नकटी पर बीजेपी दो फाड़, बुलडोजर कार्रवाई पर सत्ता संगठन में रार
Arun Tiwari | Jul 02, 2026, 12:26 IST
नकटी पर बीजेपी की राजनीति 2026
रायपुर के समीप नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने के लिए हुई बुलडोजर कार्रवाई अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। इस मामले को लेकर बीजेपी के भीतर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। पार्टी संगठन सार्वजनिक रूप से चुप्पी साधे हुए है।
Raipur. राजधानी रायपुर के समीप नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने के लिए हुई बुलडोजर कार्रवाई अब राजनीतिक मुद्दा बन गई है। इस मामले में बीजेपी के दो धड़े नजर आ रहे हैं। पार्टी संगठन के अंदर विरोध के सुर उठ रहे हैं लेकिन बाहर सभी ने चुप्पी साध रखी है।
बुलडोजर कार्रवाई पर सत्ता और संगठन के अलग अलग सुर हैं। कांग्रेस के विधायकों के नकटी में घर न लेने से बीजेपी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कांग्रेस इस मामले को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है। वहीं बीजेपी पूरे विवाद से दूरी बनाए हुए दिखाई दी है।
पार्टी के अधिकांश वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों ने अब तक इस विषय पर सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है।
सूत्रों का कहना है कि पार्टी का स्पष्ट मत है कि नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी तरह प्रशासन और राज्य सरकार का विषय है। संगठन इसमें सीधे हस्तक्षेप नहीं करेगा।
पार्टी नेताओं का तर्क है कि सरकार कानून और नियमों के तहत निर्णय लेती है, जबकि संगठन का काम राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों को मजबूत करना है।
इसी कारण संगठन स्तर पर इस मामले पर किसी तरह की आधिकारिक टिप्पणी से बचा जा रहा है। जानकारी के अनुसार बीजेपी के प्रवक्ताओं, मीडिया पैनलिस्टों और प्रदेश पदाधिकारियों के बीच भी इस विषय पर अब तक कोई विस्तृत चर्चा नहीं हुई है।
पार्टी की नियमित वर्चुअल बैठकों में विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर बातचीत होती है और प्रवक्ताओं को सरकार का पक्ष रखने के लिए आवश्यक बिंदु उपलब्ध कराए जाते हैं। हालांकि, नकटी गांव की कार्रवाई को लेकर अब तक कोई विशेष रणनीति या निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। यही वजह है कि अधिकांश नेता इस विषय पर सार्वजनिक बयान देने से बच रहे हैं।
बीजेपी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि सरकार और संगठन की भूमिकाएं अलग-अलग हैं। सरकार प्रशासनिक निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है, जबकि संगठन का दायित्व पार्टी का विस्तार, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और राजनीतिक गतिविधियों का संचालन करना है। ऐसे में प्रशासनिक कार्रवाई पर संगठन का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप उचित नहीं माना जा रहा है।
सूत्र बताते हैं कि पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व भी राज्य सरकार के कामकाज पर लगातार नजर रखता है। यदि किसी मामले में आवश्यकता महसूस होती है तो संगठन सरकार से जानकारी मांग सकता है या रिपोर्ट तलब कर सकता है। लेकिन फिलहाल नकटी गांव की कार्रवाई को लेकर ऐसा कोई संकेत सामने नहीं आया है।
इस बीच बीजेपी के पूर्व विधायक ने इस पूरे मामले में अपनी राय रखी है। वे लगातार प्रभावित ग्रामीणों के पक्ष में आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर कहा है कि जिन परिवारों को हटाया गया है, उनके हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
उनका कहना है कि यदि जमीन को लेकर कोई विवाद है तो उसका समाधान कानून और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों के अनुसार विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण नहीं किया जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए वे लगातार प्रयासरत हैं और इस विषय को संबंधित मंचों पर उठाते रहेंगे। उनके इस रुख को लेकर बीजेपी के भीतर भी चर्चा तेज हो गई है, हालांकि पार्टी संगठन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नकटी गांव का मामला अब केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है। कांग्रेस इसे गरीबों के अधिकारों और विस्थापन का मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, जबकि बीजेपी संगठन फिलहाल सरकार और संगठन की अलग-अलग जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए दूरी बनाए रखने की रणनीति पर चलता दिखाई दे रहा है।
