता चलेगा। यह पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यह सिर्फ सुझाव है।
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सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक कंटेंट बढ़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 4 हफ्तों में जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि फोन खोलते ही आपत्तिजनक कंटेंट आ जाता है। अश्लीलता किताबों, पेंटिंग आदि में हो सकती है। नीलामी में ऐसे कंटेंट पर प्रतिबंध हो सकते हैं। जस्टिस जयमाला बागची ने चेतावनी देने की बात की।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक समिति का गठन होना चाहिए। यह समिति विशेषज्ञों का समूह हो सकती है। इसमें न्यायपालिका और मीडिया से भी कोई शामिल हो सकता है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कुछ सामने आ सकता है। अगर इससे अभिव्यक्ति की आजादी बाधित होती है, तो उस पर विचार किया जाएगा। एक जिम्मेदार समाज बनाने की जरूरत है। ऐसा होने पर अधिकतर समस्याएं हल हो जाएंगी।
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न्यूज ब्रॉडकास्टिंग ऑर्गेनाइजेशंस ने कहा कि नए नियम सेंसरशिप नहीं होने चाहिए। इस पर जस्टिस जॉयमाला बागची ने कहा कि 48 घंटे बाद कंटेंट हटाया गया। तब तक कंटेंट वायरल हो चुका था। ऑडियो-वीडियो के लिए प्री-पब्लिकेशन सेंसरशिप है। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि यह तेजी से फैलता है।
सोशल मीडिया पर यह और भी अस्पष्ट होता है। यह वैश्विक सीमाएं पार कर जाता है। जस्टिस बागची ने कहा कि अधिकारों का गला घोंटना नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कंटेंट व्यवस्थित किया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश कांत ने उदाहरण दिया, एक व्यक्ति ने पाकिस्तान के साथ होने का पोस्ट किया।
एक घंटे बाद उसने पोस्ट हटा दिया, लेकिन नुकसान हो चुका था। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को चार हफ्ते का समय दिया। सोशल मीडिया/ओटीटी सामग्री से निपटने के लिए नियम बनाने को कहा।
जजों ने कहा कि चेतावनी काफी नहीं है। उम्र की पुष्टि एक बेहतर विकल्प हो सकता है। यह सुनवाई समय रैना और रणवीर अल्लाहबादिया जैसे कॉमेडियन और पॉडकास्टर के खिलाफ याचिकाओं पर हो रही थी।
कोर्ट ने दिव्यांगों के अपमान पर भी नाराजगी जताई है। जजों ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब मनमानी नहीं है। इसके लिए एक स्वायत्त रेगुलेटरी बॉडी की जरूरत है।
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आधार वेरिफिकेशन का सुझाव
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि चेतावनी के बावजूद शो शुरू हो जाता है। चेतावनी कुछ सेकंड के लिए आती है। इसके बाद शो शुरू हो जाता है। आधार कार्ड मांगना सही हो सकता है। इससे दर्शक की उम्र का पता चलेगा। यह पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यह सिर्फ सुझाव है।
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सरकार से 4 हफ्तों में मांगा जवाब
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समिति का गठन होना चाहिए: SC
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नए नियम सेंसरशिप नहीं होने चाहिए
सोशल मीडिया पर यह और भी अस्पष्ट होता है। यह वैश्विक सीमाएं पार कर जाता है। जस्टिस बागची ने कहा कि अधिकारों का गला घोंटना नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कंटेंट व्यवस्थित किया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश कांत ने उदाहरण दिया, एक व्यक्ति ने पाकिस्तान के साथ होने का पोस्ट किया।
एक घंटे बाद उसने पोस्ट हटा दिया, लेकिन नुकसान हो चुका था। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को चार हफ्ते का समय दिया। सोशल मीडिया/ओटीटी सामग्री से निपटने के लिए नियम बनाने को कहा।
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