ऑपरेशन की रात रची साजिश... नक्सलियों को पता था फोर्स का सीक्रेट प्लान
Kanak Durga Jha | Jan 07, 2025, 10:27 IST
bijapur IED bomb blast naxals preplaned to kill force
Bijapur IED Bomb Blast: 2025 की पहली सप्ताह ही दिल दहला देने वाली होगी ऐसा किसी ने नहीं सोचा होगा लेकिन, बस्तर में हुए धमाके ने सभी को झकझोंर कर रख दिया।
2025 की पहली सप्ताह ही दिल दहला देने वाली होगी ऐसा किसी ने नहीं सोचा होगा लेकिन, बस्तर में हुए धमाके ने सभी को झकझोंर कर रख दिया। 6 जनवरी का दिन किसी से भुलाया नहीं जाएगा। 8 जवान समेत एक ड्राइवर की शहादत के लिए न जवान तैयार थे न ही छत्तीसगढ़ लेकिन, आतंक का दृश्य एक बार फिर से बीजापुर में देखने को मिला। बीजापुर में हुए धमाके के कुछ अहम पहलु सामने आए हैं, जो की चौंकाने वाले हैं।
नक्सलियों ने किया प्रेशर IED ब्लास्ट, फोर्स ने 3 आतंकी मार गिराए
जवानों ने 3 जनवरी से ही दंतेवाड़ा, जगदलपुर, नारायणपुर समेत 4 जिलों में बड़ा ऑपरेशन किया था। इस सर्च ऑपरेशन में 1 हजार जवान शामिल थे। इस दौरान जवानों ने 5 नक्सलियों को मार गिराया था। इसका बदला नक्सलियों ने आईईडी बम ब्लास्ट से लिया। इस धमाके में 8 जवान समेत एक ड्राइवर की जान चली गई। धमाका इतना भयावह था कि, शव चीथड़ों में मिले, 30 फ़ीट ऊपर तक बॉडी उड़ी, जमीन में 10 फीट का गड्डा हो गया, और गाड़ी के एक हिस्सा 25 से 30 फीट ऊपर एक पेड़ पर लटका मिला। इस वारदात को अंजाम देने के लिए नक्सलियों ने पहले से ही साड़ी तैयारियां कर ली थी।
नक्सलियों को मालुम था कि जवान उसी रास्ते से गुजरेंगे। 5 नक्सलियों के मारे जाने वाली रात में ही नक्सलियों ने बड़ा धमाका करने के लिए षड्यंत्र तैयार कर लिया था। नक्सली यह जानते थे कि जवानों की गाड़ी कुटरू और बेदरे कैंप वाले रास्ते से ही गुजरेगी। अपने नापाक षड्यंत्र को आखरी अंजाम देने के लिए नक्सलियों ने रास्ते में आईईडी प्लांट किया और खुद भी सड़क के नीचे सुरंग खोदकर एम्बुंस में थे।
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जवानों की जान लेने के नक्सलियों ने 20 या 25 नहीं बल्कि, 50 किलो का हैवी हैवी आईईडी बम सड़क के अंदर प्लांट किया था। जवान सड़क के दोनों तरफ नजदीक में ही खड़े थे। जबकि सड़क से करीब 300 से 400 मीटर अंदर नक्सली पहले से ही एंबुश लगाकर बैठे थे। लेकिन उन्होंने धमाके से पहले फोर्स पर फायरिंग नहीं कि, क्योंकि उनका टारगेट सिर्फ फोर्स से भरी हुई गाड़ी थी।
जिस जगह धमाका हुआ वहां एनकाउंटर से लौट रहे साथियों को निकालने के लिए पहले से ही आरओपी (रोड ओपनिंग पार्टी) लगी हुई थी। आरओपी ड्यूटी पर लगे जवानों का ध्यान भटकाने के लिए नक्सलियों ने कुछ ही दूरी पर झाड़ियों के सहारे छिपकर धड़ाधड़ फायरिंग शुरू कर दी। यह हमला नक्सलियों ने ब्लास्ट हमले को अंजाम देने के लिए किया था।
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गोलियां चलने से ड्यूटी पर तैनात जवान नक्सलियों के हमले का जवाब देने में लग गए तभी नक्सलियों ने धमाका कर दिया। धमाका इतना जोरदार था कि गाड़ी के परखच्चे और जवानों के चिथड़े उड़ गए। ड्राइवर के शरीर के इतने टुकड़े हुए की उसका शव ढूंढ पाना भी मुश्किल था। घटना स्थल से करीब 500 मीटर के दायरे में शव और गाड़ी के पार्ट्स फेंका गए। नदी में भी शव के टुकड़े गिरे, जिसे जवानों ने निकाला।
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नक्सलियों को पता था जवान रास्ता बदलकर जाएंगे
नक्सलियों को मालुम था कि जवान उसी रास्ते से गुजरेंगे। 5 नक्सलियों के मारे जाने वाली रात में ही नक्सलियों ने बड़ा धमाका करने के लिए षड्यंत्र तैयार कर लिया था। नक्सली यह जानते थे कि जवानों की गाड़ी कुटरू और बेदरे कैंप वाले रास्ते से ही गुजरेगी। अपने नापाक षड्यंत्र को आखरी अंजाम देने के लिए नक्सलियों ने रास्ते में आईईडी प्लांट किया और खुद भी सड़क के नीचे सुरंग खोदकर एम्बुंस में थे।
IED ब्लास्ट में 9 जवान शहीद, ऑपरेशन से लौट रही थी फोर्स
50 किलो का था हैवी आईईडी बम
ROP ड्यूटी पर तैनात थे जवान
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गोलियां चलने से ड्यूटी पर तैनात जवान नक्सलियों के हमले का जवाब देने में लग गए तभी नक्सलियों ने धमाका कर दिया। धमाका इतना जोरदार था कि गाड़ी के परखच्चे और जवानों के चिथड़े उड़ गए। ड्राइवर के शरीर के इतने टुकड़े हुए की उसका शव ढूंढ पाना भी मुश्किल था। घटना स्थल से करीब 500 मीटर के दायरे में शव और गाड़ी के पार्ट्स फेंका गए। नदी में भी शव के टुकड़े गिरे, जिसे जवानों ने निकाला।
FAQ
- बीजापुर धमाके की घटना क्या थी और इसमें कौन-कौन प्रभावित हुए?
6 जनवरी को बस्तर क्षेत्र के बीजापुर में नक्सलियों ने आईईडी धमाका किया, जिसमें दंतेवाड़ा DRG के 8 जवान और एक ड्राइवर शहीद हो गए। धमाका इतना शक्तिशाली था कि गाड़ी के परखच्चे उड़ गए, शव 30 फीट ऊपर तक फेंके गए, और सड़क पर 10 फीट गहरा गड्ढा बन गया। - नक्सलियों ने हमला कैसे और क्यों किया?
जवानों ने 3 जनवरी से चल रहे सर्च ऑपरेशन में 5 नक्सलियों को मार गिराया था। बदला लेने के लिए नक्सलियों ने षड्यंत्र रचा। उन्हें पता था कि जवान उसी रास्ते से लौटेंगे। उन्होंने सड़क में आईईडी प्लांट किया और खुद सुरंग में छिपकर फायरिंग की। फायरिंग का उद्देश्य जवानों का ध्यान भटकाना था, जिसके बाद उन्होंने ब्लास्ट कर दिया। - जवानों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम थे?
घटना स्थल पर जवानों की सुरक्षा के लिए आरओपी ड्यूटी पर जवान तैनात थे। लेकिन नक्सलियों ने झाड़ियों से फायरिंग कर उनका ध्यान भटकाया। इसी दौरान नक्सलियों ने आईईडी धमाके को अंजाम दिया। धमाके और फायरिंग के कारण जवानों की सुरक्षा में भारी नुकसान हुआ।
पत्रकार मुकेश चंद्राकर के सिर पर 15 फ्रैक्चर, लिवर के 4 टुकड़े
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