कोरबा आदिवासी विकास विभाग में 3.83 करोड़ का घोटाला उजागर, फाइलें गायब, FIR दर्ज

Harrison Masih | Aug 16, 2025, 21:25 IST
Share
korba-tribal-development-department-scam-fake-tender-fir the sootr
korba-tribal-development-department-scam-fake-tender-fir the sootr

कोरबा में Tribal Development Department में करोड़ों के फर्जी टेंडर, अधूरे काम और गायब दस्तावेज़ों का बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे विभाग के अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत की ओर इशारा मिलता है।

Korba Tribal Department Scam: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में आदिवासी विकास विभाग (Tribal Development Department) में करोड़ों रूपए का बड़ा घोटाला सामने आया है। दो साल चली लंबी जांच के बाद अब एफआईआर दर्ज की गई है। यह पूरा मामला उन पैसों से जुड़ा है, जो केंद्र सरकार से अनुच्छेद 275 (1) के तहत वर्ष 2021-22 में मिले थे। इनका उपयोग छात्रावासों और आश्रमों की मरम्मत व नवीनीकरण पर होना था, लेकिन बड़ी अनियमितताएं सामने आईं।

ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ शराब घोटाला के आरोपी चैतन्य बघेल को बुखार, हाईकोर्ट ने जेल प्रशासन को दी चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने की हिदायत

फर्जी टेंडर और गायब दस्तावेज

जांच में खुलासा हुआ कि विभागीय कार्यालय से टेंडर, वर्क ऑर्डर, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका और बिल-वाउचर जैसे मूल दस्तावेज ही गायब हो गए। कई कामों का टेंडर जारी हुआ और करोड़ों रूपए का भुगतान भी कर दिया गया, लेकिन अधिकांश काम या तो अधूरे छोड़ दिए गए या शुरू ही नहीं हुए।

48 लाख की योजनाएं अटकी,80 लाख का फर्जी भुगतान

जांच रिपोर्ट के अनुसार, 48 लाख रूपए की चार योजनाएं अब तक शुरू ही नहीं हुईं। वहीं लगभग 80 लाख रूपए का फर्जी भुगतान ठेकेदार कंपनियों को कर दिया गया। कागजों में काम पूरे दिखाए गए, लेकिन जमीनी हकीकत में वे अधूरे पाए गए।
ये खबर भी पढ़ें... Chhattisgarh Liquor Scam | ईडी के सामने टूटे भूपेश बघेल के करीबी, खोल दिया सारा काला चिट्ठा !

चार कंपनियों को 34 टेंडर,3.83 करोड़ का घोटाला

करीब 3 करोड़ 83 लाख रूपए के 34 काम सिर्फ चार फर्मों को दिए गए। इनमें श्री साई ट्रेडर्स, श्री साई कृपा बिल्डर्स एसएसए कंस्ट्रक्शन, बालाजी इंफ्रास्ट्रक्चर कटघोरा शामिल थीं। ठेका देने के बाद भुगतान तो कर दिया गया, लेकिन विभागीय दफ्तर में एक भी मूल दस्तावेज नहीं मिला।

अफसरों की भूमिका संदिग्ध

जांच में तत्कालीन सहायक आयुक्त माया वारियर, एसडीओ अजीत टिग्गा और उप अभियंता राकेश वर्मा की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। मौजूदा कलेक्टर अजीत वसंत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोबारा जांच कराई। जब बड़े पैमाने पर गड़बड़ी साबित हुई तो कार्रवाई की सिफारिश की गई।

ये खबर भी पढ़ें... सहकारी बैंकों में 26 करोड़ का घोटाला, 11 कर्मचारी गिरफ्तार

FIR दर्ज, जांच तेज

कलेक्टर के निर्देश पर सहायक आयुक्त श्रीकांत केसरे ने विभागीय सचिव को पत्र भेजकर जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई की सिफारिश की है। साथ ही डेटा एंट्री ऑपरेटर कुश कुमार देवांगन और चारों फर्मों के खिलाफ पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।



क्या है कोरबा आदिवासी विकास विभाग घोटाला केस?

  • फर्जी टेंडर का खुलासा – करोड़ों रुपये के 34 काम सिर्फ 4 कंपनियों को बांटे गए, लेकिन ज्यादातर अधूरे या शुरू ही नहीं हुए।
  • गायब मूल दस्तावेज़ – टेंडर, वर्क ऑर्डर, तकनीकी स्वीकृति और बिल-वाउचर जैसे अहम कागज़ कार्यालय से गायब पाए गए।
  • फर्जी भुगतान का मामला – लगभग 80 लाख रुपये का भुगतान उन कामों के लिए कर दिया गया जो कागजों पर पूरे दिखाए गए, लेकिन ज़मीन पर नहीं हुए।
  • अफसरों की संदिग्ध भूमिका – तत्कालीन सहायक आयुक्त, एसडीओ और उप अभियंता की संलिप्तता जांच में सामने आई।
  • एफआईआर दर्ज – चारों कंपनियों और संबंधित अफसरों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई, जांच और कार्रवाई तेज़।


ये खबर भी पढ़ें... जिला सहकारी बैंक में 28 करोड़ का घोटाला, अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार

इससे पहले कई कलेक्टर बदलने के कारण मामला दबा दिया गया था। लेकिन अब नए कलेक्टर ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए जांच को आगे बढ़ाया और एफआईआर दर्ज कराई।

यह मामला सिर्फ फर्जी भुगतान और दस्तावेजों की हेराफेरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत के गहरे संकेत मिल रहे हैं।

FAQ

  1. कोरबा के आदिवासी विभाग घोटाले में क्या खुलासा हुआ?
    इस घोटाले में करोड़ों रुपये के फर्जी टेंडर जारी किए गए, भुगतान भी हो गया लेकिन काम अधूरे या शुरू ही नहीं हुए। साथ ही, विभागीय कार्यालय से मूल दस्तावेज गायब मिले।
  2. कोरबा आदिवासी विभाग घोटाले में किन अफसरों की भूमिका संदिग्ध पाई गई?
    जांच में तत्कालीन सहायक आयुक्त माया वारियर, एसडीओ अजीत टिग्गा और उप अभियंता राकेश वर्मा की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
  3. कोरबा घोटाले में कितने रुपये का फर्जी भुगतान हुआ है?
    करीब 80 लाख रुपये का भुगतान उन योजनाओं के लिए कर दिया गया जो अधूरी या शुरू ही नहीं हुई थीं। वहीं 3.83 करोड़ रुपये के 34 टेंडर चार कंपनियों को बांटे गए थे।

thesootr links

दसूत्र की खबरें आपको कैसी लगती हैं? Google my Business पर हमें कमेंट केसाथ रिव्यू दें। कमेंट करने के लिए इसी लिंक पर क्लिक करें

अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬👩‍👦👨‍👩‍👧‍👧

Tags:
  • कोरबा आदिवासी विकास विभाग
  • आदिवासी विकास विभाग घोटाला
  • 3.83 करोड़ का घोटाला
  • Korba Tribal Department Scam
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

By Jitendra Shrivastava

भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज

By Sanjay Dhiman

UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज