जमीन विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, तहसीलदार दस्तावेज के लिए नहीं कर सकता मजबूर
Harrison Masih | Jul 22, 2026, 18:37 IST
जमीन विवाद हाईकोर्ट का फैसला 2026
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जमीन विवाद मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि तहसीलदार किसी व्यक्ति को दस्तावेज पेश करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ लैंड रेवेन्यू कोड (CGLRC - Chhattisgarh Land Revenue Code) से जुड़े अधिकारों को लेकर हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। यह मामला राजस्व अधिकारियों की शक्तियों की सीमा से जुड़ा है।
कोर्ट के मुताबिक तहसीलदार ज्यादा से ज्यादा दस्तावेज न पेश करने पर किसी पक्ष के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाल सकता है। लेकिन किसी को दस्तावेज पेश करने के लिए मजबूर करने का उसे कोई अधिकार नहीं है।
क्या था पूरा विवाद
तहसीलदार के आदेश में याचिकाकर्ताओं को अपनी जमीन से जुड़ी ऋण पुस्तिका पेश करने का निर्देश दिया गया था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह आदेश प्रतिवादी नंबर तीन की अर्जी पर जारी किया गया था।
याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलील
दूसरी तरफ प्रतिवादियों ने विवादित आदेशों का समर्थन किया। उनका तर्क था कि तहसीलदार ने याचिकाकर्ताओं को ऋण पुस्तिका पेश करने का सही निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट ने बताया कोड के खिलाफ
कोर्ट ने कहा कि दस्तावेज पेश करने के लिए अलग से अर्जी देना और तहसीलदार का उसे मानकर आदेश जारी करना, छत्तीसगढ़ लैंड रेवेन्यू कोड के प्रावधानों के बिल्कुल विपरीत है। भले ही याचिकाकर्ताओं को दस्तावेज जमा करने के लिए कहा गया हो, तहसीलदार के पास निजी प्रतिवादी के कहने पर उन्हें मजबूर करने की कोई शक्ति नहीं थी।
कलेक्टर की भी मानी गई गलती
इसी आधार पर कोर्ट ने माना कि तहसीलदार ने 17 मार्च 2021 का आदेश जारी करके कानून के खिलाफ काम किया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि कलेक्टर ने उस गलत आदेश को सही ठहराकर खुद भी चूक की।
हाईकोर्ट ने दोनों आदेश किए रद्द
यह फैसला राजस्व अधिकारियों की शक्तियों की सीमा तय करने वाला माना जा रहा है। आने वाले समय में इसी तरह के मामलों में यह फैसला एक नजीर की तरह इस्तेमाल हो सकता है।
FAQ
- छत्तीसगढ़ लैंड रेवेन्यू कोड (CGLRC) क्या है?
छत्तीसगढ़ लैंड रेवेन्यू कोड (Chhattisgarh Land Revenue Code - CGLRC) राज्य का वह कानून है, जिसके तहत भूमि रिकॉर्ड, नामांतरण (Mutation), सीमांकन, बंटवारा, राजस्व वसूली और जमीन से जुड़े प्रशासनिक मामलों का संचालन किया जाता है। यह कानून तहसीलदार, एसडीएम और कलेक्टर जैसे राजस्व अधिकारियों के अधिकार और जिम्मेदारियां भी तय करता है। - क्या तहसीलदार जमीन के दस्तावेज मांग सकता है?
हां, लेकिन हर स्थिति में नहीं। यदि किसी राजस्व मामले की सुनवाई के दौरान कानून के तहत दस्तावेजों की आवश्यकता हो, तो तहसीलदार संबंधित पक्ष से दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कह सकता है। किसी निजी पक्ष के आवेदन पर तहसीलदार किसी व्यक्ति को दस्तावेज पेश करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।
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