अक्षय बम ने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस छोड़ने के लिए शपथपत्र में पहले BJP की चाल बताया था, अब इसे बताया जिम्मेदार

Sanjay Gupta | Aug 19, 2025, 12:19 IST
Share
indore-akshay-bam-joins-bjp-lok-sabha-election-affidavit
indore-akshay-bam-joins-bjp-lok-sabha-election-affidavit

अक्षय बम के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस छोड़ने और भाजपा जॉइन करने के बाद उनके शपथपत्र में किए गए बदलाव और आरोपों का विश्लेषण द सूत्र की इस खबर में पढ़ें...

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से इंदौर सीट के लिए टिकट पाए अक्षय कांति बम ने अचानक से नामांकन फॉर्म वापस लिया और रातों-रात बीजेपी में शामिल हो गए। नतीजतन, कांग्रेस उम्मीदवार विहीन हो गई और उसे लोकसभा चुनाव में नोटा को समर्थन करना पड़ा। बीजेपी उम्मीदवार शंकर लालवानी ने वोटों के हिसाब से देश की सबसे बड़ी जीत हासिल की।

'द सूत्र' ने इस मामले में अक्षय बम के शपथपत्र के आधार पर खुलासा किया था, जो उन्होंने कोर्ट में दिया था। इसमें उन्होंने अपने कांग्रेस के टिकट पर नामांकन फॉर्म वापस लेने के लिए बीजेपी को ही जिम्मेदार बताया और बीजेपी की चाल बताया था। वह भी ऑन रिकॉर्ड। अब उनके द्वारा दायर की गई नई याचिका में इस एफिडेविट में उन्होंने नामांकन फॉर्म वापस लेने के लिए इन्हें जिम्मेदार बताया है।

इस याचिका में पहले शपथपत्र में यह दावा किया गया था

अक्षय कांति बम और उनके पिता कांतिलाल बम पर जिला कोर्ट ने 24 अप्रैल 2024 को युनूस पटेल के आवेदन पर धारा 307 (हत्या के प्रयास) लगाने के आदेश दिए थे। इस आदेश के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट इंदौर में रिट पिटीशन 43350/2024 दायर की थी। इसमें अक्षय बम ने शपथपत्र पेश किया। इसमें कहा कि-

याचिकाकर्ता नंबर 1 (अक्षय बम) को चुनाव के लिए कांग्रेस (आई) पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया गया था, इसलिए बीजेपी ने याचिकाकर्ताओं के खिलाफ धारा 307, आईपीसी के तहत अपराध को बदलने के लिए आवेदन दायर करने के लिए उन पर दबाव डाला है। कृपया ध्यान दें कि बीजेपी पार्टी इस चाल में सफल रही, क्योंकि याचिकाकर्ता संख्या 1 ने चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया।

यानी सरल शब्दों में कहा जाए तो बम ने आवेदन में कहा था कि बीजेपी ने दबाव डाला था कि उन पर अपराध को धारा 307 में बदला जाए, क्योंकि वह चुनाव के लिए कांग्रेस के उम्मीदवार घोषित हो चुके थे। बम के आवेदन में जोर देकर लिखा है कि कृपया ध्यान दें (नोटिस करें) कि बीजेपी पार्टी इस चाल में सफल रही और याचिकाकर्ता संख्या 1 यानी अक्षय बम ने चुनाव से नाम वापस ले लिया।
e56a9d1a-bcf
e56a9d1a-bcf
ये खबर भी पढ़िए...कांग्रेस से BJP में आए अक्षय बम के पिता कांति बम के हाथ से फिसल रही 200 करोड़ की भंडारी मिल जमीन

अब इस नई याचिका में शपथपत्र में यह लिखा है-

अब अक्षय बम और उनके पिता कांति बम ने एक बार फिर हाईकोर्ट में धारा 307 को खत्म करने के लिए याचिका दायर की है। पूर्व याचिका में अपने पक्ष में आदेश नहीं मिलने पर उन्होंने रिवीजन याचिका, जिसका क्रमांक CRR 1483/2025 है, दायर की है। इसमें उन्होंने शपथपत्र फिर से दिया है। अब इसमें बदलाव करके यह लिखा है-

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि चूंकि याचिकाकर्ता संख्या 1 (अक्षय बम) को वर्ष 2024 के चुनावों के लिए कांग्रेस (आई) पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया गया था, इसलिए राजनीतिक कारणों से प्रतिवादी संख्या 2 (यानी युनुस पटेल) ने याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 307 के अंतर्गत अपराध में परिवर्तन हेतु आवेदन प्रस्तुत किया है। कृपया ध्यान दें कि प्रतिवादी संख्या 2 इस चाल में सफल रहा, क्योंकि याचिकाकर्ता संख्या 1 ने चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया।

ये खबर भी पढ़िए...कांग्रेस से बीजेपी में गए अक्षय बम को लेकर कांग्रेस नेता ने कही ये बात, राहुल गांधी ने लगा लिया गले

