हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, शादीशुदा बहन भी अनुकंपा नियुक्ति की हकदार, लेकिन...
Harrison Masih | Aug 06, 2026, 19:21 IST
अनुकंपा नियुक्ति पर फैसला
हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि अविवाहित सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसकी शादीशुदा बहन भी अनुकंपा नियुक्ति की हकदार हो सकती है। केवल वैवाहिक स्थिति के आधार पर किसी महिला को नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।
समझें क्या है पूरा मामला...
- हाईकोर्ट ने कहा- शादीशुदा बहन भी अनुकंपा नियुक्ति की हकदार हो सकती।
- सिर्फ वैवाहिक स्थिति के आधार पर नौकरी से इनकार करना उचित नहीं।
- कोर्ट ने राज्य सरकार का 2019 का आदेश रद्द कर दिया।
- सरकार को चार सप्ताह में नए सिरे से फैसला लेने का निर्देश मिला।
- फैसले में आर्थिक निर्भरता को वैवाहिक स्थिति से अधिक महत्वपूर्ण।
यह फैसला बिलासपुर के एक परिवार की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आया है। कोर्ट ने राज्य सरकार के पुराने आदेश को रद्द करते हुए नए सिरे से फैसला लेने का निर्देश दिया है।
यह फैसला अनुकंपा नियुक्ति नीति में लैंगिक समानता को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
क्या था पूरा मामला
दुर्गेश मिश्रा के निधन के बाद उनकी वृद्ध मां तारा मिश्रा ने राज्य शासन की अनुकंपा नीति के तहत अपनी बेटी अमिता दुबे यानी मृतक की बहन को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग करते हुए आवेदन दिया था।
सरकार ने खारिज किया था आवेदन
इसी आदेश के खिलाफ पीड़ित परिवार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
परिवार ने कोर्ट में दी यह दलील
परिवार के मुताबिक शासन की नीति में स्पष्ट उल्लेख है कि अविवाहित शासकीय सेवक के निधन पर माता-पिता की अनुशंसा पर उसके भाई-बहन को नियुक्ति दी जाएगी। उनका तर्क था कि जब विवाहित बेटे या भाई को अलग नहीं किया जाता, तो केवल शादीशुदा होने के आधार पर बहन के साथ भेद करना संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 15(1) का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट बोला, निर्भरता ही मुख्य मानदंड
कोर्ट के मुताबिक इसमें मुख्य मानदंड निर्भरता और आर्थिक जरूरत है, न कि वैवाहिक स्थिति। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान समाज में कई शादीशुदा बेटियां और बहनें अपने माता-पिता और परिवार का सहारा बनती हैं।
पुरानी धारणा को बताया रूढ़िवादी
यह टिप्पणी अनुकंपा से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकती है।
हाईकोर्ट ने रद्द किया सरकारी आदेश
साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि अनुकंपा नियुक्ति के मामले पर चार सप्ताह के भीतर नियमों के मुताबिक पुनर्विचार कर नया और सकारात्मक आदेश जारी किया जाए।
अब आगे क्या
आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार अपनी अनुकंपा नियुक्ति नीति में इस फैसले के मुताबिक कोई स्थायी बदलाव करती है या नहीं।
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