अधूरे प्रोजेक्ट, ब्लैकलिस्ट ठेकेदारों के बाद अब एनएचएआई के भरोसे प्रदेश के बड़े हाईवे

Ramanand Tiwari | Jun 09, 2026, 23:42 IST
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सुधरेंगी एमपी की सड़कें
Photograph: (THESOOTR)

BHOPAL. एनएचएआई ने मध्य प्रदेश के अधूरे हाईवे प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी संभाली है। सुधार और निवेश की इस योजना में अगले दो वर्षों में 6,000 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होंगे।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...

  • एनएचएआई संभालेगा तीन प्रमुख हाईवे की जिम्मेदारी।
  • अगले दो वर्षों में 6,000 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होंगे।
  • सिंगरौली, ग्वालियर-भिंड और इंदौर-सेंधवा हाईवे में सुधार होगा।
  • फ्लाईओवर, अंडरपास और बायपास से ट्रैफिक जाम कम होगा।
  • पुराने अधूरे प्रोजेक्ट और ब्लैकलिस्ट ठेकेदारों की वजह से सुधार जरूरी था।
मध्य प्रदेश में लाखों लोग वर्षों तक टूटी सड़कों, अधूरे निर्माण और धूल-कीचड़ के बीच सफर करने को मजबूर रहे। जिन हाईवे परियोजनाओं को समय पर पूरा होना था, वे फाइलों और विवादों में उलझती रहीं।

कई जगह निर्माण एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल उठे और कुछ ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट तक करना पड़ा। अब इन्हीं परियोजनाओं की जिम्मेदारी एनएचएआई के हाथ में आने के बाद तस्वीर बदलने का दावा किया जा रहा है। अगले दो वर्षों में 6,000 करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर प्रदेश के तीन महत्वपूर्ण हाईवे कॉरिडोर को नई पहचान देने की तैयारी है।

आखिर 15 साल तक जिम्मेदार कौन था?

सड़कें सिर्फ कंक्रीट और डामर की परत नहीं होतीं। वे अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की धड़कन होती हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में लोग वर्षों तक खराब सड़कों की कीमत समय, ईंधन और हादसों के रूप में चुकाते रहे।

अब जब नई शुरुआत की बात हो रही है, तो पुराने सवाल भी उठ रहे हैं कि जिन परियोजनाओं को वर्षों पहले पूरा हो जाना चाहिए था, वे आखिर इतनी देर तक अधूरी क्यों रहीं?

एक नजर में पूरी योजना

मुख्य बातें...

  • अगले दो वर्षों में 6,000 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश।
  • प्रदेश के तीन प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार और उन्नयन।
  • अधूरी परियोजनाओं को एमपीआरडीसी से एनएचएआई को सौंपा गया।
  • कई निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पहले विवादों में रही।
  • भीड़भाड़ वाले इलाकों में बायपास और सर्विस रोड का निर्माण होगा।
  • फ्लाईओवर और अंडरपास बनाकर जाम कम करने की योजना।
  • उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बीच संपर्क बेहतर होगा।

1. सीधी-सिंगरौली हाईवे: 15 साल का इंतजार, अब उम्मीद की राह

कभी लाइफलाइन, फिर परेशानी का पर्याय बना विंध्य क्षेत्र और ऊर्जा राजधानी सिंगरौली को जोड़ने वाला एनएच-39 लंबे समय से बदहाली का शिकार रहा। अधूरा निर्माण, खराब गुणवत्ता और लगातार देरी के कारण यह मार्ग लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गया।

क्यों अहम है यह सड़क?

  • कुल लंबाई: 105 किलोमीटर
  • सिंगरौली के औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ती है।
  • हजारों यात्रियों की रोजमर्रा की जरूरत का हिस्सा।

लोगों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ा?

  • बारिश में गड्ढे और कीचड़।
  • गर्मियों में धूल का गुबार।
  • खराब सड़क के कारण यात्रा समय में वृद्धि।
  • हादसों का लगातार खतरा।

अब क्या बदलेगा?

नई एजेंसियों के जरिए काम दोबारा शुरू किया गया है। लगभग 500 करोड़ रुपए की लागत से परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

2. ग्वालियर-भिंड हाईवे: वर्षों की मांग के बाद मिला विस्तार का रास्ता

ग्वालियर और भिंड को जोड़ने वाला एनएच-719 लंबे समय से फोर-लेन बनाने की मांग झेल रहा था। यह मार्ग उत्तर प्रदेश के इटावा तक पहुंचता है और क्षेत्रीय व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

प्रोजेक्ट की प्रमुख बातें...

  • लंबाई: 120 किलोमीटर
  • वर्तमान स्थिति: टू-लेन
  • प्रस्तावित उन्नयन: फोर-लेन
  • अनुमानित लागत: 2,550 करोड़ रुपए
  • टेंडर प्रक्रिया शुरू
यह प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद क्षेत्रीय व्यापार और आवागमन को नई गति मिल सकती है।

3. इंदौर-सेंधवा कॉरिडोर: बढ़ते ट्रैफिक का समाधान तलाशता हाईवे

आगरा-मुंबई मार्ग पर दबाव कम करने की तैयारी है। इंदौर से खलघाट, सेंधवा होते हुए महाराष्ट्र सीमा तक जाने वाला एनएच-52 लगातार बढ़ते ट्रैफिक के दबाव का सामना कर रहा है। अब इसे 4-लेन से 6-लेन करने की योजना पर काम चल रहा है।

प्रमुख तथ्य...

  • कुल लंबाई: 160 किलोमीटर।
  • अनुमानित लागत: करीब 3,000 करोड़ रुपए।
  • डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया जारी।

इससे क्या फायदा होगा?

  • भारी वाहनों की आवाजाही आसान होगी।
  • लॉजिस्टिक्स सेक्टर को राहत मिलेगी।
  • आगरा-मुंबई कॉरिडोर पर जाम कम होगा।
  • उत्तर, पश्चिम और दक्षिण भारत की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

घाट क्षेत्रों को भी मिलेगा विस्तार...

  • भेरू घाट
  • बाकनेर घाट
  • बिजासन घाट
इन क्षेत्रों को भी 6-लेन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

शहरों में जाम से निपटने की अलग रणनीति

एनएचएआई की योजना के तहत शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक प्रबंधन को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

प्रस्तावित व्यवस्थाएं...

  • बायपास निर्माण
  • सर्विस रोड
  • फ्लाईओवर
  • अंडरपास
  • सुरक्षित जंक्शन
इससे यात्रियों का समय बचेगा और सड़क सुरक्षा में भी सुधार होने की उम्मीद है।

सबसे बड़ा सवाल: क्या इस बार समय पर पूरा होगा काम?

लोगों ने घोषणाएं पहले भी सुनी हैं। कई परियोजनाओं की नींव रखी गई, लेकिन परिणाम जमीन पर नजर नहीं आए। इसलिए इस बार असली परीक्षा समयसीमा और गुणवत्ता की होगी।

यदि तय समय में काम पूरा होता है, तो यह सिर्फ सड़क निर्माण नहीं होगा, बल्कि वर्षों से उपेक्षित क्षेत्रों के लिए विकास का नया रास्ता साबित होगा। लेकिन अगर फिर देरी हुई, तो यह सवाल और गहरा होगा कि आखिर जनता को बेहतर बुनियादी सुविधाओं के लिए इतना लंबा इंतजार क्यों करना पड़ता है।

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