डिप्टी कलेक्टर ने ससुराल की जमीन को बताया भारतमाला प्रोजेक्ट का हिस्सा
Arun Tiwari | May 21, 2026, 14:15 IST
Deputy Collector Claims In-Laws Land Bharatmala Projec
छत्तीसगढ़ के भारतमाला प्रोजेक्ट में डिप्टी कलेक्टर विभोर अग्रवाल द्वारा ससुराल की अप्रभावित जमीन और बिल्डरों द्वारा फर्जी किसान व झूठी फसलें दिखाकर करीब 12 करोड़ का मुआवजा घोटाला उजागर हुआ है।
RAIPUR : छत्तीसगढ़ में भारतमाला प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार की माला बन गया। नेताओं से लेकर अधिकारी और बिल्डरों ने जमकर माल कमाया। अब इसकी परतें खुल रही हैं तो नए नए नाम सामने आ रहे हैं। जांच रिपोर्ट के मुताबिक धमतरी जिले के डिप्टी कलेक्टर विभोर अग्रवाल ने अपने दामाद का फर्ज खूब निभाया।
विभोर अग्रवाल ने अपने ससुराल वालों को भ्रष्टाचार में भाव विभोर कर दिया। ससुराल पक्ष की जो जमीन इस प्रोजेक्ट में नहीं आ रही थी उसको भारतमाला का हिस्सा बताकर मुआवजा दिलवा दिया। इतना ही नहीं एक बिल्डर आरजीएस कोलोनाइजर के तीन डायरेक्टर्स ने फर्जी किसान बनकर सरकार को 12 करोड़ का चूना लगा दिया।
छत्तीसगढ़ में भारतमाला प्रोजेक्ट अब भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरता जा रहा है। जांच में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। नेताओं,अफसरों और बिल्डरों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये के मुआवजे के खेल का पर्दाफाश हो रहा है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक धमतरी जिले में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर विभोर अग्रवाल पर गंभीर आरोप लगे हैं। बताया गया है कि उन्होंने अपने ससुराल पक्ष की उस जमीन को भी भारतमाला परियोजना का हिस्सा बता दिया, जो वास्तव में प्रोजेक्ट की जद में आती ही नहीं थी।
ऐसा सिर्फ मुआवजा दिलाने के लिए किया गया। भारतमाला सड़क परियोजना के तहत धमतरी जिले के ग्राम राजपुर के खसरा नंबर 1167 और 1168 सड़क निर्माण से प्रभावित नहीं हुए थे। यह सड़क राजपुर में सरकारी जमीन के खसरा नंबर 1164 और 1166 में बनाई गई है। डिप्टी कलेक्टर विभोर अग्रवाल ने अपने ससुराल की जमीन खसरा नंबर 1167 को भी सड़क से प्रभावित बताया। रिपोर्ट में लिखा है कि लोकसेवकों और क्षेत्र के भूमाफियाओं ने जानबूझकर मुआवजा लेने के मकसद से यह काम किया। हालांकि प्रशासनिक अधिकारी और उनके ससुराल पक्ष से जुड़े करीबी लोगों का कहना है कि जब अवार्ड हुआ उस समय विभोर अग्रवाल धमतरी में पोस्टेड नहीं थे। न उन्होंने इस तरह का कोई काम किया है। ससुराल पक्ष के लोगों ने भी यह मुआवजा नहीं लिया है।
सुनील कुमार अग्रवाल, विभोर अग्रवाल का ससुराल पक्ष,खसरा नंबर 1167/4
सुनील कुमार अग्रवाल, विभोर अग्रवाल का ससुराल पक्ष,खसरा नंबर 1167/5
मुआवजा लिया 4 लाख 40 हजार रुपए
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि आरजीएस कोलोनाइजर के तीन डायरेक्टर्स ने फर्जी किसान बनकर सरकार से करीब 12 करोड़ रुपये का मुआवजा हासिल कर लिया। जांच एजेंसियों को संदेह है कि जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में बड़े स्तर पर फर्जी दस्तावेजों और प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। आरजीएस कॉलोनाइजर प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर बसंत कुमार जैन, देवेंद्र मध्यानी और भूपेंद्र चंद्राकर पर मुआवजा घोटाले में गंभीर आरोप लगे हैं।
आरोप है कि मुआवजा वितरण सूची में तीनों को अलग-अलग खातेदार और किसान के रूप में दर्शाया गया, जबकि वे एक ही फर्म के डायरेक्टर हैं। जांच में यह भी सामने आया कि फर्म के डायरेक्टर बसंत कुमार जैन ने अपनी जमीन अपनी ही कंपनी के सदस्यों, डायरेक्टरों और परिवार के लोगों के नाम पर बेच दी। इसके बाद इन्हें अलग-अलग भूमिधारक बताकर मुआवजा ले लिया। इस तरह राजनांदगांव के ग्राम देवादा में आरजीएस कॉलोनाइजर के डायरेक्टर बसंत जैन, देवेंद्र मध्यानी और भूपेंद्र चंद्राकर ने कुछ समय के लिए खुद को, अपने परिजनों और करीबी लोगों को किसान बताकर शासन को करीब 12 करोड़ 35 लाख 99 हजार 102 रुपये से अधिक का चूना लगाया।
