छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला: पहली शादी से जन्मे बच्चों को ही मिलेगा हक

thesootr Desk | Jan 15, 2026, 17:10 IST
Share
Chhattisgarh High Court On Second Marriage
Chhattisgarh High Court On Second Marriage

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक पहली शादी का कानूनी रूप से तलाक नहीं होता, तब तक दूसरी शादी वैध नहीं मान सकते। ऐसे में पहली शादी से जन्मे बच्चों को ही अधिकार मिलेंगे।

News In Short

  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही माना
  • पहली शादी के रहते जन्मे बच्चों को ही पिता की वैध संतान माना जाएगा।
  • बिना तलाक दूसरी शादी या संबंध को कानून मान्यता नहीं देता।
  • बच्चों की पहचान और अधिकार कानून के आधार पर तय होंगे।
  • मामला बिलासपुर और मुंगेली जिले से जुड़ा था।

News In Detail

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पारिवारिक कानून से जुड़े एक अहम मामले में साफ कर दिया है कि शादी और बच्चों की पहचान भावनाओं या दावों से नहीं, बल्कि कानून से तय होती है। कोर्ट ने कहा कि अगर पहली शादी कानूनी रूप से खत्म नहीं हुई है, तो उस दौरान या बाद में की गई दूसरी शादी को कानून नहीं मानता।

अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे हालात में बच्चों की पहचान और उनके अधिकार उसी शादी से जुड़े माने जाएंगे, जो कानून के हिसाब से वैध है। यानी पहली शादी के दौरान जन्मे बच्चे ही कानूनी तौर पर मान्य होंगे।

क्या था मामला

यह मामला बिलासपुर और मुंगेली इलाके से जुड़ा हुआ था। इसमें दो महिलाओं ने अदालत में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि उनकी मां एक कारोबारी की वैध पत्नी थीं और इसलिए उन्हें उसकी संतान के रूप में कानूनी अधिकार मिलने चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की थी कि अदालत उनकी मां को उस कारोबारी की कानूनी पत्नी घोषित करे।

फैमिली कोर्ट ने क्या कहा

फैमिली कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान सभी दस्तावेज, गवाहों के बयान और अन्य सबूतों की जांच की। जांच के बाद कोर्ट इस नतीजे पर पहुंची कि महिला की पहली शादी कभी कानूनी रूप से खत्म ही नहीं हुई थी। इसी आधार पर फैमिली कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और कहा कि कानून के अनुसार पहली शादी के दौरान जन्मे बच्चों को ही वैध संतान माना जा सकता है।

हाईकोर्ट में अपील और अंतिम फैसला

फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई। हाईकोर्ट ने पूरे मामले की दोबारा समीक्षा की और पाया कि निचली अदालत का फैसला कानून के अनुसार सही है।

हाईकोर्ट ने अपील खारिज करते हुए दो टूक कहा कि पहली शादी के रहते किया गया दूसरा विवाह या कोई अन्य संबंध कानून की नजर में मौजूद ही नहीं माना जा सकता।

कानून क्या कहता है

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कानून की स्थिति को भी आसान शब्दों में स्पष्ट किया

  • हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत बिना वैध तलाक दूसरी शादी को मान्यता नहीं मिलती
  • भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 112 के अनुसार वैध विवाह से जन्मे बच्चों को कानून पूरी सुरक्षा देता है।
इन कानूनों के रहते किसी के व्यक्तिगत दावे से बच्चों की पहचान या अधिकार नहीं बदले जा सकते।

बच्चों के अधिकारों पर साफ संदेश

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला अधिकारों को लेकर पूरी तरह स्पष्ट संदेश देता है। अदालत ने कहा कि बच्चों की पहचान भावनात्मक रिश्तों से नहीं, बल्कि कानून की ठोस व्यवस्था से तय होगी। पहली शादी से जन्मे बच्चों के अधिकारों पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता और उन्हें पूरा कानूनी संरक्षण मिलेगा।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह फैसला सिर्फ एक पारिवारिक विवाद का समाधान नहीं है, बल्कि यह भी बताता है कि कानून निजी रिश्तों से ऊपर होता है। शादी की वैधता और बच्चों की पहचान को लेकर अदालत ने बिल्कुल साफ और निर्णायक बात कही है। यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक मिसाल बनेगा और बच्चों के कानूनी अधिकारों को मजबूती देगा।

Tags:
  • छत्तीसगढ़
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला
  • फैमिली कोर्ट
  • तलाक
  • दूसरी शादी
  • हिंदू विवाह अधिनियम
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

By Neel Tiwari

20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

By Jitendra Shrivastava

भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच