हाईकोर्ट परिसर में गहराया जातीय टकराव, ओबीसी-सवर्ण अधिवक्ता आमने-सामने
Neel Tiwari | Jan 14, 2026, 23:05 IST
highcourt campus caste
13 जनवरी 2026 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट परिसर में जातीय टकराव बढ़ा। ओबीसी और सवर्ण अधिवक्ताओं के बीच विवाद हुआ। मामला बार काउंसिल तक पहुंच गया।
NEWS In short
2. हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ ने झूठी शिकायत और दुर्भावना फैलाने के आरोप में दो अधिवक्ताओं को नोटिस जारी किया।
3. संयुक्त कार्यकारिणी बैठक में दोषी अधिवक्ताओं पर कठोर कार्रवाई का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ।
4. मामला अब बार काउंसिल तक पहुंचा, कुछ अधिवक्ताओं का रजिस्ट्रेशन निरस्त करने पर विचार किया जा रहा है।
5. पिछड़ा वर्ग अधिवक्ता कल्याण संघ ने चीफ जस्टिस से CCTV जांच और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
News in Detail
OBC/SC-ST वर्ग के अधिवक्ताओं ने इसे जातीय उत्पीड़न और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ ने इसे झूठी शिकायत और सामाजिक विद्वेष फैलाने की साजिश कहा। इस टकराव ने हाईकोर्ट परिसर में तनाव बढ़ा दिया है।
तीन अधिवक्ता संगठनों की बैठक
सोशल मीडिया के जरिए विद्वेष फैलाने के आरोप में अधिवक्ता विनायक शाह की सदस्यता भी समाप्त की जाएगी। बैठक में संजय अग्रवाल, मनीष मिश्रा और अन्य कार्यकारिणी सदस्य मौजूद थे। सैकड़ों अधिवक्ताओं ने ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन की प्रति एसपी जबलपुर को भेजी गई।
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आचार संहिता का उल्लंघन
अधिवक्ता संगठनों का कहना है कि झूठे आरोप कोर्ट परिसर की शांति भंग करते हैं। यह एडवोकेट्स एक्ट और पेशेवर आचार संहिता का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में सदस्यता समाप्त करने के साथ लाइसेंस रद्द करना जरूरी है। यह कदम भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी है।
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आपत्तिजनक जातिसूचक भाषा का प्रयोग
आदिवासी अधिवक्ता रूप सिंह मरावी ने इसका विरोध किया। उनके साथ मारपीट की गई। सिविल लाइन थाना प्रभारी ने शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की। संघ ने घटना स्थल के CCTV फुटेज की मांग की। स्वतंत्र जांच कर दोषियों पर SC/ST एक्ट सहित कार्रवाई की मांग की।
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इस मामले पर अधिवक्ता समाज की नजर
यह विवाद जातीय या संगठनात्मक संघर्ष से आगे बढ़ चुका है। अब यह पेशेवर साख, न्यायालय की गरिमा और संवैधानिक मूल्यों की परीक्षा बन चुका है। प्रदेश का अधिवक्ता समाज इस मामले पर नजर बनाए हुए है। सभी की निगाहें जांच और आगे के कदम पर हैं।
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