आने वाले दिनों में यदि यह मामला और अधिक राजनीतिक या कानूनी रूप लेता है, तो बीजेपी संगठन को भी अपना स्पष्ट रुख सामने रखना पड़ सकता है। फिलहाल पार्टी नेतृत्व की नजर पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है, लेकिन सार्वजनिक तौर पर संगठन ने इस विवाद से दूरी बनाए रखने की नीति अपनाई हुई है।
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बुलडोजर कार्रवाई पर सत्ता और संगठन के अलग अलग सुर हैं। कांग्रेस के विधायकों के नकटी में घर न लेने से बीजेपी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कांग्रेस इस मामले को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है। वहीं बीजेपी पूरे विवाद से दूरी बनाए हुए दिखाई दी है।
पार्टी के अधिकांश वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों ने अब तक इस विषय पर सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है।
सरकार पर डाली जिम्मेदारी:
पार्टी नेताओं का तर्क है कि सरकार कानून और नियमों के तहत निर्णय लेती है, जबकि संगठन का काम राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों को मजबूत करना है।
इसी कारण संगठन स्तर पर इस मामले पर किसी तरह की आधिकारिक टिप्पणी से बचा जा रहा है। जानकारी के अनुसार बीजेपी के प्रवक्ताओं, मीडिया पैनलिस्टों और प्रदेश पदाधिकारियों के बीच भी इस विषय पर अब तक कोई विस्तृत चर्चा नहीं हुई है।
पार्टी की नियमित वर्चुअल बैठकों में विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर बातचीत होती है और प्रवक्ताओं को सरकार का पक्ष रखने के लिए आवश्यक बिंदु उपलब्ध कराए जाते हैं। हालांकि, नकटी गांव की कार्रवाई को लेकर अब तक कोई विशेष रणनीति या निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। यही वजह है कि अधिकांश नेता इस विषय पर सार्वजनिक बयान देने से बच रहे हैं।
बीजेपी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि सरकार और संगठन की भूमिकाएं अलग-अलग हैं। सरकार प्रशासनिक निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है, जबकि संगठन का दायित्व पार्टी का विस्तार, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और राजनीतिक गतिविधियों का संचालन करना है। ऐसे में प्रशासनिक कार्रवाई पर संगठन का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप उचित नहीं माना जा रहा है।
विरोध में उठ रहे सुर:
इस बीच बीजेपी के पूर्व विधायक ने इस पूरे मामले में अपनी राय रखी है। वे लगातार प्रभावित ग्रामीणों के पक्ष में आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर कहा है कि जिन परिवारों को हटाया गया है, उनके हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
उनका कहना है कि यदि जमीन को लेकर कोई विवाद है तो उसका समाधान कानून और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों के अनुसार विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण नहीं किया जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए वे लगातार प्रयासरत हैं और इस विषय को संबंधित मंचों पर उठाते रहेंगे। उनके इस रुख को लेकर बीजेपी के भीतर भी चर्चा तेज हो गई है, हालांकि पार्टी संगठन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना नकटी:
आने वाले दिनों में यदि यह मामला और अधिक राजनीतिक या कानूनी रूप लेता है, तो बीजेपी संगठन को भी अपना स्पष्ट रुख सामने रखना पड़ सकता है। फिलहाल पार्टी नेतृत्व की नजर पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है, लेकिन सार्वजनिक तौर पर संगठन ने इस विवाद से दूरी बनाए रखने की नीति अपनाई हुई है।
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