जल,जंगल,जमीन को बचाने एकजुट हुए आदिवासी, सरगुजा में हसदेव बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

Arun Tiwari | Jan 16, 2026, 16:50 IST
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छत्तीसगढ़ में जल जंगल जमीन को बचाने के लिए एक बार फिर आदिवासी वर्ग का आंदोलन तेज हो गया है। हसदेव बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने सरगुजा में बड़ी संख्या में एकजुट होकर उद्योगपतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।

NEWS IN SHORT

  • छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र में जल-जंगल-जमीन बचाने के लिए आदिवासियों का आंदोलन फिर तेज हो गया है।
  • कोयला, बॉक्साइट, लिथियम और ग्रेफाइट खनन परियोजनाओं से लाखों हेक्टेयर जंगल और नदियों पर संकट बढ़ रहा है।
  • खनन से जैव विविधता नष्ट हो रही है और मानव-हाथी संघर्ष में लगातार वृद्धि हो रही है।
  • आदिवासियों ने पेसा कानून और वनाधिकार कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
  • आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर खनन परियोजनाएं निरस्त करने की मांग की है।

NEWS IN DETAIL

Raipur. छत्तीसगढ़ में जल जंगल जमीन को बचाने के लिए एक बार फिर आदिवासी वर्ग का आंदोलन तेज हो गया है। हसदेव बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने सरगुजा में बड़ी संख्या में एकजुट होकर उद्योगपतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि जल - जंगल - जमीन पर आधारित कई पीढ़ियों से लोगों का जीवन यापन चल रहा है जिसे जबरन छीना जा रहा है।

वहां के लोगों को विस्थापित कर समुदाय की व्यवस्था , संस्कृति और परंपरा को ही नष्ट किया जा रहा है। सरगुजा संभाग की ही बात करें तो हसदेव, मैनपाट, सामरी पाट, ओड़गी, भैयाथान, सुरसा वाड्रफनगर, चलगली, तातापानी, आमगांव, अमेरा, प्रेमनगर, मदननगर जैसे क्षेत्रों पर खनन परियोजनाओं के कारण पर्यावरणीय क्षति का भारी संकट भोगना पड़ेगा।

कोरिया से लेकर रायगढ़ तक 50 से अधिक कोयला, बाक्साइट, लिथियम ग्रेफाइट खनन परियोजनाएं प्रस्तावित हैं जिसके कारण लाखों हेक्टेयर जंगल जमीन का विनाश होगा ।

कट रहे पेड़,सूख रही नदियां :

हसदेव बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ में जिस पैमाने पर खनन परियोजनाओं से जंगलों का विनाश हो रहा है उससे हमारी जीवनदायनी नदियाँ सूख रहीं हैं, जंगल समाप्त हो समाप्त हो रहे हैं, जैव विविधता और जीव - जन्तु विलुप्त होने की कगार पर है । जनजीवन प्रदूषण के दुष्प्रभाव और स्वास्थ संबंधी समस्याएं झेलने को मजबूर हैं।

जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में वृद्धि, भयानक तूफ़ान, बाढ़, सूखा, असमय वर्षा, अकाल जैसी गंभीर प्राकृतिक आपदाएं लगातार बढ़ रही हैं। संसद के इसी लोकसभा सत्र में एक रिपोर्ट प्रस्तुत हुई है जिसके अनुसार कोयला की धूल के कारण फेफड़े को गंभीर क्षति सहित कैंसर जैसी बीमारियां हो रही हैं।

जंगलों के विनाश से सिर्फ़ छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में महानदी, गोदावरी और गंगा बेसिन क्षेत्र को भारी जल संकट का सामना करना पड़ेगा । लगभग 12 नदियों के जल प्रवाह पर गंभीर विपरीत प्रभाव पड़ेंगे । हसदेव अरण्य का क्षेत्र जिसे छत्तीसगढ़ का फेफड़ा कहते हैं उसके विनाश से मिनीमाता हसदेव बांगो बांध के अस्तित्व पर संकट आ चुका है, मानव और हाथियों के बीच संघर्ष बढ़ रहा है। सैकड़ों लोग हाथी से कुचलकर मारे जा चुके हैं।

रामगढ़ पहाड़ पर संकट :

आदिवासियों का कहना है कि हसदेव अरण्य क्षेत्र की जैव विविधता का अध्ययन करने वाली केंद्र सरकार की संस्था “भारतीय वन्य जीव संस्थान” ने चेतावनी दी है कि हसदेव में खदान की अनुमति छत्तीसगढ़ में मानव हाथी संघर्ष को इतना ज़्यादा बढ़ा देगा कि फिर भविष्य में उसे कम नहीं किया जा सकेगा और एलिफेंट कॉरिडोर पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

