इस बार 12 नहीं बल्कि 13 महीनों का होगा हिंदू नववर्ष 2026, जानें क्यों जुड़ रहा कैलेंडर में एक्स्ट्रा महीना
Kaushiki | Feb 18, 2026, 14:35 IST
adhik maas
हिंदू कैलेंडर के मुताबिक साल 2026 में 12 नहीं, बल्कि 13 महीने होंगे। 17 मई से 15 जून तक ज्येष्ठ अधिक मास रहेगा। जानें इसका धार्मिक महत्व और पौराणिक कथा।
2026: साल 2026 का हिंदू नववर्ष बेहद अनोखा होने वाला है। इस साल कैलेंडर में 12 नहीं, बल्कि 13 महीने होंगे। पंचांग के मुताबिक, इस बार ज्येष्ठ का महीना दो बार आएगा।
17 मई से ज्येष्ठ अधिक मास शुरू हो जाएगा जो 15 जून तक रहेगा। दरअसल खगोलीय गणना के कारण यह अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। ऐसा सौर और चंद्र वर्ष को मिलाने के लिए किया जाता है।
हर तीन साल में यह अद्भुत संयोग बनता है और इसे भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना जाता है। इसे पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जानते हैं। यह समय भक्ति और साधना के लिए उत्तम है। इस महीने दान-पुण्य करने से बहुत लाभ मिलता है।
![Hindu Nav Varsh 2026: शुरू होने वाला हिंदू नव वर्ष, जानें तारीख और क्यों इस बार होगा 12 की जगह 13 महीनों का साल? - hindu nav varsh 2026 is about to begin know date and why this time the year will have 13 months instead of 12 | Moneycontrol Hindi]()
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का माना जाता है। वहीं सौर वर्ष में करीब 365 दिन होते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो शास्त्रों के मुताबिक, चंद्र वर्ष चंद्रमा की गति (354 दिन) पर आधारित होता है, जबकि सौर वर्ष सूर्य की परिक्रमा (365 दिन) पर।
इस तरह दोनों के बीच हर साल 11 दिन का अंतर आता है। तीन साल में यह अंतर 33 दिनों का हो जाता है। इस तरह एक अतिरिक्त महीना मिल जाता है, जो अधिक मास कहलाता है। आपको अंग्रेजी वर्ष को लीप ईयर तो याद ही होगा, जहां हर चौथे साल की फरवरी 29 दिन की होती है।
इसी तरह अधिकमास को ज्योतिष विज्ञान में बहुत सटीक गणना माना गया है। इससे ऋतुओं और त्योहारों का तालमेल बना रहता है। हिंदू नववर्ष 2026 में भी इसी कारण ज्येष्ठ महीना दोबारा आएगा।
![Adhik Maas 2026: 12 नहीं 13 महीने का होगा नववर्ष 2083! जानें क्या है इसके पीछे का विशेष कारण - adhik maas 2026 date know why this year for 13 months jyeshtha maas significance tvisg - AajTak]()
इसी अधिक मास (Hindu New Year) को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह पूरा महीना भगवान विष्णु को समर्पित रहता है। पौराणिक कथा के मुताबिक इसका संबंध हिरण्य कश्यप से है। हिरण्य कश्यप को अमर होने का अहंकार हो गया था। उसे ब्रह्मा जी से बहुत कठिन वरदान मिला था।
वह साल के 12 महीनों में कभी नहीं मर सकता था। तब विष्णु जी ने इस अतिरिक्त महीने का निर्माण किया। उन्होंने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्य कश्यप का अंत किया था। विद्वानों के मुताबिक, यह समय आत्मिक शुद्धि का है। पौराणिक कथाएं
इस दौरान अधिक मास महात्म्य का पाठ करना चाहिए। लोग इस महीने में जप, तप और हवन करते हैं। यह समय सांसारिक मोह से दूर रहने का है।
भगवान विष्णु की पूजा से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। भक्त इस समय गीता और धार्मिक ग्रंथों को पढ़ते हैं। साधना के लिए यह महीना बहुत ही श्रेष्ठ है। आध्यात्मिक उन्नति के लिए यह वरदान माना जाता है।
![adhik maas 2026 malmas dates significance 13 month hindu calendar what to do not do vishnu worship spiritual month 2026 में लगेगा अधिक मास, नया साल होगा 13 महीनों का, जानें क्या करें और क्या न करें, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan]()
![Adhik Maas 2026: 12 नहीं 13 महीने को होगा नया साल, बनेंगे ये दुर्लभ संयोग, बिगाड़ेगा]()
इससे घर की दरिद्रता हमेशा के लिए खत्म होती है। भगवान विष्णु (श्रीमद्भागवत गीता) को पीले फल अर्पित करना शुभ है। तुलसी की माला से जाप करना बहुत फलदायी है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से मानसिक शांति मिलती है। यह समय खुद को सुधारने का अच्छा मौका है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
साल 2026 में बन रहा अधिकमास का दुर्लभ संयोग, जानें क्यों आता है अधिक मास?