नान घोटाले के आरोपी रोशन चंद्राकर ने खसरा नंबर 130/02 की करीब 5,200 वर्गफीट जमीन पर 149 पेड़ दर्शाकर 19 लाख 29 हजार 153 रुपए का मुआवजा प्राप्त किया। जांच में सामने आया कि 24 फरवरी 2018 को हुई रजिस्ट्री में विक्रेता आरजीएस कॉलोनाइजर के डायरेक्टर बसंत कुमार और खरीदार रोशन चंद्राकर थे। रजिस्ट्री के समय शपथ पत्र में इस जमीन पर कोई पेड़ नहीं था। इसके बावजूद बाद में उसी जमीन पर 149 पेड़ दिखाकर मुआवजा ले लिया गया।
बिना पानी के उग गया
आरजीएस कॉलोनाइजर के डायरेक्टर बसंत कुमार पर आरोप है कि उन्होंने खसरा नंबर 131/10 की असिंचित जमीन में सोयाबीन फसल दिखाकर 27 लाख 19 हजार 87 रुपये से अधिक का मुआवजा लिया। वहीं खसरा नंबर 131/05 की असिंचित जमीन पर भी कागजों में सोयाबीन की फसल उगा दी गई। इस पर करीब 19 लाख 97 हजार 697 रुपये का मुआवजा लिया गया। फसल संबंधी गलत जानकारी देकर सरकार के धोखाधड़ी कर नियमों के खिलाफ मुआवजा हासिल किया।
भारतमाला परियोजना में सामने आ रहे इन खुलासों के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। अब पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों, बिल्डरों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। इतना तय है कि आने वाले समय में बड़े खुलासे होने वाले हैं।
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विभोर अग्रवाल ने अपने ससुराल वालों को भ्रष्टाचार में भाव विभोर कर दिया। ससुराल पक्ष की जो जमीन इस प्रोजेक्ट में नहीं आ रही थी उसको भारतमाला का हिस्सा बताकर मुआवजा दिलवा दिया। इतना ही नहीं एक बिल्डर आरजीएस कोलोनाइजर के तीन डायरेक्टर्स ने फर्जी किसान बनकर सरकार को 12 करोड़ का चूना लगा दिया।
भ्रष्टाचार में भाव विभोर :
ऐसा सिर्फ मुआवजा दिलाने के लिए किया गया। भारतमाला सड़क परियोजना के तहत धमतरी जिले के ग्राम राजपुर के खसरा नंबर 1167 और 1168 सड़क निर्माण से प्रभावित नहीं हुए थे। यह सड़क राजपुर में सरकारी जमीन के खसरा नंबर 1164 और 1166 में बनाई गई है। डिप्टी कलेक्टर विभोर अग्रवाल ने अपने ससुराल की जमीन खसरा नंबर 1167 को भी सड़क से प्रभावित बताया। रिपोर्ट में लिखा है कि लोकसेवकों और क्षेत्र के भूमाफियाओं ने जानबूझकर मुआवजा लेने के मकसद से यह काम किया। हालांकि प्रशासनिक अधिकारी और उनके ससुराल पक्ष से जुड़े करीबी लोगों का कहना है कि जब अवार्ड हुआ उस समय विभोर अग्रवाल धमतरी में पोस्टेड नहीं थे। न उन्होंने इस तरह का कोई काम किया है। ससुराल पक्ष के लोगों ने भी यह मुआवजा नहीं लिया है।
यह है विभोर अग्रवाल के ससुराल की जमीन :
सुनील कुमार अग्रवाल, विभोर अग्रवाल का ससुराल पक्ष,खसरा नंबर 1167/5
मुआवजा लिया 4 लाख 40 हजार रुपए
कॉलोनाइजर बने फर्जी किसान :
आरोप है कि मुआवजा वितरण सूची में तीनों को अलग-अलग खातेदार और किसान के रूप में दर्शाया गया, जबकि वे एक ही फर्म के डायरेक्टर हैं। जांच में यह भी सामने आया कि फर्म के डायरेक्टर बसंत कुमार जैन ने अपनी जमीन अपनी ही कंपनी के सदस्यों, डायरेक्टरों और परिवार के लोगों के नाम पर बेच दी। इसके बाद इन्हें अलग-अलग भूमिधारक बताकर मुआवजा ले लिया। इस तरह राजनांदगांव के ग्राम देवादा में आरजीएस कॉलोनाइजर के डायरेक्टर बसंत जैन, देवेंद्र मध्यानी और भूपेंद्र चंद्राकर ने कुछ समय के लिए खुद को, अपने परिजनों और करीबी लोगों को किसान बताकर शासन को करीब 12 करोड़ 35 लाख 99 हजार 102 रुपये से अधिक का चूना लगाया।
बंजर जमीन पर मुआवजे के पेड़ :
बिना पानी के उग गया सोयाबीन :
निष्कर्ष :
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