छत्तीसगढ़ के सबसे प्राचीन और धार्मिक स्थल रामगढ़ पर भी संकट हैं। हसदेव अरण्य की खदानों में भयानक विस्फोट के कारण आस्था का केंद्र रामगढ़ पहाड़ में दरारें बन गईं हैं। नई केतें एक्सटेंशन कोयला परियोजना जिसमे लगभग 6 लाख से अधिक पेड़ों को काटा जाना है उसकी स्वीकृति से सम्पूर्ण रामगढ़ पहाड़ और प्राचीन नाट्यशाल सीता भेंगरा का भी अस्तित्व संकट में है।

राज्य सरकार एक तरफ़ आदिवासियों के अधिकारों के संरक्षण का दावा करती है दूसरी तरफ़ अदानी, जिंदल जैसे पूंजीपतियों के लाभ के लिए पेसा कानून,वनाधिकार मान्यता कानून और भूमि अधिग्रहण क़ानून का खुला उल्लंघन कर रही है। हसदेव अरण्य के आदिवासी 3 वर्षों तक विरोध में धरना पर बैठे रहे लेकिन ग्रामसभा का फर्जी आयोजन कराकर कंपनी को विधि विरुद्ध दी गई वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियां निरस्त नहीं की गईं।

छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जन जाति आयोग की जांच रिपोर्ट में साल्ही, हरिहरपुर, फतेहपुर और घाटबर्रा गाँव के ग्रामसभा प्रस्ताव फर्जी और कूटरचित पाए गए वाबजूद इसके वहाँ जबरन और ग्रामीणों का दमन करके पेड़ो को कटाई की जा रही है।

सीएम के नाम ज्ञापन में की गईं ये मांगें :

1. छत्तीसगढ़ विधानसभा का संकल्प और भारतीय वन्य जीव संस्थान की अनुशंसा का पालन करते हुए हसदेव अरण्य में नई केंते एक्सटेंसन कोल ब्लॉक को राज्य सरकार द्वारा जारी की गई वन एवं पर्यावरणीय अनुशंसा निरस्त की जाए।
2. छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जन जाति आयोग की अनुशंसा पर कार्यवाही करते हुए हसदेव के परसा कोयला खदान में पेड़ो की कटाई को रोका जाए एवं वन स्वीकृति निरस्त की जाए।
3. ग्रामसभा सहमति लिए बिना एसईसीएल की मदनपुर खुली खदान परियोजना एवं अमेरा विस्तार परियोजना की भूमि अधिग्रहण तत्काल निरस्त की जाए । ग्राम मदननगर में जबरन किए जा रहे भूमि सर्वेक्षण कार्य को बंद किया जाए।
4. बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर तहसील अंतर्गत ग्राम सुरसा, शारदापुर, बड़कगाँव, भगवानपुर, इंजानी, गिरवरगंज, बसेरा, मुरका कपिलदेव, शंकरपुर में जारी ग्रेफाइट सर्वेक्षण कार्य बंद किया जाए।
5. मैनपाट में बाक्साइट खनन परियोजना को निरस्त कर वहाँ की इकोलॉजी को संरक्षित करते हुए ईको टूरिज्म को बढ़ावा देकर स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर सृजन किए जाए।
6. खनन परियोजनाओं के शांतिपूर्ण विरोध को कुचलकर ग्रामीणों के ऊपर दर्ज किए गए फर्जी आपराधिक मुकद्दमे वापस लिए जाए।
7. पाँचवी अनुसूचित क्षेत्र में किसी भी परियोजना की स्वीकृति के पूर्व ग्रामसभाओं से पूर्व संसूचित सहमती के प्रावधान का कड़ाई से पालन किया जाए।
8. वनाधिकार मान्यता कानून का पालन करते हुए आदिवासियों और अन्य परम्परागत वन निवासियों को उनकी वन भूमि से बेदखली बंद की जाए।
9. वर्तमान में संचालित खनन परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण नियमों का कड़ाई के पालन किया जाए एवं सिर्फ़ स्थानीय युवाओं को ही स्थाई रोजगार दिया जाए।
10. ग्राम घाटबर्रा के ग्रामीणों की सहमति अनुरूप पुनर्वास बिना परसा ईस्ट केंते बासेन खनन परियोजना को आगे बढ़ने से रोका जाए।
11. व्यापक सड़क दुर्घटनाओं के मद्देनजर और लेमरू हाथी रिजर्व से हसदेव की खदानों से सड़क मार्ग से जारी कोयला परिवहन को तत्काल बंद किया जाए।
12. परसा पेड़ कटाई के दौरान लक्ष्मण गड़ निवासी मृतक कमलेश सिद्धार्थ को बैधानिक शासकीय मदत की जाए।
13. धनबाद भारत माला सड़क परियोजना में जशपुर जिला प्रभावित किसानों के लिए भूमि अधिग्रहण क़ानून 2013 के पुनर्वास नीति का पालन किया जाए।

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