गुणकारी हल्दी गोरा नहीं बीमार भी बनाती है, खेत में नहीं बाजार में मिल रहा सीसा
Arun Tiwari | Aug 03, 2026, 17:42 IST
हल्दी में घुल रहा सीसा
टॉक्सिक्स लिंक की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि खेतों की हल्दी सुरक्षित है, लेकिन बाजार तक पहुंचने के दौरान उसमें सीसा मिल सकता है। चमक बढ़ाने के लिए की जाने वाली मिलावट बच्चों और सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
Raipur : भारतीय रसोई की शान हल्दी सिर्फ गोरा ही नहीं बनाती बल्कि एंटीसेप्टिक भी मानी जाती है। लेकिन अब हल्दी बीमार बना रही है। इसमें बड़ी मात्रा में सीसा मिलाया जा रहा है जिससे ये और चमकदार नजर आती है। यह सीसा बच्चों के मानसिक विकास में सबसे ज्यादा खतरनाक है।
हैरान करने वाली बात यह है कि हल्दी खेतों में बिल्कुल सुरक्षित है। लेकिन जब यह खेतों से बाजार पहुंचती है तो यह हानिकारक हो जाती है। सब गड़बड़ बीच की सप्लाई चैन में होता है। पर्यावरण संस्था टॉक्सिक्स लिंक की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। यह रिपोर्ट मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों से लिए गए हल्दी के नमूनों की जांच पर तैयार की गई है।
भारतीय रसोई का खास मसाला हल्दी खेती के दौरान नहीं, बल्कि बाजार तक पहुंचने की प्रक्रिया में सीसे (लेड) से दूषित हो रही है। पर्यावरण संस्था टॉक्सिक्स लिंक की नई रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि खेतों से सीधे लिए गए कच्ची हल्दी के नमूनों में सीसे की मात्रा सुरक्षित सीमा के भीतर पाई गई। इससे साफ संकेत मिलता है कि हल्दी में मिलावट या प्रदूषण कटाई के बाद की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, भंडारण या सप्लाई चेन के किसी चरण में हो रही है।
टॉक्सिक्स लिंक ने अपनी रिपोर्ट लेड इन टर्मरिक के तहत महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक और मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ के खेतों से कच्ची हल्दी के 13 नमूने एकत्र कर उनकी जांच कराई। सभी नमूनों का परीक्षण एनएबीएल लैब में हुआ। इनमें लेड की मात्रा बहुत कम थी। सबसे अधिक स्तर 1.87 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। यह भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा निर्धारित 10 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम की अधिकतम सीमा से काफी कम है।
रिपोर्ट बताती है कि खेती के दौरान हल्दी में सीसे की समस्या नहीं है। ऐसे में बाजार में मिलने वाली हल्दी में अधिक सीसा पाए जाने के पीछे कटाई के बाद की प्रक्रियाएं जिम्मेदार हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ मामलों में हल्दी का रंग अधिक आकर्षक और चमकीला दिखाने के लिए सीसा क्रोमेट जैसे खतरनाक रसायनों की मिलावट की जाती है जिससे उसमें सीसे का स्तर बढ़ जाता है।
टाक्सिक्स लिंक ने कहा है कि अब जांच का दायरा केवल खेती तक सीमित रखने के बजाय पूरी सप्लाई चेन पर केंद्रित किया जाना चाहिए। इसमें प्रसंस्करण इकाइयों, पैकेजिंग केंद्रों, भंडारण व्यवस्था और बाजार में बिकने वाले तैयार उत्पादों की नियमित निगरानी शामिल होनी चाहिए।
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि सीसा एक बेहद विषैला तत्व है, जिसका सबसे अधिक असर बच्चों पर पड़ता है। इसके संपर्क में आने से बच्चों के मस्तिष्क का विकास प्रभावित हो सकता है, सीखने की क्षमता कमजोर हो सकती है और व्यवहार संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा लंबे समय तक सीसे के संपर्क में रहने से किडनी, हृदय और प्रजनन स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
चूंकि भारत में हल्दी का उपयोग लगभग हर घर में प्रतिदिन होता है, इसलिए इसमें होने वाली किसी भी प्रकार की मिलावट करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इसी को देखते हुए रिपोर्ट में एफएसएसएआई और राज्य खाद्य सुरक्षा विभागों से मसालों की नियमित जांच बढ़ाने, बाजार में उपलब्ध हल्दी की सघन निगरानी करने और मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की सिफारिश की गई है।
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हैरान करने वाली बात यह है कि हल्दी खेतों में बिल्कुल सुरक्षित है। लेकिन जब यह खेतों से बाजार पहुंचती है तो यह हानिकारक हो जाती है। सब गड़बड़ बीच की सप्लाई चैन में होता है। पर्यावरण संस्था टॉक्सिक्स लिंक की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। यह रिपोर्ट मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों से लिए गए हल्दी के नमूनों की जांच पर तैयार की गई है।
हल्दी में मिलाया जा रहा सीसा
टॉक्सिक्स लिंक ने अपनी रिपोर्ट लेड इन टर्मरिक के तहत महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक और मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ के खेतों से कच्ची हल्दी के 13 नमूने एकत्र कर उनकी जांच कराई। सभी नमूनों का परीक्षण एनएबीएल लैब में हुआ। इनमें लेड की मात्रा बहुत कम थी। सबसे अधिक स्तर 1.87 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। यह भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा निर्धारित 10 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम की अधिकतम सीमा से काफी कम है।
बाजार में मिल रही मिलावटी हल्दी
टाक्सिक्स लिंक ने कहा है कि अब जांच का दायरा केवल खेती तक सीमित रखने के बजाय पूरी सप्लाई चेन पर केंद्रित किया जाना चाहिए। इसमें प्रसंस्करण इकाइयों, पैकेजिंग केंद्रों, भंडारण व्यवस्था और बाजार में बिकने वाले तैयार उत्पादों की नियमित निगरानी शामिल होनी चाहिए।
सीसे से क्या नुकसान
चूंकि भारत में हल्दी का उपयोग लगभग हर घर में प्रतिदिन होता है, इसलिए इसमें होने वाली किसी भी प्रकार की मिलावट करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इसी को देखते हुए रिपोर्ट में एफएसएसएआई और राज्य खाद्य सुरक्षा विभागों से मसालों की नियमित जांच बढ़ाने, बाजार में उपलब्ध हल्दी की सघन निगरानी करने और मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की सिफारिश की गई है।
FAQ
- क्या खेत में उगाई गई हल्दी में सीसा पाया गया है?
नहीं, टॉक्सिक्स लिंक की रिपोर्ट के अनुसार खेतों से लिए गए कच्ची हल्दी के नमूनों में सीसे की मात्रा सुरक्षित सीमा के अंदर मिली है। - हल्दी में सीसा कैसे पहुंच रहा है?
रिपोर्ट के मुताबिक मिलावट या प्रदूषण कटाई के बाद प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, भंडारण या सप्लाई चेन के दौरान हो सकता है। - सीसा मिली हल्दी से क्या नुकसान हो सकता है?
सीसे के संपर्क से बच्चों के मानसिक विकास, सीखने की क्षमता और व्यवहार पर असर पड़ सकता है। लंबे समय में किडनी और हृदय पर भी खतरा बढ़ सकता है।
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