ब्याज की टेंशन खत्म, हसना योजना से एक लाख का लोन लेकर बनें मालिक
Anjali Dwivedi | Feb 02, 2026, 16:11 IST
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बुरहानपुर में बोहरा समाज की 40 साल पुरानी हसना योजना बेरोजगारी दूर कर रही है। बिना ब्याज के एक लाख रुपए का लोन लेकर अब तक 1000 से ज्यादा लोग सफल बिजनेसमैन बन चुके हैं।
Burhanpur News. आजकल छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए बैंकों से कर्ज लेना पड़ता है और भारी ब्याज चुकाना होता है। लेकिन मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में एक अनूठी परंपरा चली आ रही है। यहां का बोहरा समाज अपने लोगों को नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बना रहा है। समाज की कर्ज हसना योजना के तहत सैकड़ों युवा बिना ब्याज के अपना कारोबार शुरू कर रहे हैं।
इस योजना से लोग आत्मनिर्भर हो रहे हैं और रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। यह पहल समाज के लिए प्रेरणादायक बन चुकी है। अब समाज के लोग बुरहानपुर जिले में आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रहे हैं।
समाज के वरिष्ठ सदस्य मोहम्मद मर्चेंट ने इस योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसकी शुरुआत बोहरा समाज के धर्मगुरु सैयदना बुरहानुद्दीन साहब ने की थी। उनका उद्देश्य था समाज के हर व्यक्ति को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना। इसी सोच के साथ कर्ज हसना योजना शुरू की गई, जिसका अर्थ नेक कर्ज है। इस योजना में जरूरतमंदों को एक लाख रुपए तक की मदद दी जाती है। यह राशि उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए दी जाती है।
इस योजना का सबसे मजबूत पहलू इसकी पारदर्शिता और विश्वास है। जब कोई व्यक्ति लोन की राशि तय समय के भीतर लौटाना शुरू कर देता है, तो समाज में उसकी क्रेडिट बढ़ जाती है। बिजनेस के विस्तार के लिए उसे दोबारा भी वही राशि दी जा सकती है। खास बात यह है कि 40 साल के सफर में न तो कभी किसी से ब्याज लिया गया और न ही किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क वसूला गया।
बुरहानपुर की ऐतिहासिक जख्मी हवेली इस योजना का मुख्य केंद्र है। पिछले करीब चार दशकों से इसी स्थान से पूरी योजना का संचालन किया जा रहा है। यहीं से जरूरतमंदों के आवेदनों की जांच होती है और सहायता राशि स्वीकृत की जाती है। यह योजना पूरी तरह पारदर्शी है और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ केवल बोहरा समाज के सदस्यों के उत्थान के लिए काम करती है।
आंकड़े गवाह हैं कि इस योजना ने बुरहानपुर की आर्थिक तस्वीर बदली है। पिछले 40 सालों में 1000 से अधिक लोग इस ब्याज मुक्त लोन का लाभ लेकर सफल बिजनेसमैन बन चुके हैं। किसी ने छोटी दुकान खोली तो किसी ने अपना बड़ा व्यापार स्थापित किया। आज ये लोग न केवल खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं।
बुरहानपुर की यह पहल आज पूरे जिले के लिए एक केस स्टडी बन चुकी है। यह योजना साबित करती है कि यदि समाज सामूहिक रूप से अपने लोगों का हाथ थाम ले, तो बेरोजगारी जैसी चुनौती को बिना किसी सरकारी बोझ के भी खत्म किया जा सकता है। बोहरा समाज की यह 40 साल पुरानी परंपरा आज आधुनिक दौर के स्टार्टअप कल्चर के लिए भी एक बड़ा सबक है।
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इस योजना से लोग आत्मनिर्भर हो रहे हैं और रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। यह पहल समाज के लिए प्रेरणादायक बन चुकी है। अब समाज के लोग बुरहानपुर जिले में आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रहे हैं।
ऐसे हुई कर्ज हसना की शुरुआत
पैसा चुकाने पर दोबारा मिलता है मौका
बुरहानपुर की ऐतिहासिक जख्मी हवेली इस योजना का मुख्य केंद्र है। पिछले करीब चार दशकों से इसी स्थान से पूरी योजना का संचालन किया जा रहा है। यहीं से जरूरतमंदों के आवेदनों की जांच होती है और सहायता राशि स्वीकृत की जाती है। यह योजना पूरी तरह पारदर्शी है और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ केवल बोहरा समाज के सदस्यों के उत्थान के लिए काम करती है।
1000 से ज्यादा लोग बन चुके हैं मालिक
आत्मनिर्भरता की एक वैश्विक मिसाल
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