Chhattisgarh के एक और बड़े घोटाले को जांच सकती है CBI या ED , जानें पूरा मामला
Vikram Jain | Jun 03, 2024, 18:17 IST
Chhattisgarh rice scam investigation Amarjeet Bhagat
छत्तीसगढ़ में राशन घोटाले के मामले में भूपेश सरकार में खाद्य मंत्री रहे अमरजीत भगत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आरोप है कि पीडीएस में नियमों की अनदेखी कर घोटाला किया गया। अब मामले में सीबीआई या ईडी जांच कर सकती है।
शिव शंकर सारथी@ RAIPUR. भूपेश सरकार में खाद्य मंत्री रहे अमरजीत भगत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 6 अरब का चावल घोटाले के मामले में विधानसभा में सवाल लगने के बाद जांच की घोषणा कर दी गई थी। जांच की घोषणा के बाद समिति का गठन हुआ और अब जांच के बिन्दुओं को तय करने के लिए फिर एक बैठक होनी है। समिति को विधानसभा का सचिवालय जरुरी जानकारियों उपलब्ध करवाएगा। इन जानकारियों समिति के समय की बचत होगी। ऐसे में जांच जल्द पूरी हो इसकी भी संभावना है।
तत्कालीन मंत्री अमरजीत भगत के कार्यकाल में PDS (Public distribute system ) में नियमों की अनदेखी कर 6 अरब का राशन घोटाला किया गया ऐसे आरोप हैं। the sootr की पड़ताल कहती है कि 6 अरब के कथित घोटाले की जांच केंद्रीय एजेंसी को दी जा सकती है। यह एजेंसी सीबीआई या प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों में से कोई भी हो सकती है। दस करोड़ से ज्यादा के मामलों में प्रवर्तन निदेशालय खुद ही एक्शन ले सकती है, प्रवर्तन निदेशालय के असीमित अधिकारों में दो अहम अधिकार ये है कि ईडी के आरोपी को अपनी बेगुनाही अदालत के समक्ष खुद (अधिवक्ता) ही साबित करनी होती है, 2- ईडी के आरोपी को एक साल तक भी जमानत नहीं मिले यह भी कानूनी प्रावधानों में है।
6 अरब का चावल घोटाला कोरोना काल में कांग्रेस सरकार के समय का है। इस दौरान पूर्व मंत्री राजेश मूणत तब सोशल मीडिया के जरिए आक्रमक अंदाज में तत्कालीन मुख्यमंत्री को कठघरे में खड़ा रखने मौकों से चूकते नहीं थे। घोटाला के समय में आरोप सोशल मीडिया तक सीमित रहे,लेकिन सरकार बदल गई और अब विधानसभा में सवाल लग जाने की वजह से घोषणा कर दी गई है। 6 अरब का यह कथित घोटाला प्रधानमंत्री खाद्य सुरक्षा योजना के चावल को खुले बाजार में बेचकर किया गया है।
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इस मामले में सौम्या चौरसिया, आईएएस अनिल टुटेजा, निरंजन दास, और खाद्य संचालनालय के बड़े बड़े चुनिंदा अधिकारी आरोपी है। आरोप है यह चावल खुले बाजार में बेचा गया और मामला सामने आने के बाद वापस गोदामों में चावल रखने की कोशिशे हुईं। राशन दुकानों को हितग्राहियों की संख्या के आधार पर राशन दिया जाता है। यह कथित घोटाला करने के लिए राज्य के तेरह हजार राशन दुकानों में दो तीन साल तक वितरित हो सकने लायक चावल वितरित कर दिया गया।
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नियमों की अनदेखी कर घोटाला
तत्कालीन मंत्री अमरजीत भगत के कार्यकाल में PDS (Public distribute system ) में नियमों की अनदेखी कर 6 अरब का राशन घोटाला किया गया ऐसे आरोप हैं। the sootr की पड़ताल कहती है कि 6 अरब के कथित घोटाले की जांच केंद्रीय एजेंसी को दी जा सकती है। यह एजेंसी सीबीआई या प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों में से कोई भी हो सकती है। दस करोड़ से ज्यादा के मामलों में प्रवर्तन निदेशालय खुद ही एक्शन ले सकती है, प्रवर्तन निदेशालय के असीमित अधिकारों में दो अहम अधिकार ये है कि ईडी के आरोपी को अपनी बेगुनाही अदालत के समक्ष खुद (अधिवक्ता) ही साबित करनी होती है, 2- ईडी के आरोपी को एक साल तक भी जमानत नहीं मिले यह भी कानूनी प्रावधानों में है।
घोटाला कब का, विष्णु देव सरकार गंभीर क्यों ?
6 अरब का चावल घोटाला कोरोना काल में कांग्रेस सरकार के समय का है। इस दौरान पूर्व मंत्री राजेश मूणत तब सोशल मीडिया के जरिए आक्रमक अंदाज में तत्कालीन मुख्यमंत्री को कठघरे में खड़ा रखने मौकों से चूकते नहीं थे। घोटाला के समय में आरोप सोशल मीडिया तक सीमित रहे,लेकिन सरकार बदल गई और अब विधानसभा में सवाल लग जाने की वजह से घोषणा कर दी गई है। 6 अरब का यह कथित घोटाला प्रधानमंत्री खाद्य सुरक्षा योजना के चावल को खुले बाजार में बेचकर किया गया है।
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घोटाले में कौन- कौन शामिल
इस मामले में सौम्या चौरसिया, आईएएस अनिल टुटेजा, निरंजन दास, और खाद्य संचालनालय के बड़े बड़े चुनिंदा अधिकारी आरोपी है। आरोप है यह चावल खुले बाजार में बेचा गया और मामला सामने आने के बाद वापस गोदामों में चावल रखने की कोशिशे हुईं। राशन दुकानों को हितग्राहियों की संख्या के आधार पर राशन दिया जाता है। यह कथित घोटाला करने के लिए राज्य के तेरह हजार राशन दुकानों में दो तीन साल तक वितरित हो सकने लायक चावल वितरित कर दिया गया।
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