दतिया उपचुनाव: टिकट के बाद बगावत से भाजपा में कलह! बढ़ी संगठन की मुश्किलें

Ramanand Tiwari | Jul 11, 2026, 06:15 IST
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दतिया में भाजपा की खुली कलह
Photograph: (THESOOTR)

BHOPAL. दतिया उपचुनाव में टिकट बदलने से भाजपा में बगावत खुलकर सामने आई। हाईवे जाम, नारेबाजी और इस्तीफों की खबरों ने संगठन की चुनावी चुनौती बढ़ा दी।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...

  • डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को भाजपा उम्मीदवार बनाया गया।
  • टिकट बदलने के बाद दतिया-झांसी हाईवे पर प्रदर्शन और जाम लगा।
  • कई स्थानीय पदाधिकारियों और पार्षदों के इस्तीफे की खबरें सामने आईं।
  • प्रदर्शनकारियों ने टिकट बदलने की मांग उठाई।
  • भाजपा नेतृत्व के सामने संगठनात्मक अनुशासन और चुनावी प्रबंधन की चुनौती बढ़ी।
दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले भाजपा में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आ गया है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद समर्थकों का विरोध सड़कों तक पहुंच गया।

दतिया-झांसी हाईवे पर लंबा जाम लगा, नारेबाजी हुई और कई पदाधिकारियों के इस्तीफे की खबरों ने संगठन की चिंता बढ़ा दी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस दबाव के आगे भाजपा अपना फैसला बदलेगी, या फिर संगठन अपने निर्णय पर अडिग रहेगा?

टिकट बदलते ही सड़कों पर उतरा विरोध

भाजपा की उम्मीदवार सूची जारी होते ही दतिया का राजनीतिक माहौल गरमा गया। डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थक बड़ी संख्या में सड़क पर उतर आए और दतिया-झांसी हाईवे पर धरना देकर यातायात रोक दिया। करीब तीन किलोमीटर तक वाहनों की कतार लगने से आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

नारेबाजी से बढ़ा राजनीतिक संदेश

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने "नरोत्तम मिश्रा जिंदाबाद", "टिकट बदलो" और "आशुतोष वापस जाओ" जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि दतिया में भाजपा की पहचान नरोत्तम मिश्रा के नेतृत्व से बनी और टिकट बदलने का फैसला स्थानीय कार्यकर्ताओं की भावना के विपरीत है।

इस्तीफों की खबरों ने बढ़ाई हलचल

विरोध के बीच भाजपा के कई स्थानीय पदाधिकारियों और पार्षदों के इस्तीफे की खबरें भी सामने आई हैं। यदि ये इस्तीफे संगठन स्तर पर प्रभावी होते हैं, तो उपचुनाव से पहले भाजपा के लिए यह एक गंभीर राजनीतिक चुनौती बन सकती है।

क्या दबाव में बदलेगा फैसला?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा आमतौर पर उम्मीदवार घोषित होने के बाद टिकट बदलने से बचती है। ऐसे में विरोध और दबाव के बावजूद पार्टी अपने फैसले पर कायम रहती है या नहीं, इस पर सभी की नजर है। फिलहाल पार्टी की ओर से टिकट बदलने का कोई संकेत सामने नहीं आया है।

अनुशासन की कसौटी पर भाजपा

भाजपा स्वयं को अनुशासित संगठन मानती है। ऐसे में सार्वजनिक विरोध, सड़क जाम और टिकट के खिलाफ खुली नाराजगी ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या संगठन इस असंतोष को संवाद से शांत करेगा या अनुशासनात्मक कार्रवाई का रास्ता चुनेगा। इसका जवाब आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

आशुतोष तिवारी पर क्यों जताया भरोसा?

आशुतोष तिवारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं। वे भोपाल-सागर संभाग में संगठन मंत्री रह चुके हैं और भाजपा सरकार के दौरान मध्य प्रदेश गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष भी रहे। उन्हें संगठन का अनुभवी चेहरा माना जाता है।

नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों में निराशा

सूत्रों के अनुसार, टिकट की उम्मीद में डॉ. नरोत्तम मिश्रा चुनावी तैयारियों में सक्रिय थे। ऐसे में अंतिम समय में उम्मीदवार बदलने के फैसले ने उनके समर्थकों को बड़ा झटका दिया। इसी वजह से विरोध का स्वर और तेज होता दिखाई दिया।

उपचुनाव से पहले भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती

दतिया उपचुनाव अब केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच का मुकाबला नहीं रह गया है। भाजपा के सामने अपने कार्यकर्ताओं की नाराजगी को संभालना भी बड़ी चुनौती बन गई है।

यदि संगठन असंतोष को समय रहते नियंत्रित कर लेता है तो चुनावी नुकसान सीमित रह सकता है, लेकिन यदि विरोध लंबा चला तो विपक्ष इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश करेगा।

दतिया की राजनीति में फिलहाल सबसे बड़ा मुद्दा उम्मीदवार नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर उभरा असंतोष है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि संगठन अपने फैसले पर मजबूती से कायम रहता है या कार्यकर्ताओं की नाराजगी कम करने के लिए कोई नई रणनीति अपनाता है।

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