भोपाल के विवादित स्लॉटर हाउस पर हाईकोर्ट सख्त, कहा, अगर ताले खुले तो कोर्ट करेगा सुनवाई

Neel Tiwari | Feb 09, 2026, 18:09 IST
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Slaughterhouse
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भोपाल के विवादित स्लॉटर हाउस पर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि यदि ताले खुले, तो सुनवाई होगी। इस मामले में जनहित याचिका दायर की गई थी।

News in Short

  • भोपाल के जिन्सी चौराहा क्षेत्र स्थित स्लॉटर हाउस सील।
  • लाईवस्टॉक फूड प्रोसेसर प्रा.लि. के नाम से संचालित था स्लॉटर हाउस।
  • जनहित याचिका पर जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई।
  • ताले खुलने पर याचिकाकर्ताओं को मेंशन करने की स्वतंत्रता।
  • पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को लेकर गंभीर आपत्तियां।

News in Detail

भोपाल में गौमांस विवाद के बाद लाईवस्टॉक फूड प्रोसेसर प्रा.लि. स्लॉटर हाउस को जिला प्रशासन ने सील कर दिया। इस मामले में जनहित याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया गया कि स्लॉटर हाउस पूरी तरह बंद है और ताले लगे हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि सील खुली, तो सुनवाई की जाएगी।

16 मार्च तक अगली सुनवाई तय

भोपाल में लाईवस्टॉक फूड प्रोसेसर प्रा.लि. के स्लॉटर हाउस पर दाखिल जनहित याचिका पर सोमवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिका साल 2025 अक्टूबर में दायर की गई थी।

हालांकि, सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि जिला प्रशासन ने विवादित स्लॉटर हाउस को एक अन्य कार्यवाही के दौरान सील कर दिया है। फिलहाल वहां किसी भी प्रकार की गतिविधि नहीं हो रही है। इस जानकारी को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च के लिए तय कर दी।



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डिवीजन बेंच की सख्त टिप्पणी

चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने कहा कि यदि स्लॉटर हाउस के ताले खोले गए या संचालन शुरू हुआ, तो याचिकाकर्ता अर्जेंट सुनवाई के लिए आवेदन कर सकते हैं। कोर्ट की यह टिप्पणी प्रशासन और स्लॉटर हाउस के लिए कड़ा संदेश है।

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इन संगठनों ने दायर की PIL

यह जनहित याचिका दयोदय महासंघ के अशोक कुमार जैन, राष्ट्रीय जैन शासन एकता संघ के राकेश जैन गोहिल और जन जागृति समिति के रंधीर कुमार पटेल ने दायर की।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता संकल्प कोचर हाईकोर्ट में पैरवी कर रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि जिन्सी चौराहा भोपाल में मैदा मिल रोड पर स्लॉटर हाउस नियमों का उल्लंघन कर चलाया जा रहा है।

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पर्यावरण प्रदूषण और जनस्वास्थ्य पर खतरे का आरोप

याचिका में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि स्लॉटर हाउस के कारण इलाके में पर्यावरण प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। स्लॉटर हाउस से निकलने वाला गंदा पानी आसपास के जलस्रोतों को दूषित कर रहा है।

वहीं वायु प्रदूषण के कारण स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह स्थिति भविष्य में गंभीर जनस्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।

राज्य सरकार सहित कई विभाग बनाए प्रतिवादी

इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार, स्लॉटर हाउस स्टेट लेवल मॉनिटरिंग कमेटी, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भोपाल नगर निगम और लाईवस्टॉक फूड प्रोसेसर प्राइवेट लिमिटेड को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में संबंधित विभागों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट ने खोली थी पोल

मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जांच के बाद हाईकोर्ट में अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट में बताया गया कि स्लॉटर हाउस में अनिवार्य रूप से बाउंड्री वॉल होनी चाहिए।

पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए और निगरानी की पुख्ता व्यवस्था होनी चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया कि भविष्य में स्लॉटर हाउस को आबादी से दूर किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाना आवश्यक है।

पहले ही दिए जा चुके हैं कमियां दूर करने के निर्देश

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट पर हाईकोर्ट पहले ही लाईवस्टॉक फूड प्रोसेसर प्रा.लि. को कमियां दूर करने का निर्देश दे चुका है। स्लॉटर हाउस के सील होने के बाद अदालत ने कहा कि नियमों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।

जरूरत पड़ी तो और कड़ी कार्रवाई हो सकती है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को स्वतंत्रता दी कि यदि स्लॉटर हाउस की सील खुलती है तो वे आवेदन कर सकते हैं। इस पर सुनवाई होगी।



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