राधा-कृष्ण के प्रेम का प्रतीक फुलेरा दूज, फूलों की होली से जुड़ी है अनोखी कथा
चंद्र ग्रहण के कारण इस बार बदलेगी रंगों वाली होली की तारीख, जानें सूतक काल का सही समय
पूजा की थाली से लेकर मन की शांति तक, जानें कपूर जलाने के फायदे
17 मई से ज्येष्ठ अधिक मास शुरू हो जाएगा जो 15 जून तक रहेगा। दरअसल खगोलीय गणना के कारण यह अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। ऐसा सौर और चंद्र वर्ष को मिलाने के लिए किया जाता है।
हर तीन साल में यह अद्भुत संयोग बनता है और इसे भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना जाता है। इसे पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जानते हैं। यह समय भक्ति और साधना के लिए उत्तम है। इस महीने दान-पुण्य करने से बहुत लाभ मिलता है।
Hindu Nav Varsh 2026: शुरू होने वाला हिंदू नव वर्ष, जानें तारीख और क्यों इस बार होगा 12 की जगह 13 महीनों का साल? - hindu nav varsh 2026 is about to begin know date and why this time the year will have 13 months instead of 12 | Moneycontrol Hindi
कैसे होती है अधिक मास की गणना
इस तरह दोनों के बीच हर साल 11 दिन का अंतर आता है। तीन साल में यह अंतर 33 दिनों का हो जाता है। इस तरह एक अतिरिक्त महीना मिल जाता है, जो अधिक मास कहलाता है। आपको अंग्रेजी वर्ष को लीप ईयर तो याद ही होगा, जहां हर चौथे साल की फरवरी 29 दिन की होती है।
इसी तरह अधिकमास को ज्योतिष विज्ञान में बहुत सटीक गणना माना गया है। इससे ऋतुओं और त्योहारों का तालमेल बना रहता है। हिंदू नववर्ष 2026 में भी इसी कारण ज्येष्ठ महीना दोबारा आएगा।
Adhik Maas 2026: 12 नहीं 13 महीने का होगा नववर्ष 2083! जानें क्या है इसके पीछे का विशेष कारण - adhik maas 2026 date know why this year for 13 months jyeshtha maas significance tvisg - AajTak
पुरुषोत्तम मास और भगवान विष्णु की कथा
वह साल के 12 महीनों में कभी नहीं मर सकता था। तब विष्णु जी ने इस अतिरिक्त महीने का निर्माण किया। उन्होंने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्य कश्यप का अंत किया था। विद्वानों के मुताबिक, यह समय आत्मिक शुद्धि का है। पौराणिक कथाएं
इस दौरान अधिक मास महात्म्य का पाठ करना चाहिए। लोग इस महीने में जप, तप और हवन करते हैं। यह समय सांसारिक मोह से दूर रहने का है।
भगवान विष्णु की पूजा से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। भक्त इस समय गीता और धार्मिक ग्रंथों को पढ़ते हैं। साधना के लिए यह महीना बहुत ही श्रेष्ठ है। आध्यात्मिक उन्नति के लिए यह वरदान माना जाता है।
adhik maas 2026 malmas dates significance 13 month hindu calendar what to do not do vishnu worship spiritual month 2026 में लगेगा अधिक मास, नया साल होगा 13 महीनों का, जानें क्या करें और क्या न करें, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
अधिक मास में क्या करें
- भगवान विष्णु की विशेष पूजा करें:
इस पूरे महीने 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र जपें। विष्णु जी की भक्ति से सुख-शांति मिलती है। - दान और सेवा कार्य करें:
