वर्कप्लेस पर किसी को आंटी कहा तो हो सकती है जेल या भारी जुर्माना
Anjali Dwivedi | Apr 10, 2026, 18:38 IST
calling auntie at workplace
ब्रिटेन में एक नर्स द्वारा भारतीय मूल की सहकर्मी को आंटी कहना महंगा पड़ गया। कोर्ट ने इसे उम्र आधारित उत्पीड़न मानते हुए 1.8 लाख रुपए मुआवजे का आदेश दिया है।
भारत में आंटी शब्द को अक्सर सम्मान और अपनेपन का प्रतीक माना जाता है, लेकिन ब्रिटेन में यही शब्द आपके लिए कानूनी मुसीबत बन सकता है। ब्रिटेन के वर्कप्लेस कल्चर में किसी महिला को आंटी कहना अब उम्र और लिंग आधारित उत्पीड़न की श्रेणी में आ गया है। हाल ही में एक नर्स को अपनी सहकर्मी को बार-बार आंटी कहना भारी पड़ा, कोर्ट ने उन पर भारी जुर्माना ठोक दिया।
यह मामला वेस्ट लंदन एनएचएस ट्रस्ट का है। यहां भारतीय मूल की हेल्थकेयर असिस्टेंट इल्डा एस्टेवेस काम करती हैं। उनके साथ काम करने वाली घाना मूल की एक नर्स, चार्ल्स ओप्पोंग ने उन्हें काम के दौरान बार-बार आंटी कहकर संबोधित किया। इल्डा को यह शब्द बिल्कुल पसंद नहीं था और उन्होंने ओप्पोंग को कई बार ऐसा करने से टोका भी, लेकिन ओप्पोंग अपनी आदत से बाज नहीं आईं।
विवाद तब और बढ़ गया जब जून 2023 में ओप्पोंग ने इल्डा की उम्र को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इल्डा, स्टाफ के ही एक 61 वर्षीय बुजुर्ग जॉर्ज के लिए एक अच्छी पार्टनर साबित हो सकती हैं। इल्डा को यह बात बेहद अपमानजनक लगी और उन्होंने इसे अपनी गरिमा के खिलाफ मानते हुए इसकी शिकायत दर्ज करा दी।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान नर्स ओप्पोंग ने आरोपों को नकारा। हालांकि उन्होंने एक बार आंटी कहने की बात स्वीकार की। उन्होंने दलील दी कि घाना की कल्चर में बुजुर्गों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए आंटी शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।
लेकिन ट्रिब्यूनल के जज एलीट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। जस्टिस एलीट का मानना था कि इल्डा ने पहले ही आपत्ति जताई थी, इसलिए उनके लिए यह शब्द सम्मानजनक नहीं बल्कि अपमानजनक था।
कोर्ट का फैसला 1.8 लाख का
एम्प्लॉयमेंट ट्रिब्यूनल ने इसे कार्यस्थल पर उत्पीड़न का मामला माना। जज ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आंटी कहना शिकायतकर्ता की उम्र और लिंग से जुड़ा हुआ उत्पीड़न है, जिससे उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची है। कोर्ट ने ट्रस्ट को आदेश दिया कि वह इल्डा एस्टेवेस को मुआवजे के तौर पर 1,425 यूरो (करीब 1.8 लाख रुपए) का भुगतान करे।
ट्रिब्यूनल ने इल्डा के उत्पीड़न (Harassment) के दावे को तो सही पाया, लेकिन उनकी एक अन्य मांग को ठुकरा दिया। इल्डा चाहती थीं कि अदालत की कार्यवाही में उनकी पहचान को गुप्त रखा जाए, जिसे कोर्ट ने सार्वजनिक हित और पारदर्शिता का हवाला देते हुए मानने से इनकार कर दिया। अब यह मामला ब्रिटेन के वर्कप्लेस प्रोटोकॉल में एक मिसाल बन गया है।
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क्या है पूरा मामला?
उम्र और पार्टनर को लेकर कमेंट पर बवाल
अदालत में कल्चर बनाम सम्मान की बहस
लेकिन ट्रिब्यूनल के जज एलीट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। जस्टिस एलीट का मानना था कि इल्डा ने पहले ही आपत्ति जताई थी, इसलिए उनके लिए यह शब्द सम्मानजनक नहीं बल्कि अपमानजनक था।
कोर्ट का फैसला 1.8 लाख का मुआवजा
पहचान गुप्त रखने की मांग खारिज
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