CBSE ने किया बड़ा बदलाव, 6th से 8th तक कौशल शिक्षा अनिवार्य, अब करके सीखेंगे बच्चे

Anjali Dwivedi | Nov 29, 2025, 20:28 IST
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CBSE ने नई शिक्षा नीति के तहत कक्षा 6 से 8 तक कौशल शिक्षा अनिवार्य कर दी है। अब बच्चे पौधों की देखभाल और मशीनों की समझ सीखेंगे। अगले सत्र (2025-26) से यह व्यवस्था लागू होगी। हर साल 90 घंटे का व्यावहारिक कार्य होगा।

CBSE ने एक बहुत बड़ा और अच्छा फैसला लिया है। New education policy 2020 के तहत यह निर्णय लिया गया है। कक्षा 6 से 8 तक के सभी स्टूडेंट्स के लिए कौशल शिक्षा (Skill Education) जरूरी कर दी गई है।

सिर्फ परीक्षा नहीं, अब काम भी सीखेंगे

स्कूलों में पढ़ाई अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। बच्चे अब वास्तविक जीवन से जुड़ी चीजें सीखेंगे। वे पौधों की देखभाल करना सीखेंगे। उन्हें मशीनों की बुनियादी समझ होगी। उन्हें सेवा कार्यों जैसी गतिविधियां भी सिखाई जाएंगी। इसका उद्देश्य है 'करके सीखना', केवल 'पढ़कर याद करना' अब मुख्य फोकस नहीं है।



मुख्य विषय के रूप में लागू

CBSE ने सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिए हैं। कौशल आधारित शिक्षा अब वैकल्पिक नहीं होगी। इसे मुख्य विषय के रूप में लागू करना है-

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत यह बदलाव है।
  • NCERT की कौशल बोध श्रृंखला की नई किताबें आएंगी।
  • ये किताबें अगले सत्र (2025–26) से हर स्कूल में होंगी।
  • पुस्तकें डिजिटल और प्रिंट दोनों रूपों में उपलब्ध होंगी।

कौशल की तीन कैटेगरीज हैं

नए ढांचे के अनुसार, स्टूडेंट्स को तीन तरह के कामों से जोड़ा जाएगा।

  1. जीवित प्राणियों के साथ काम: इसमें पौधों और पालतू जानवरों की देखभाल शामिल है।
  2. मशीनों और सामग्री से जुड़ा काम: उपकरणों, साधनों और तकनीक की बुनियादी समझ होगी।
  3. मानवीय सेवाएं: इसमें सामाजिक सहयोग और सेवा-भाव से जुड़े काम सिखाए जाएंगे।
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हर साल तीन प्रोजेक्ट

यह एक प्रोजेक्ट आधारित व्यवस्था होगी।

  • छठी से आठवीं तक तीन वर्षों में कुल नौ प्रोजेक्ट पूरे करने होंगे।
  • हर साल बच्चों को तीन प्रोजेक्ट पर काम करना है।
  • बच्चे लगभग 90 घंटे व्यावहारिक कार्य करेंगे।
  • तीन साल में कुल 270 घंटे वास्तविक कार्य का लक्ष्य है।
  • उद्देश्य है कि वे 'क्या किया' और 'कैसे सीखा' इस पर आगे बढ़ें।

स्कूल के टाइम-टेबल में बदलाव

स्कूलों को अपनी समयसारणी में बड़े बदलाव करने होंगे।

  • हर साल 110 घंटे सिर्फ कौशल शिक्षा के लिए होंगे।
  • यह लगभग 160 पीरियड के बराबर है।
  • सप्ताह में दो दिन लगातार दो पीरियड इसी विषय के लिए तय होंगे।
  • किताब में छह प्रोजेक्ट दिए गए हैं।
  • स्कूल अपने स्थानीय जरूरत के हिसाब से तीन प्रोजेक्ट चुन सकेंगे।

नई व्यवस्था कब से लागू होगी?

CBSE ने इस बारे में जानकारी साफ कर दी है। कौशल शिक्षा का यह नया ढांचा इसी सत्र (2025-26) से लागू होगा। यह अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा। स्कूलों को जरूरी संसाधन जुटाने हैं। उन्हें प्रशिक्षित शिक्षक और प्रोजेक्ट आधारित व्यवस्था बनानी है।

शिक्षकों को मिलेगी ट्रेनिंग

कौशल शिक्षा को सफल बनाने की पूरी तैयारी है। CBSE, NCERT और PSSIVE मिलकर काम करेंगे। वे व्यापक शिक्षक प्रशिक्षण अभियान चलाएंगे। ट्रेनिंग के बाद शिक्षक प्रोजेक्ट आधारित अध्ययन करेंगे। वे गतिविधि निर्माण और मूल्यांकन की नई पद्धति अपनाएंगे।

वार्षिक कौशल मेला

हर ऐकडेमिक ईयर के अंत में "कौशल मेला" होगा। स्कूलों में इसका आयोजन किया जाएगा। विद्यार्थी अपने प्रोजेक्ट, मॉडल और अनुभव दिखाएंगे। अभिभावकों को भी इससे मदद मिलेगी। वे समझेंगे कि बच्चे किताबों से बाहर क्या सीख रहे हैं।

इवैल्यूएशन प्रोसेस भी बदली

कौशल शिक्षा की आकलन प्रक्रिया भी बदल जाएगी।

  • लिखित परीक्षा के 10% अंक जुड़ेंगे।
  • मौखिक परीक्षा के 30% अंक होंगे।
  • गतिविधि पुस्तक के 30% अंक होंगे।
  • पोर्टफोलियो के 10% अंक जुड़ेंगे।
  • शिक्षक मूल्यांकन के 20% अंक भी शामिल होंगे।
यह शिक्षा में व्यावहारिक सोच लाने की पहल है।

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