BU Bhoj Digital Valuation: बरकतउल्ला और भोज में डिजीटली चेक होंगी कॉपियां, 20 दिन में आएगा रिजल्ट
Manya Jain | Apr 06, 2026, 18:34 IST
BU Bhoj Digital Valuation
भोपाल की बरकतउल्ला और भोज यूनिवर्सिटी में अब कॉपियां डिजिटल तरीके से जांची जाएंगी। इससे रिजल्ट जल्दी आएगा और नंबरों के जोड़ में गलती नहीं होगी। छात्रों को अब इवैल्यूएशन मिलेगा।
MP News.भोपाल की बरकतउल्ला और भोज यूनिवर्सिटी में बड़ा बदलाव हो रहा है। अब आपकी कॉपियां पुराने तरीके से नहीं जांची जाएंगी। दोनों यूनिवर्सिटी अब डिजिटल वैल्यूएशन सिस्टम (evaluation process) लागू करने जा रही हैं। इस आधुनिक तकनीक से रिजल्ट आने में बिल्कुल देरी नहीं होगी। कॉपी चेक करने की प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बनी रहेगी।
छात्रों की नंबर कम मिलने वाली शिकायतें अब खत्म हो जाएंगी। "पन्ने नहीं देखे गए" जैसी बातें अब नहीं सुनाई देंगी। अंकों के योग में होने वाली गलतियां भी बंद हो जाएंगी। यह नई व्यवस्था छात्रों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगी। वैल्यूएशन का हर पहलू अब पूरी तरह से सटीक होगा।
डिजिटल वैल्यूएशन एक ऐसी तकनीक है, जिसमें भौतिक उत्तर पुस्तिका (Physical Answer Sheets) को उच्च गुणवत्ता वाले स्कैनर्स के माध्यम से स्कैन किया जाता है और फिर उन्हें एक सुरक्षित क्लाउड सर्वर पर अपलोड कर दिया जाता है।
यूनिवर्सिटी इस नई तकनीक को लाने के लिए मोटा पैसा खर्च करने जा रही है। कॉपियों को ऑनलाइन जांचने (copy checking) के लिए बड़े सर्वर, डेटा सेव करने की जगह और कंप्यूटर के जानकार लोग—उनके लिए अलग से भारी-भरकम बजट तैयार कर लिया गया है।"
बीयू प्रशासन का आकलन है कि एक आंसर शीट की डिजिटल प्रोसेसिंग पर लगभग 30 रुपए का खर्च आएगा। वहीं, भोज विश्वविद्यालय ने अपनी हालिया बजट बैठक में इस प्रक्रिया के लिए 2 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी है।
1. रिजल्ट टाइम पर आएगा : यूनिवर्सिटी का दावा है कि अब कॉपियां जांचने का काम सिर्फ 15 दिन में निपट जाएगा। इसका मतलब है कि एग्जाम खत्म होने के 20 दिन के अंदर आपके हाथ में रिजल्ट होगा। इससे सेशन लेट नहीं होगा और आगे की पढ़ाई या एडमिशन में कोई देरी नहीं होगी।
2. अब कॉपी चेक करने में कोई लापरवाही नहीं चलेगी: अक्सर स्टूडेंट्स शिकायत करते हैं कि "सर, मेरा तो पूरा पेज चेक ही नहीं हुआ" या "नंबर कम रह गए"। अब नए डिजिटल सिस्टम में टीचर जब तक आपकी कॉपी का हर एक पेज अपनी स्क्रीन पर खोलकर देख नहीं लेगा, तब तक वह अगले सवाल पर जा ही नहीं पाएगा। यानी अब एक भी पन्ना बिना चेक किए नहीं छूटेगा।
3. अपनी कॉपी देखना होगा अब और भी आसान: अगर आपको लगता है कि आपके नंबर कम आए हैं और आप अपनी कॉपी दोबारा चेक (Revaluation) करवाना चाहते हैं या उसकी फोटोकॉपी देखना चाहते हैं, तो अब हफ़्तों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सारा डेटा कंप्यूटर पर होगा, तो यूनिवर्सिटी आपको तुरंत आपकी कॉपी दिखा पाएगी। सब कुछ साफ़-सुथरा और पारदर्शी रहेगा।
