अधूरे ग्लोबल स्किल पार्क की छत से रिस रहा पानी, सरकार तक पहुंची शिकायत
Sanjay Sharma | Jul 13, 2025, 19:36 IST
global skill park Photograph: (The Sootr)
मध्य प्रदेश। अब संत रविदास ग्लोबल स्किल पार्क के निर्माण में गड़बड़ी सामने आई है। भोपाल में 1548 करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन स्किल पार्क पांच साल बाद भी पड़ा है।
BHOPAL. जब बाड़ ही खेत को खाए तो रखवाली कौन करे। मध्यप्रदेश के संदर्भ में ये कहावत बिल्कुल सटीक है। बेहिसाब घोटालों के बीच अब सरकार के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट संत रविदास ग्लोबल स्किल पार्क के निर्माण में भारी गड़बड़ी सामने आई है।
भोपाल में 1548 करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन स्किल पार्क पांच साल बाद भी पड़ा है। इसके तैयार होने से पहले ही बारिश ने गुणवत्ता की कलई धो कर रख दी है। एशियन डेव्लपमेंट बैंक से ऋण लेकर बनाए जा रहे ग्लोबल स्किल पार्क के घटिया निर्माण की शिकायत सरकार तक पहुंची है।
शिकायत में इस प्रोजेक्ट के जनरल मैनेजर (सिविल) की भूमिका को कटघरे में खड़ा किया गया है। वहीं निर्माण की घटिया गुणवत्ता की वजह से यहां प्रशिक्षण लेने वाले छात्र और कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए गए हैं।
मध्य प्रदेश में विकास के नाम पर निर्माण कार्यों की बाढ़ आ गई है। प्रदेश में करोड़ों के सरकारी निर्माण जारी हैं लेकिन गुणवत्ता में संतुष्टि के पैमाने पर एक भी खरा नहीं उतर पाया है। भोपाल के ऐशबाग क्षेत्र स्थित 90 डिग्री आरओबी का मामला हो या इंदौर में जेड आकार का फ्लाईओवर, हर मामले में तकनीकी चूक सामने आ रही है।
जबलपुर में करोड़ों की लागत के फ्लाईओवर में चंद दिनों में ही दरारें आ गई थीं। वहीं भोपाल में जीजी फ्लाई ओवर अधिकारियों की लापरवाही का बड़ाउदाहरण बन गया है।
ऐसे गुणवत्ताहीन निर्माण पर सरकार के खजाने से करोड़ों रुपए बर्बाद किए जा चुके हैं। अब डेढ़ हजार करोड़ से भी ज्यादा लागत वाले संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क की गुणवत्ता सवालों में घिर गई है।
ग्लोबल स्किल पार्क का निर्माण साल 2022 में शुरू हुआ था जिसे दो साल में पूरा हो जाना था। तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग ने बीते साल ग्लोबल स्किल पार्क भोपाल में एडमिशन शुरू करने की घोषणा तक कर दी थी। हालांकि काम में देरी होती गई और अभी भी यह 80 फीसदी ही पूरा हो सका है। यानी युवाओं को तकनीकी- व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण देने वाला प्रोजेक्ट तीन साल पीछे चल रहा है। स्किल पार्क के निर्माण की गति से साल के अंत तक इसके पूरा बन पाने की उम्मीद कम ही है।
ग्लोबल स्किल पार्क एशियन डेव्लपमेंट बैंक की फंडिंग से बन रहा है। इसके लिए तय निर्माण अवधि दो साल थी लेकिन पांच साल बाद भी यह पूरा नहीं बन पाया है। बारिश में निर्माण की खामियां उजागर हो गई हैं। छत और दीवारों से पानी रिसकर टपक रहा है। फर्श में टाइल्सों के बीच दरार दिखने लगी हैं।
इससे पता चलता है कि निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया गया है। वहीं स्किल पार्क के निर्माण में कई तकनीकी चूक भी हुई हैं। जिससे एशियन बैंक से मिले फंड की बर्बादी हो रही है। स्किल पार्क के निर्माण की जिम्मेदारी श्रीजी इंफ्रास्ट्रक्चर के पास है। जिसे निर्माण कार्य में देरी के बावजूद साल 2023 में पुरस्कृत किया जा चुका है।
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तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास राज्यमंत्री गौतम टेटवाल सहित स्किल पार्क सीईओ गिरीश शर्मा तक भी घटिया निर्माण की शिकायत पहुंची है। ई-मेल के जरिए 8 जुलाई को भेजी गई इस शिकायत में स्किल पार्क के जनरल मैनेजर (सिविल) संजय जैन पर सवाल उठाए गए हैं।
गुणवत्ता के परीक्षण का दायित्व उन्हें मिला था लेकिन वे घटिया निर्माण कराते रहे। शिकायत में जनरल मैनेजर को ऊंचे ओहदे पर बैठे व्यक्ति का संरक्षण होने की आशंका जताई गई है। वहीं उन्हें प्रोजेक्ट से हटाने की भी बात लिखी है।
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ग्लोबल स्किल पार्क के घटिया निर्माण और तकनीकी अधिकारी की उदासीनता की शिकायत पर सीईओ आईएएस गिरीश शर्मा ने एक्सपर्ट्स को जांच सौंपी है। निर्माण में कहां लापरवाही हुई है इसका परीक्षण टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के तकनीकी अधिकारी करेंगे।
सीईओ शर्मा का कहना है शिकायत पर स्किल पार्क के निर्माण का परीक्षण कराया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट सामने आने के बाद जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।
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क्या है मप्र
मध्यप्रदेश में युवाओं में तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण के जरिए कौशल विकास करने के उद्देश्य से इस परियोजना की शुरूआत की गई है। इसके लिए मध्यप्रदेश सरकार के तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग को एशियन डेव्लपमेंट बैंक यानी एडीबी से 967 करोड़ से ज्यादा की फंडिंग हुई है। जबकि पूरा प्रोजेक्ट 1548 करोड़ की लागत का है।
पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने इसे स्वीकृति दी थी। स्किल पार्क का निर्माण भोपाल के नरेला शंकरी (निजामुद्दीन) क्षेत्र में इसका निर्माण जारी है। अब तक इसका प्रशिक्षण वाला हिस्सा पूरा हो चुका है जबकि हॉस्टल और आवास जैसे काम जारी है।
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संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क 30 एकड़ के लंबे- चौड़े कैंपस में बनाया जा रहा है। जहां एक साल 6 हजार युवाओं को तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें तकनीकी प्रशिक्षण के लिए प्रशिक्षक, मशीनरी और परीक्षण की व्यवस्था होगी।
स्किल पार्क से हर साल 10 हजार युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार से जोड़ने का भी लक्ष्य रखा गया है। इस इमारत के निर्माण में सिंगापुर के एक्सपर्ट्स से तकनीकी परामर्श और सहयोग लिया गया है।
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भोपाल में 1548 करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन स्किल पार्क पांच साल बाद भी पड़ा है। इसके तैयार होने से पहले ही बारिश ने गुणवत्ता की कलई धो कर रख दी है। एशियन डेव्लपमेंट बैंक से ऋण लेकर बनाए जा रहे ग्लोबल स्किल पार्क के घटिया निर्माण की शिकायत सरकार तक पहुंची है।
शिकायत में इस प्रोजेक्ट के जनरल मैनेजर (सिविल) की भूमिका को कटघरे में खड़ा किया गया है। वहीं निर्माण की घटिया गुणवत्ता की वजह से यहां प्रशिक्षण लेने वाले छात्र और कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए गए हैं।
मध्य प्रदेश में विकास के नाम पर निर्माण कार्यों की बाढ़ आ गई है। प्रदेश में करोड़ों के सरकारी निर्माण जारी हैं लेकिन गुणवत्ता में संतुष्टि के पैमाने पर एक भी खरा नहीं उतर पाया है। भोपाल के ऐशबाग क्षेत्र स्थित 90 डिग्री आरओबी का मामला हो या इंदौर में जेड आकार का फ्लाईओवर, हर मामले में तकनीकी चूक सामने आ रही है।
जबलपुर में करोड़ों की लागत के फ्लाईओवर में चंद दिनों में ही दरारें आ गई थीं। वहीं भोपाल में जीजी फ्लाई ओवर अधिकारियों की लापरवाही का बड़ाउदाहरण बन गया है।
ऐसे गुणवत्ताहीन निर्माण पर सरकार के खजाने से करोड़ों रुपए बर्बाद किए जा चुके हैं। अब डेढ़ हजार करोड़ से भी ज्यादा लागत वाले संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क की गुणवत्ता सवालों में घिर गई है।
तीन साल पिछड़ा निर्माण
एडीबी के फंड की बर्बादी
इससे पता चलता है कि निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया गया है। वहीं स्किल पार्क के निर्माण में कई तकनीकी चूक भी हुई हैं। जिससे एशियन बैंक से मिले फंड की बर्बादी हो रही है। स्किल पार्क के निर्माण की जिम्मेदारी श्रीजी इंफ्रास्ट्रक्चर के पास है। जिसे निर्माण कार्य में देरी के बावजूद साल 2023 में पुरस्कृत किया जा चुका है।
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ड्यूटी में फेल जनरल मैनेजर
गुणवत्ता के परीक्षण का दायित्व उन्हें मिला था लेकिन वे घटिया निर्माण कराते रहे। शिकायत में जनरल मैनेजर को ऊंचे ओहदे पर बैठे व्यक्ति का संरक्षण होने की आशंका जताई गई है। वहीं उन्हें प्रोजेक्ट से हटाने की भी बात लिखी है।
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टाटा कंसल्टेंसी को सौंपी जांच
सीईओ शर्मा का कहना है शिकायत पर स्किल पार्क के निर्माण का परीक्षण कराया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट सामने आने के बाद जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।
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क्या है मप्र कौशल विकास योजना
पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने इसे स्वीकृति दी थी। स्किल पार्क का निर्माण भोपाल के नरेला शंकरी (निजामुद्दीन) क्षेत्र में इसका निर्माण जारी है। अब तक इसका प्रशिक्षण वाला हिस्सा पूरा हो चुका है जबकि हॉस्टल और आवास जैसे काम जारी है।
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स्किल पार्क बनाने का क्या है उद्देश्य
स्किल पार्क से हर साल 10 हजार युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार से जोड़ने का भी लक्ष्य रखा गया है। इस इमारत के निर्माण में सिंगापुर के एक्सपर्ट्स से तकनीकी परामर्श और सहयोग लिया गया है।
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