जीएडी के पत्र में साफ निर्देश फिर भी विभाग कोर्ट के नाम पर डाल रहे अड़ंगा
Sanjay Sharma | Jan 17, 2026, 23:25 IST
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एमपी सरकार दिव्यांगों के लिए विशेष भर्ती अभियान चला रही है। लेकिन विभागों का अड़ियल रवैया इसे रोक रहा है। अधिकांश विभाग भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए।
News in Short
- मध्य प्रदेश सरकार ने दिव्यांगों के लिए विशेष भर्ती अभियान शुरू किया।
- सरकारी विभागों का अड़ियल रवैया इसे आगे नहीं बढ़ने दे रहा।
- अब तक 30,000 से ज्यादा पद खाली हैं। भर्ती प्रक्रिया में कई अड़चनें आई हैं।
- हाईकोर्ट ने दिव्यांगता के अधिक प्रतिशत वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देने का आदेश दिया था।
- विशेष भर्ती अभियान के बावजूद, दिसंबर 2024 तक केवल 2700 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो पाई है।
News in Detail
अभ्यर्थी दस्तावेज सत्यापन के बाद चक्कर काट रहे हैं। विभाग कोर्ट के आदेश का हवाला देकर जीएडी से मार्गदर्शन का बहाना बना रहे हैं। इस कारण 2024 में शुरू हुआ दिव्यांगों की विशेष भर्ती अभियान अब तक आगे नहीं बढ़ पाया है।
विभागों में अब भी 30 हजार से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। दिसम्बर 2024 तक प्रदेश में केवल 2700 पदों पर दिव्यांगों की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो पाई है। विभागों के अड़ियल रवैए के कारण दिव्यांग सरकार के अभियान पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
प्रदेश में दिव्यांगजनों की भर्तियों के लिए सरकार ने 2024 में विशेष अभियान शुरू किया था। विभागों में दिव्यांग कोटे में खाली 36 हजार से ज्यादा पदों पर इस अभियान के माध्यम से तेजी से नियुक्ति की जानी थी। सीएम डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे।
विभागों ने खाली पदों पर भर्ती नोटिफिकेशन जारी किया। भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन चंद विभागों ने ही इसे पूरा किया। नतीजा, नगरीय निकायों सहित ज्यादातर विभागों में अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिली।
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प्राथमिकता का आदेश के बदल दिए मायने
यह फैसला इंदौर हाईकोर्ट बेंच में जस्टिस सुबोध अभ्यंकर के न्यायालय द्वारा अभ्यर्थी सिद्धी पाल की याचिका पर फरवरी 2024 में सुनाया गया था। हाईकोर्ट बेंच ने कई याचिकाओं का निराकरण किया। दिव्यांगता के अधिक प्रतिशत पर अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देने का आदेश दिया। भर्ती प्रक्रिया में अधिक दिव्यांग या दिव्यांगता के अधिक प्रतिशत वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जानी थी। इस आदेश का उद्देश्य विभागों में अशक्त अभ्यर्थियों की अनदेखी रोकना था। विभाग और निकायों ने इसका गलत मतलब निकाला।
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गलती सुधारने की जगह नियुक्ति ही रोक दी
इस पत्र में प्रदेश में दिव्यांगजनों के लिए 6 प्रतिशत पद आरक्षित होने के साथ ही उनके आरक्षण की स्थिति भी स्पष्ट की गई है। गाइडलाइन में दिव्यांगों के लिए सुरक्षित 6 फीसदी पदों का उल्लेख है। दृष्टि बाधितों के लिए 1.5 फीसदी, बहरे और कम सुनने वालों के लिए 1.5 फीसदी, लोकोमोटर डिसेबिलिटी के लिए 1.5 फीसदी पदों का विभाजन किया गया है। इसके अलावा, ऑटिज्म, बौद्धिक दिव्यांग और स्पेसिफिक लर्निंग दिव्यांगों के लिए भी 1.5 फीसदी पदों का बंटवारा किया गया है। इन श्रेणियों में दिव्यांगता के अधिक प्रतिशत के आधार पर प्राथमिकता दी जाएगी।
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नगरीय निकाय और विभागों ने जीएडी को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा है। इसमें महीनों बीच चुके हैं और भर्ती अटककर रह गई है। न तो जीएडी से इन चिट्ठियों के आधार पर कोई मार्गदर्शिका जारी की गई है। न विभागीय स्तर पर अधिकारियों ने अपने विवेक के आधार पर भर्तियों को आगे बढ़ाया है।
ऐसे में जो अभ्यर्थी आवेदन के बाद नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं उन्हें ने तो कोई संतोषजनक जवाब दिया जा रहा है और न ही भर्ती प्रक्रिया नए सिरे से करने या नियुक्ति की निर्धारित अवधि ही बताई जा रही है। सरकार ने विशेष अभियान शुरू किया था, लेकिन विभागीय अधिकारियों के अड़ियल रवैये ने इसे ठप कर दिया। पिछले चार महीनों में न तो कोई भर्ती बढ़ी है, न ही किसी को नियुक्ति मिली है। शारीरिक रूप से अक्षम दिव्यांग अभ्यर्थी भी बार-बार भोपाल आने में दुविधा का शिकार हो रहे हैं।
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21 हजार पद खाली फिर भी विभागों की बेरुखी
इनमें से 21 हजार पद अभी भी खाली हैं। इन्हीं पदों को भरने के लिए सरकार ने विशेष भर्ती अभियान शुरू किया था। लेकिन अब तक 9000 पदों के लिए नोटिफिकेशन ही जारी नहीं हुआ है। वहीं ज्यादातर विभाग विज्ञापन जारी करने या आवेदन और इंटरव्यू के बाद भी भर्ती नहीं कर पाए हैं।
मध्य प्रदेश में स्पर्श पोर्टल पर 9 लाख से ज्यादा दिव्यांग पंजीकृत हैं। जिनका 6 फीसदी 54 हजार होता है। यानी मध्य प्रदेश में जितने पद खाली हैं उससे ज्यादा दिव्यांग हैं फिर भी सरकार भर्ती नहीं निकाल पा रही है।
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