गरीबों को अन्न और वस्त्र का दान दें। जरूरतमंदों की मदद करना बहुत फलदायी होता है। - धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें:
श्रीमद्भागवत कथा और गीता का पाठ जरूर करें। अधिक मास महात्म्य सुनना भी शुभ होता है। - दीपदान की परंपरा निभाएं:
शाम को मंदिर या तुलसी के पास दीपक जलाएं। इससे घर की दरिद्रता दूर हो जाती है। - सात्विक जीवनशैली अपनाएं:
इस दौरान सात्विक भोजन और शुद्ध विचार रखें। यह समय आत्मिक शुद्धि के लिए उत्तम है।
Adhik Maas 2026: 12 नहीं 13 महीने को होगा नया साल, बनेंगे ये दुर्लभ संयोग, बिगाड़ेगा
अधिक मास में क्या न करें
- विवाह और सगाई न करें:
इस महीने शादी-ब्याह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित हैं। ग्रहों की स्थिति इसके लिए शुभ नहीं होती। - मुंडन और जनेऊ संस्कार टालें:
बच्चों का मुंडन या जनेऊ संस्कार न करें। ये संस्कार शुभ मुहूर्त में ही करने चाहिए। - नया व्यापार शुरू न करें:
नए बिजनेस या दुकान की शुरुआत न करें। अधिक मास में निवेश करना शुभ नहीं मानते। - गृह प्रवेश या नया निर्माण:
नए घर में प्रवेश या नींव न रखें। इस समय को केवल भक्ति के लिए रखें। - तामसिक भोजन और बुराई से बचें:
मांस-मदिरा और नशीली चीजों का सेवन न करें। किसी की निंदा या बुराई करने से बचें।
इससे घर की दरिद्रता हमेशा के लिए खत्म होती है। भगवान विष्णु (श्रीमद्भागवत गीता) को पीले फल अर्पित करना शुभ है। तुलसी की माला से जाप करना बहुत फलदायी है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से मानसिक शांति मिलती है। यह समय खुद को सुधारने का अच्छा मौका है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
- साल 2026 में अधिक मास कब से कब तक रहेगा?
साल 2026 में ज्येष्ठ अधिक मास 17 मई से शुरू होगा। इसका समापन 15 जून को होगा। इस दौरान ज्येष्ठ महीना दो बार आएगा। - अधिक मास को पुरुषोत्तम मास क्यों कहा जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान विष्णु ने इस महीने को अपना नाम दिया है। इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है और वे इसके स्वामी हैं। - अधिक मास में कौन से मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए?
इस महीने में विवाह, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश और नए व्यापार की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। - क्या अधिक मास में व्रत रखना जरूरी है?
यह आपकी श्रद्धा पर निर्भर करता है। इस महीने में एक समय भोजन या फलाहार का व्रत रखना बहुत शुभ माना जाता है। - क्या इस दौरान जन्मदिन या सालगिरह मना सकते हैं?
हां, जन्मदिन या सालगिरह जैसे नियमित उत्सव मना सकते हैं। लेकिन धार्मिक संस्कार और नए बड़े काम वर्जित होते हैं।
साल 2026 में बन रहा अधिकमास का दुर्लभ संयोग, जानें क्यों आता है अधिक मास?
राधा-कृष्ण के प्रेम का प्रतीक फुलेरा दूज, फूलों की होली से जुड़ी है अनोखी कथा
चंद्र ग्रहण के कारण इस बार बदलेगी रंगों वाली होली की तारीख, जानें सूतक काल का सही समय
पूजा की थाली से लेकर मन की शांति तक, जानें कपूर जलाने के फायदे
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman