अडानी से मिले गिफ्ट्स कलेक्टर को सौंपे, तमनार माइंस प्रोजेक्ट के खिलाफ ग्रामीण एकजुट
Harrison Masih | May 19, 2026, 14:26 IST
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रायगढ़ में ग्रामीणों ने खनन कंपनी की ओर से बांटे गए दरी, क्रिकेट किट और अन्य सामान कलेक्टर को लौटाकर विरोध जताया है। दरअसल, तमनार ब्लॉक में पेलमा खदान परियोजना के खिलाफ विरोध चल रहा है। आरोप है कि समर्थन जुटाने के लिए कंपनी ने लोगों को गिफ्ट बांटे थे।
रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में प्रस्तावित पेलमा कोल खदान परियोजना को लेकर विवाद गहरा गया है। जनसुनवाई से ठीक एक दिन पहले ग्रामीणों ने कंपनी की ओर से बांटे गए दरी, क्रिकेट किट, बैट, स्टंप और पेटियों को कलेक्टर कार्यालय में पहुंचा दिया है। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि परियोजना के समर्थन में माहौल बनाने के लिए गिफ्ट बांटे गए थे।
विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन को आनन-फानन में 19 मई को प्रस्तावित जनसुनवाई स्थगित करनी पड़ी। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने रायगढ़ कलेक्टर के अनुरोध पर आदेश जारी करते हुए अगली सूचना तक जनसुनवाई टाल दी है।
18 मई को सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कुछ ग्रामीण यह दावा करते नजर आए कि एसईसीएल और उससे जुड़ी कांट्रेक्टर कंपनियों की ओर से गांवों में सामान बांटा गया। आरोप लगाया गया कि जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों को प्रभावित करने और विरोध कम करने के उद्देश्य से यह वितरण किया गया।
हालांकि कंपनी या प्रशासन की ओर से इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद पूरे मामले ने राजनीतिक और सामाजिक रंग ले लिया। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से सामान लौटाकर विरोध दर्ज कराया, जिसे इलाके में “एकता की ताकत” के रूप में देखा जा रहा है।
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की पेलमा परियोजना लगभग 2077 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित है। परियोजना की उत्पादन क्षमता 15 मिलियन टन प्रतिवर्ष बताई गई है। इस खदान से पेलमा, उरबा, मदुआडूमर, लालपुर, हिंझर, जरहीडीह, सक्ता, मिलुपारा और खर्रा समेत कई गांव प्रभावित होने वाले हैं। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से बड़े पैमाने पर विस्थापन, खेती और जलस्रोतों पर असर पड़ सकता है।
तमनार क्षेत्र पहले से ही कोयला खदानों और उद्योगों के प्रदूषण की मार झेल रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में राखड़, धूल और प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में एक और बड़ी कोयला परियोजना पर्यावरणीय संकट को और गहरा सकती है।
सामाजिक संगठनों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी परियोजना क्षेत्र के जंगलों और जल स्रोतों पर संभावित खतरे को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि जनसुनवाई जैसी प्रक्रियाएं केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं और ग्रामीणों की वास्तविक आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
पेलमा खदान परियोजना (Adani Mining Tamnar) का नाम पहले भी कई विवादों में सामने आ चुका है। बीते वर्षों में जमीन अधिग्रहण, मुआवजे की दर और ग्रामसभाओं की सहमति को लेकर कई बार विरोध प्रदर्शन हुए थे। ग्रामीणों का आरोप रहा है कि प्रभावित गांवों की सहमति के बिना परियोजना को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
तमनार और रायगढ़ क्षेत्र लंबे समय से “खनन बनाम पर्यावरण” की बहस का केंद्र रहे हैं। यहां उद्योगों और कोल ब्लॉकों के खिलाफ प्रदूषण, विस्थापन और स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें लगातार उठती रही हैं।
रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने कहा कि एसईसीएल की तैयारी पूरी नहीं थी, इसलिए जनसुनवाई को फिलहाल स्थगित किया गया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि विरोध और कानून-व्यवस्था की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने यह फैसला लिया।
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विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन को आनन-फानन में 19 मई को प्रस्तावित जनसुनवाई स्थगित करनी पड़ी। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने रायगढ़ कलेक्टर के अनुरोध पर आदेश जारी करते हुए अगली सूचना तक जनसुनवाई टाल दी है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो
हालांकि कंपनी या प्रशासन की ओर से इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद पूरे मामले ने राजनीतिक और सामाजिक रंग ले लिया। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से सामान लौटाकर विरोध दर्ज कराया, जिसे इलाके में “एकता की ताकत” के रूप में देखा जा रहा है।
एकता की ताकत.. !!
ग्रामीणों ने अडानी से मिले दरी, स्टंप, बैट, पेटियों को उठाकर कलेक्टर को दे दिया..
आनन फानन में बेशर्म प्रशासन को रायगढ़ पेलमा खदान की जनसुनवाई स्थगित करनी पड़ी।
जिस सेठ के सामने अमेरिका Compromise है, जिसके सामने हमारा PM COMPROMISED है उसे छत्तीसगढ़ के… https://t.co/1bIWaszyve pic.twitter.com/Rd1YDbpGoh
— Devendra Yadav (@Devendra_1925) May 18, 2026
2077 हेक्टेयर में प्रस्तावित है परियोजना
पर्यावरण और विस्थापन को लेकर बढ़ी चिंता
सामाजिक संगठनों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी परियोजना क्षेत्र के जंगलों और जल स्रोतों पर संभावित खतरे को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि जनसुनवाई जैसी प्रक्रियाएं केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं और ग्रामीणों की वास्तविक आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
पहले भी विवादों में रही है पेलमा परियोजना
तमनार और रायगढ़ क्षेत्र लंबे समय से “खनन बनाम पर्यावरण” की बहस का केंद्र रहे हैं। यहां उद्योगों और कोल ब्लॉकों के खिलाफ प्रदूषण, विस्थापन और स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें लगातार उठती रही हैं।
प्रशासन ने क्या कहा?
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