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छात्रों की नंबर कम मिलने वाली शिकायतें अब खत्म हो जाएंगी। "पन्ने नहीं देखे गए" जैसी बातें अब नहीं सुनाई देंगी। अंकों के योग में होने वाली गलतियां भी बंद हो जाएंगी। यह नई व्यवस्था छात्रों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगी। वैल्यूएशन का हर पहलू अब पूरी तरह से सटीक होगा।
डिजिटल वैल्यूएशन सिस्टम क्या है
- कॉपियों का फोटो खींचना (स्कैनिंग): जैसे ही आपकी परीक्षा खत्म होगी, सभी कॉपियों को कम्प्यूटर में फीड करने के लिए उनका फोटो खींचकर डिजिटल बना दिया जाएगा। अब कॉपियों के खोने का डर नहीं रहेगा।
- घर बैठे या ऑफिस से जांच (ऑनलाइन एक्सेस): अब चेक करने वाले शिक्षकों को कॉपियों के बंडल लेकर इधर-उधर नहीं घूमना पड़ेगा। वे अपनी आईडी और पासवर्ड डालकर कम्प्यूटर पर ही आपकी कॉपी खोल सकेंगे।
- कंप्यूटर पर ही मार्किंग (ऑन-स्क्रीन मार्किंग): जैसे हम मोबाइल या कम्प्यूटर पर फोटो देखते हैं, वैसे ही टीचर्स स्क्रीन पर आपकी कॉपी देखेंगे और वहीं पर नंबर देते जाएंगे। पेन-कागज का झंझट खत्म।
- नंबरों की गिनती अपने आप (ऑटो-कैलकुलेशन): सबसे बड़ा फायदा यह है कि नंबरों को जोड़ने में गलती नहीं होगी। सॉफ्टवेयर खुद-ब-खुद सारे नंबर जोड़ देगा, जिससे टोटल गलत होने की वजह से फेल होने या नंबर कम होने वाली टेंशन खत्म हो जाएगी।
स्कैनिंग पर करोड़ों का खर्च
| विश्वविद्यालय का नाम | कॉपियों की संख्या (सालाना) | अनुमानित बजट (Estimated Budget) |
| बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी (BU) | 25 लाख | 7.5 करोड़ (लगभग) |
| मप्र भोज मुक्त विवि (Bhoj) | 70 हजार+ छात्र | 2 करोड़ |
छात्रों को होने वाले फायदे
2. अब कॉपी चेक करने में कोई लापरवाही नहीं चलेगी: अक्सर स्टूडेंट्स शिकायत करते हैं कि "सर, मेरा तो पूरा पेज चेक ही नहीं हुआ" या "नंबर कम रह गए"। अब नए डिजिटल सिस्टम में टीचर जब तक आपकी कॉपी का हर एक पेज अपनी स्क्रीन पर खोलकर देख नहीं लेगा, तब तक वह अगले सवाल पर जा ही नहीं पाएगा। यानी अब एक भी पन्ना बिना चेक किए नहीं छूटेगा।
3. अपनी कॉपी देखना होगा अब और भी आसान: अगर आपको लगता है कि आपके नंबर कम आए हैं और आप अपनी कॉपी दोबारा चेक (Revaluation) करवाना चाहते हैं या उसकी फोटोकॉपी देखना चाहते हैं, तो अब हफ़्तों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सारा डेटा कंप्यूटर पर होगा, तो यूनिवर्सिटी आपको तुरंत आपकी कॉपी दिखा पाएगी। सब कुछ साफ़-सुथरा और पारदर्शी रहेगा।
डिजिटल वैल्यूएशन में आएंगी ये चुनौतियां
- डेटा सुरक्षा (Data Security): लाखों छात्रों के डेटा को हैकर्स से बचाना एक बड़ी प्राथमिकता होगी।
- तकनीकी प्रशिक्षण: शिक्षकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कॉपी चेक करने के लिए विशेष प्रशिक्षण (Training) की आवश्यकता होगी।
- हाई-स्पीड इंटरनेट: ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित केंद्रों से कॉपियों को अपलोड करने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी जरूरी होगी।
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