नकटी गांव पर कांग्रेस ने बनाई जांच रिपोर्ट, जनता के सामने सच का खुलासा
Arun Tiwari | Jul 07, 2026, 12:36 IST
नक्ती-बुलडोज़र-कार्रवाई-कांग्रेस-रिपोर्ट
रायपुर के नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई पर कांग्रेस अपनी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करेगी। 85 परिवारों के प्रभावित होने और कानूनी अनदेखी का आरोप लगाते हुए कांग्रेस 10 जुलाई को राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेगी।
RAIPUR : रायपुर नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सियासत लगातार तेज होती जा रही है। इस मुद्दे पर कांग्रेस अपनी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करेगी। पार्टी का दावा है कि रिपोर्ट में प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो प्रभावित परिवारों के साथ हुई अन्यायपूर्ण कार्रवाई की ओर इशारा करते हैं। रिपोर्ट जारी होने के बाद कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल 10 जुलाई को राज्यपाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपेगा और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग करेगा।
कांग्रेस ने नकटी मामले की जांच के लिए विशेष समिति गठित की थी। समिति ने गांव पहुंचकर प्रभावित परिवारों से बातचीत की, घटनास्थल का निरीक्षण किया और उपलब्ध दस्तावेजों का अध्ययन किया। पार्टी का कहना है कि जांच रिपोर्ट इन्हीं तथ्यों के आधार पर तैयार की गई है। कांग्रेस का आरोप है कि प्रशासन ने कार्रवाई के दौरान मानवीय पहलुओं की अनदेखी की और प्रभावित लोगों को पर्याप्त अवसर दिए बिना उनके मकानों और दुकानों को ध्वस्त कर दिया।
पार्टी के अनुसार, इस कार्रवाई से करीब 85 परिवार सीधे प्रभावित हुए हैं। इनमें कई ऐसे परिवार भी शामिल हैं जो वर्षों से वहां रह रहे थे और स्थानीय स्तर पर आवश्यक दस्तावेज भी रखते थे। कांग्रेस का कहना है कि इन परिवारों की बात सुने बिना उनके आशियानों पर बुलडोजर चलाया गया, जिससे वे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए।
कांग्रेस का आरोप है कि प्रशासन ने पूरी कार्रवाई में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। पार्टी का कहना है कि प्रभावित लोगों को पर्याप्त समय और वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराए बिना कार्रवाई की गई। कांग्रेस इसे केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं, बल्कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के अधिकारों से जुड़ा मामला बता रही है।
जांच रिपोर्ट जारी होने के बाद कांग्रेस इसे व्यापक जनहित का मुद्दा बनाते हुए राज्यपाल के समक्ष भी उठाएगी। पार्टी का प्रतिनिधिमंडल 10 जुलाई को राजभवन पहुंचकर राज्यपाल को विस्तृत ज्ञापन सौंपेगा। ज्ञापन में कार्रवाई की न्यायिक या निष्पक्ष जांच कराने, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, आर्थिक मुआवजा देने और कथित रूप से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिला तो पार्टी इस मुद्दे पर प्रदेशभर में आंदोलन तेज करेगी। उनका दावा है कि नकटी की घटना केवल एक गांव का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता और नागरिक अधिकारों से जुड़ा बड़ा प्रश्न है।
दूसरी ओर प्रशासन का पक्ष है कि नकटी में सरकारी जमीन से अवैध कब्जे हटाने के लिए नियमानुसार कार्रवाई की गई। प्रशासन का कहना है कि अभियान का उद्देश्य सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना था और पूरी प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के तहत पूरी की गई। हालांकि कांग्रेस इन दावों से सहमत नहीं है और अपनी जांच रिपोर्ट के जरिए प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाने की तैयारी में है।
नकटी बुलडोजर कार्रवाई अब प्रदेश की प्रमुख राजनीतिक बहस बन चुकी है। एक ओर सरकार इसे कानून के पालन की कार्रवाई बता रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस इसे गरीब परिवारों के साथ अन्याय करार दे रही है। ऐसे में आज जारी होने वाली जांच रिपोर्ट और 10 जुलाई को राज्यपाल से होने वाली मुलाकात पर राजनीतिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और अधिक गर्मा सकती है तथा यह मामला सड़क से लेकर विधानसभा तक गूंजने की संभावना रखता है।
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कांग्रेस की जांच रिपोर्ट:
85 परिवार प्रभावित:
कानून का पालन नहीं:
राज्यपाल से गुहार:
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिला तो पार्टी इस मुद्दे पर प्रदेशभर में आंदोलन तेज करेगी। उनका दावा है कि नकटी की घटना केवल एक गांव का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता और नागरिक अधिकारों से जुड़ा बड़ा प्रश्न है।
प्रशासन की सफाई:
निष्कर्ष:
FAQ
- नकटी में बुलडोजर कार्रवाई से कितने परिवार प्रभावित हुए?
उत्तर: कांग्रेस के दावे के मुताबिक करीब 85 परिवार प्रभावित हुए हैं। इनमें कई परिवार वर्षों से वहां रह रहे थे। पार्टी ने इस पर जांच रिपोर्ट तैयार की है। - फैक्ट फाइंडिंग कमेटी क्या होती है?
उत्तर: यह किसी घटना की निष्पक्ष जांच के लिए बनाई गई विशेष समिति होती है। यह घटनास्थल का दौरा कर तथ्य इकट्ठा करती है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होती है। - सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया क्या होती है?
उत्तर: आमतौर पर पहले नोटिस देकर अतिक्रमणकारियों को हटने का समय दिया जाता है। इसके बाद ही प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है। बिना नोटिस या समय दिए की गई कार्रवाई को अवैध माना जा सकता है।
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