एसआईआर ने बढ़ाई माननीयों की चिंता, कहीं जिताने वाले वोटरों के न कट गए हों नाम
Arun Tiwari | Feb 05, 2026, 16:13 IST
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छत्तीसगढ़ में एसआईआर ने लोगों के रिश्ते ही नहीं बदले बल्कि माननीयों को भी चिंता में डाल दिया है। मौजूदा विधायक इस बात से परेशान हैं कि जिनके नाम कटे हैं वे कहीं उनको वोट डालने वाले लोग तो नहीं हैं।
NEWS IN SHORT
- एसआईआर ने उड़ाई माननीयों की नींद
- एसआईआर से विधायक चिंता में
- कहीं उनके समर्थकों के न कट गए हों नाम
- जितने अंतर से जीते उससे ज्यादा नाम कटे
- नाम जुड़वाने में लोगों की दिलचस्पी नहीं
NEWS IN DETAIL
माननीयों की उड़ी नींद :
कई मौजूदा विधायक इस चिंता में हैं कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से कटे हैं, वे कहीं उनके अपने समर्थक वोटर तो नहीं थे। विधायकों की चिंता की वजह भी बड़ी है।
जिन विधानसभा क्षेत्रों में हजारों वोटरों के नाम हटाए गए हैं, वहां यह संख्या कई जगह उस जीत के अंतर से भी ज्यादा है, जिससे विधायक चुनाव जीते थे।
ऐसे में आशंका है कि अगर यही वोटर अगली बार सूची में नहीं रहे, तो चुनावी गणित पूरी तरह बदल सकता है। इसी डर के चलते अब कई विधायक और उनके समर्थक अपने-अपने इलाकों में यह पता लगाने में जुटे हैं कि किन लोगों के नाम कटे हैं और वे किस राजनीतिक झुकाव के थे। यानी अब माननीय खुद अपने वोटरों की तलाश में निकल पड़े हैं।
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ये है माननीयों की जीत का समीकरण :
विधायक - सुनील सोनी,बीजेपी
नाम कटे - 89240
जीत का अंतर - 67719
- रायपुर ग्रामीण :
विधायक - मोतीलाल साहू,बीजेपी
नाम कटे - 134252
जीत का अंतर - 35750
- रायपुर पश्चिम :
विधायक - राजेश मूणत,बीजेपी
नाम कटे - 13312
जीत का अंतर - 41229
- रायपुर उत्तर :
विधायक - पुरंदर मिश्रा,बीजेपी
नाम कटे - 74146
जीत का अंतर - 23054
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- अभनपुर :
विधायक - इंद्रकुमार साहू,बीजेपी
नाम कटे - 20793
जीत का अंतर - 15553
- धरसींवा :
विधायक - अनुज शर्मा,बीजेपी
नाम कटे - 37632
जीत का अंतर - 44343
- आरंग :
विधायक - गुरु खुशवंत साहेब,बीजेपी
नाम कटे - 39702
जीत का अंतर - 16538
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Knowledge:
इसमें फॉर्म-6: नया नाम जोड़ने के लिए,
फॉर्म-7: नाम हटाने के लिए,
फॉर्म-8: विवरण सुधार के लिए होता है। इसका मकसद हर योग्य नागरिक का मतदान अधिकार सुरक्षित करना है।
important points :
.वोटरों के नाम कटने का डर: माननीयों को आशंका है कि कहीं उनके समर्थक वोटरों के नाम सूची से न कट गए हों।
.जीत के मार्जिन से ज्यादा नाम कटे: कई सीटों पर कटे वोटरों की संख्या जीत के अंतर से अधिक है।
.वोटरों की तलाश में नेता: विधायक अपने क्षेत्रों में कटे नामों की जानकारी जुटाने में लगे हैं।
.नाम जुड़वाने में उदासीनता: जिनके नाम कटे हैं, वे दोबारा जोड़ने में खास रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
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अब आगे क्या
निष्कर्ष :
न तो वे दस्तावेज जमा कर रहे हैं और न ही सुधार प्रक्रिया में आगे आ रहे हैं। इससे नेताओं की चिंता और बढ़ गई है। एसआईआर की यह प्रक्रिया जहां प्रशासन के लिए मतदाता सूची को शुद्ध करने का माध्यम है, वहीं राजनीतिक नजरिए से यह नेताओं के लिए बड़ा सिरदर्द बन गई है।
आने वाले चुनावों से पहले यह साफ हो गया है कि वोटर लिस्ट में हुआ यह बदलाव कई सीटों पर राजनीतिक समीकरण भी बदल सकता है।
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