'द सूत्र' के खुलासे से भद पिटने के बाद यह किया बम ने-

इस नए शपथपत्र में भी अक्षय बम की भाषा वही है, बस उन्होंने इसमें 'द सूत्र' के खुलासे के बाद भद पिटने और बीजेपी से फटकार लगने के बाद बीजेपी शब्द हटा दिया है और इसकी जगह प्रतिवादी नंबर दो यानी युनुस पटेल का नाम डाल दिया है। यानी वह अभी भी ऑन रिकॉर्ड यही मानते हैं कि कांग्रेस से नामांकन फॉर्म वापस उठाने और बीजेपी में जाने की वजह यही केस धारा 307 वाला ही था। इसी के चलते दबाव में उन्होंने कांग्रेस का नामांकन फॉर्म उठाया और बीजेपी में गए।

ये नया शपथ पत्र इसमें कांग्रेस छोड़ने के रीजन में बीजेपी शब्द हटा दिया
ये नया शपथ पत्र इसमें कांग्रेस छोड़ने के रीजन में बीजेपी शब्द हटा दिया

लोकसभा चुनाव में कब क्या हुआ घटनाक्रम देखिए

👉अक्षय बम नवंबर 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से टिकट चाहते थे, लेकिन वह राजा मंधवानी को मिल गया। बाद में 16 मार्च 2024 को देश में लोकसभा चुनाव घोषित हुए। बीजेपी से शंकर लालवानी प्रत्याशी बने। वहीं बम को 24 मार्च को कांग्रेस ने इंदौर लोकसभा सीट के प्रत्याशी घोषित कर दिया।

👉बम ने 25 अप्रैल को शहराध्यक्ष सुरजीत सिंह चड्ढा, जिलाध्यक्ष सदाशिव यादव, प्रमोद टंडन आदि के साथ जाकर नामांकन दाखिल कर दिया। उनकी संपत्ति 75 करोड़ से ज्यादा है और लाखों की रोलेक्स घड़ी पहनते हैं।

👉इंदौर लोकसभा चुनाव, कांग्रेस के उम्मीदवार डॉ. अक्षय कांति बम (जैन), 29 अप्रैल को सुबह कांग्रेस नेता, कार्यकर्ताओं के साथ सुबह नौ बजे तक चोइथराम मंडी में प्रचार करते हैं और फिर घर नहाने जाने का बोलकर रवाना होते हैं। फिर सुबह 11 बजे अचानक कलेक्टोरेट में जिला निर्वाचन अधिकारी यानी कलेक्टर आशीष सिंह के दफ्तर में हलचल होती है, बम बीजेपी के विधायक रमेश मेंदोला व अन्य नेताओं के साथ वहां पहुंचते हैं, दो मिनट में चुनाव से अपना नाम वापस लेने के आवेदन पर हस्ताक्षर करते हैं और दो मिनट में ही रवाना हो जाते हैं।

👉कुछ देर में एक सेल्फी सामने आती है, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की इसमें वह कार में आगे हैं और उनके पीछे बम और रमेश मेंदोला बैठे हुए हैं।

👉इसी दिन 29 अप्रैल की शाम को बम बीजेपी दफ्तर में जाते हैं और सीएम डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में बीजेपी जॉइन कर लेते हैं।

ये खबर भी पढ़िए...MP Politics: लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार पर मंथन, प्रत्याशियों ने गिनाए हार के कारण, प्रदेश प्रभारी ने की चर्चा

बम ने बीजेपी में जाने का कारण यह बताया था-

बम ने कांग्रेस से बीजेपी में जाने पर सबसे पहले कहा था कि राष्ट्रहित और सनातन सर्वोपरि है। उल्लेखनीय है कि उस दौरान राम मंदिर प्रतिष्ठा में कांग्रेस नहीं गई थी और इस दौरान कई नेताओं ने इसी बात का हवाला देकर कांग्रेस छोड़ी थी। इसमें संजय शुक्ला, विशाल पटेल जैसे इंदौर के पूर्व विधायक भी शामिल थे। बाद में 5 मई को बम ने बीजेपी दफ्तर इंदौर में प्रेस कांफ्रेंस की थी। इसमें कैलाश विजयवर्गीय व अन्य नेता उपस्थित थे। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि- मैंने जीतू पटवारी से तीन बार बात करते हुए असहयोग का मुद्दा उठाया था, मेरे चुनाव कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए। दो घंटे तक बड़े नेता एयरपोर्ट लाउंज में रहे लेकिन मेरा प्रचार नहीं किया। उनसे जब पूछा गया कि क्या हत्या के प्रयास की धारा के कारण वह बीजेपी में गए तो इस पर कहा था कि कांग्रेस का उम्मीदवार घोषित होने के बाद इस तरह के मामले जानबूझकर लाए गए।

thesootr links

दसूत्र की खबरें आपको कैसी लगती हैं? Google my Business पर हमें कमेंट केसाथ रिव्यू दें। कमेंट करने के लिए इसी लिंक पर क्लिक करें

अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬👩‍👦👨‍👩‍👧‍👧👩

MP लोकसभा चुनाव | एमपी कांग्रेस | एमपी बीजेपी | इंदौर न्यूज | MP News

Tags:
  • MP News
  • मध्यप्रदेश
  • इंदौर न्यूज
  • एमपी कांग्रेस
  • एमपी बीजेपी
  • MP लोकसभा चुनाव
  • अक्षय बम
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती

By VINAY VERMA

मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता

By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar

नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

By Neel Tiwari

20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं