गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री करें बंद, हर साल भाग जाती हैं 4.5 लाख लड़कियां- उषा ठाकुर
Amresh Kushwaha | Sept 22, 2026, 15:24 IST
उषा ठाकुर
मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठाकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने 4.5 लाख लड़कियों के लापता होने का दावा किया है। जानें पूरा विवाद...
समझें क्या है पूरा मामला...
- उषा ठाकुर ने गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक मांगी।
- उनका दावा है, हर साल 4.5 लाख लड़कियां घर छोड़ देती हैं।
- उन्होंने बिना सोर्स बताए नौ लाख बच्चों के जन्म का दावा किया।
- उनका कहना है, कुछ लोग पहचान छिपाकर पंडालों में घुसते हैं।
- 2014 में भी उन्होंने ऐसी ही मांग रखी थी, अब यह फिर चर्चा में है।
एंट्री बैन की मांग क्यों उठी
उषा ठाकुर भाजपा की वरिष्ठ नेता मानी जाती हैं। उनका कहना है कि गरबा सिर्फ मनोरंजन का आयोजन नहीं है। उनके मुताबिक यह धार्मिक आस्था और शक्ति साधना से जुड़ा पर्व है। उनका आरोप है कि कुछ लोग नाम बदलकर पंडालों में प्रवेश करते हैं। ऐसे लोग युवतियों को भ्रमित करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने एक मांग भी रखी है। मूर्ति पूजा में विश्वास न रखने वालों को एंट्री न मिले। यह बयान नवरात्रि से ठीक पहले आया है।
4.5 लाख का दावा और सवाल
उनके मुताबिक इससे जनसंख्या के अनुपात में बदलाव हो रहा है। हालांकि उन्होंने इन आंकड़ों का कोई स्रोत नहीं बताया। किसी सरकारी रिपोर्ट या अध्ययन का हवाला भी नहीं दिया गया। इसलिए इन आंकड़ों को अभी सिर्फ उनका निजी दावा माना जा रहा है। किसी स्वतंत्र संस्था ने अभी तक इनकी पुष्टि नहीं की है।
गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की नो-एंट्री पर उषा ठाकुर का विवादित बयान: दावों और आंकड़ों पर फिर छिड़ी बहस! 🚩⚖️
🔹 पूर्व मंत्री बोलीं- 'मूर्ति पूजा में विश्वास न रखने वालों को गरबा पंडालों में न मिले प्रवेश'
🔹 पहचान छिपाकर, तिलक-कलावा लगाकर युवतियों को भ्रमित करने का लगाया… pic.twitter.com/sIXDW4t1Qy
— Amresh Kushwaha (@amresh_kush) September 23, 2026
गरबा के बदलते स्वरूप पर बात
उनका आरोप है कि अब महंगे कपड़े और गहने ज्यादा दिखते हैं। उन्होंने विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के अभियानों का भी समर्थन किया। ये संगठन पहले से ही गरबा एंट्री को लेकर अभियान चलाते रहे हैं।
2014 में भी दिया था बयान
नवरात्रि से पहले सियासत तेज
उषा ठाकुर के बयान पर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोग उनकी मांग का समर्थन कर रहे हैं। वहीं कई लोग उनके दिए आंकड़ों पर सवाल उठा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि बिना सबूत के इतने दावे करना ठीक नहीं है। उनका कहना है कि ऐसे बयानों से समाज में गलतफहमी फैल सकती है। हालांकि अभी तक भाजपा या सरकार का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यह देखना बाकी है कि इस मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है।
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