स्कूलों में नहीं चलेगी नेतागिरी, अभिभावकों के हाथों में प्रबंधन समिति की कमान
Arun Tiwari | Jun 15, 2026, 11:17 IST
छत्तीसगढ़ में स्कूल प्रबंधन का बदलाव 2026
छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी स्कूलों में बड़ा बदलाव करते हुए शाला विकास समितियों को भंग कर नई स्कूल मैनेजमेंट कमेटी गठित करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था में समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन अभिभावकों में से किया जाएगा।
Raipur. छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में प्रबंधन व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने अब तक कार्यरत शाला विकास समितियों (एसएमडीसी) को भंग कर नई स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) गठित करने का फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन किसी राजनीतिक नियुक्ति से नहीं, बल्कि स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों में से किया जाएगा। इससे स्कूलों के संचालन और विकास में माता-पिता की सीधी भागीदारी बढ़ेगी और राजनीतिक हस्तक्षेप कम होगा।
स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। केंद्र सरकार की एसएमसी-2026 गाइडलाइन के अनुरूप राज्य में यह नई व्यवस्था लागू की जा रही है। निर्देशों के अनुसार प्राथमिक से लेकर कक्षा 12वीं तक के सभी सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक महीने के भीतर नई समितियों का गठन करना अनिवार्य होगा।
नई स्कूल मैनेजमेंट कमेटी का आकार स्कूल में नामांकित विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार तय किया जाएगा। 100 तक विद्यार्थियों वाले स्कूलों में 12 से 15 सदस्य, 100 से 500 विद्यार्थियों वाले स्कूलों में 15 से 20 सदस्य और 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूलों में 20 से 25 सदस्य शामिल होंगे। इनमें 75 प्रतिशत सदस्य विद्यार्थियों के माता-पिता या अभिभावक होंगे, ताकि निर्णय प्रक्रिया में उनकी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
नई व्यवस्था के तहत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पद अभिभावकों के पास रहेंगे। इसके अलावा स्थानीय निकाय का एक निर्वाचित प्रतिनिधि, एक शिक्षक, स्थानीय शिक्षाविद् या विषय विशेषज्ञ, पूर्व विद्यार्थी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता अथवा एएनएम को भी समिति में सदस्य बनाया जाएगा। स्कूल के प्राचार्य या प्रभारी प्राचार्य समिति के सदस्य सचिव होंगे और प्रशासनिक समन्वय की जिम्मेदारी निभाएंगे।
नई एसएमसी को सीमित वित्तीय अधिकार भी दिए गए हैं। अब समिति स्कूल में एक लाख रुपये तक के निर्माण और मरम्मत कार्यों का निर्णय स्वयं ले सकेगी। इसके लिए अलग से विभागीय मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
इन कार्यों में शौचालय निर्माण या मरम्मत, पेयजल व्यवस्था, बिजली सुविधा, रैंप निर्माण, छोटी-मोटी मरम्मत और अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़े काम शामिल होंगे। हालांकि एक लाख रुपये से अधिक लागत वाले निर्माण और मरम्मत कार्यों के लिए वर्तमान विभागीय व्यवस्था पहले की तरह लागू रहेगी।
नई स्कूल मैनेजमेंट कमेटी की भूमिका सिर्फ भवन निर्माण या मरम्मत तक सीमित नहीं रहेगी। समिति को हर महीने कम से कम एक बैठक आयोजित करनी होगी और विद्यालय में विद्यार्थियों के नियमित नामांकन व उपस्थिति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
इसके अलावा स्कूल छोड़ चुके बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा मुख्यधारा में लाने, नामांकन अभियान चलाने, अभिभावक-शिक्षक बैठकों में सहयोग देने, बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) लक्ष्यों को हासिल करने, पीएम पोषण (मिड-डे मील) और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों की निगरानी, स्कूल विकास योजना तैयार करने, बच्चों की सुरक्षा एवं कल्याण सुनिश्चित करने तथा स्कूल को मिलने वाली अनुदान राशि के उपयोग पर नजर रखने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी समिति के पास होंगी।
नई व्यवस्था का उद्देश्य स्कूल प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समुदाय आधारित बनाना है, ताकि स्थानीय स्तर पर अभिभावकों की भागीदारी से सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं में सुधार लाया जा सके।
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सभी कलेक्टरों को आर्डर:
विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर समिति:
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष होंगे अभिभावक:
एक लाख रुपये तक के कार्यों का अधिकार:
इन कार्यों में शौचालय निर्माण या मरम्मत, पेयजल व्यवस्था, बिजली सुविधा, रैंप निर्माण, छोटी-मोटी मरम्मत और अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़े काम शामिल होंगे। हालांकि एक लाख रुपये से अधिक लागत वाले निर्माण और मरम्मत कार्यों के लिए वर्तमान विभागीय व्यवस्था पहले की तरह लागू रहेगी।
शिक्षा और बच्चों के विकास पर भी फोकस:
इसके अलावा स्कूल छोड़ चुके बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा मुख्यधारा में लाने, नामांकन अभियान चलाने, अभिभावक-शिक्षक बैठकों में सहयोग देने, बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) लक्ष्यों को हासिल करने, पीएम पोषण (मिड-डे मील) और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों की निगरानी, स्कूल विकास योजना तैयार करने, बच्चों की सुरक्षा एवं कल्याण सुनिश्चित करने तथा स्कूल को मिलने वाली अनुदान राशि के उपयोग पर नजर रखने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी समिति के पास होंगी।
निष्कर्ष:
FAQ
- SMDC को हटाकर नई व्यवस्था क्यों लाई गई है?
नई स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) इसलिए बनाई गई है ताकि स्कूलों के संचालन में पारदर्शिता बढ़े, राजनीतिक हस्तक्षेप कम हो और अभिभावकों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। - स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) का गठन कैसे होगा?
नई SMC में 75% सदस्य विद्यार्थियों के माता-पिता या अभिभावक होंगे। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन भी अभिभावकों में से किया जाएगा। इसके अलावा शिक्षक, स्थानीय प्रतिनिधि और अन्य सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल होंगे।
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