मेडिकल खरीद घोटाला: EOW के बाद ED केस में भी मिली बेल, बाहर आएगा शशांक चोपड़ा
VINAY VERMA | May 12, 2026, 19:12 IST
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CGMSC घोटाला मामले में मुख्य आरोपी शशांक चोपड़ा को हाईकोर्ट ने नियमित जमानत दे दी है। आरोपी जनवरी 2025 से जेल में बंद था। अदालत ने ट्रायल लंबा चलने और आरोपी की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए राहत दी।
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGMSC घोटाला मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड से जुड़े कथित करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल मोक्षित कॉरपोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। ED द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग केस में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शशांक चोपड़ा को नियमित जमानत दे दी है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने यह राहत प्रदान की है।
सुनवाई के दौरान शशांक चोपड़ा की ओर से कई अहम तर्क रखे गए। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी जनवरी 2025 से लगातार जेल में बंद है। इसके साथ ही उसकी खराब स्वास्थ्य स्थिति, पूर्व में किसी भी आपराधिक रिकॉर्ड का नहीं होना और जांच पूरी हो जाने जैसे तथ्यों का हवाला दिया गया। दूसरी ओर ED ने जमानत का विरोध करते हुए मामले को गंभीर आर्थिक अपराध बताया, लेकिन अदालत ने माना कि PMLA के तहत जांच पूरी हो चुकी है और अभियोजन शिकायत भी दाखिल की जा चुकी है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले का ट्रायल लंबा चल सकता है और ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना न्यायोचित नहीं होगा। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने शशांक चोपड़ा को नियमित जमानत देने का आदेश जारी किया।
इस मामले में यह पहला मौका नहीं है जब शशांक चोपड़ा को न्यायालय से राहत मिली हो। इससे पहले CGMSC घोटाले से जुड़े मूल केस, जिसे ACB/EOW ने दर्ज किया था, उसमें सुप्रीम कोर्ट पहले ही जमानत दे चुका है। अब ED के मनी लॉन्ड्रिंग केस में भी राहत मिलने के बाद शशांक चोपड़ा का जेल से बाहर आना लगभग तय माना जा रहा है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि दोनों प्रमुख मामलों में बेल मिलने से आरोपी पक्ष को बड़ी राहत मिली है। हालांकि जमानत मिलने का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है और मामले की सुनवाई अभी जारी रहेगी।
CGMSC घोटाला छत्तीसगढ़ में सरकारी मेडिकल उपकरणों और रीएजेंट्स की खरीद से जुड़ा कथित करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार का मामला है। आरोप है कि कुछ निजी कंपनियों, सप्लायर्स और अधिकारियों ने मिलकर टेंडर प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी की। जांच एजेंसियों के मुताबिक मेडिकल उपकरण और जांच सामग्री बाजार मूल्य से कई गुना ज्यादा कीमत पर खरीदी गई, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ।
मामले में यह भी आरोप लगे कि टेंडर प्रक्रिया को खास कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए प्रभावित किया गया। कई फर्मों के बीच सांठगांठ और अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। इसी मामले में ACB/EOW ने भ्रष्टाचार और आपराधिक षड्यंत्र के तहत केस दर्ज किया था, जबकि ED ने मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच शुरू की।
CGMSC घोटाले की जांच फिलहाल दो स्तर पर चल रही है। ACB/EOW भ्रष्टाचार, नियम विरुद्ध खरीद और सरकारी नुकसान के पहलुओं की जांच कर रही है, जबकि ED यह पता लगाने में जुटी है कि कथित घोटाले से अर्जित रकम को किस तरह इस्तेमाल या ट्रांसफर किया गया। जांच एजेंसियों ने कई दस्तावेज, बैंक लेनदेन और कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड खंगाले हैं।
सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। कई अधिकारियों और कारोबारी समूहों की भूमिका अभी भी जांच के घेरे में बताई जा रही है।
शशांक चोपड़ा को फिलहाल जमानत मिल गई है, लेकिन CGMSC घोटाले की कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। अदालत में ट्रायल जारी रहेगा और जांच एजेंसियां अपने सबूत पेश करेंगी। अब सबसे बड़ी नजर इस बात पर रहेगी कि अदालत अंतिम सुनवाई में क्या फैसला सुनाती है और जांच एजेंसियां इस कथित मेडिकल खरीद घोटाले में किन-किन लोगों की भूमिका तय करती हैं।
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411 करोड़ का CGMSC घोटाला... हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
हाईकोर्ट ने किन आधारों पर दी राहत:
कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले का ट्रायल लंबा चल सकता है और ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना न्यायोचित नहीं होगा। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने शशांक चोपड़ा को नियमित जमानत देने का आदेश जारी किया।
सुप्रीम कोर्ट से पहले ही मिल चुकी थी राहत:
कानूनी जानकारों का मानना है कि दोनों प्रमुख मामलों में बेल मिलने से आरोपी पक्ष को बड़ी राहत मिली है। हालांकि जमानत मिलने का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है और मामले की सुनवाई अभी जारी रहेगी।
क्या है CGMSC घोटाला?
मामले में यह भी आरोप लगे कि टेंडर प्रक्रिया को खास कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए प्रभावित किया गया। कई फर्मों के बीच सांठगांठ और अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। इसी मामले में ACB/EOW ने भ्रष्टाचार और आपराधिक षड्यंत्र के तहत केस दर्ज किया था, जबकि ED ने मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच शुरू की।
ED और EOW दोनों कर रहे जांच:
सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। कई अधिकारियों और कारोबारी समूहों की भूमिका अभी भी जांच के घेरे में बताई जा रही है।
अब आगे क्या होगा:
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